{"_id":"57a3941c4f1c1b39302b8894","slug":"ngt-is-bulldozed-the-illegal-construction-of-the-yamuna-banks","type":"story","status":"publish","title_hn":"यमुना किनारे के अवैध निर्माण गिरवा सकता है एनजीटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमुना किनारे के अवैध निर्माण गिरवा सकता है एनजीटी
अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 05 Aug 2016 12:44 AM IST
विज्ञापन
भ्ावन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यमुना किनारे डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण और वैश्विक धरोहर ताजमहल की उपेक्षा को लेकर गुरुवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्राधिकरणों को खूब फटकार लगाई। एनजीटी ने प्रदेश सरकार व आगरा प्राधिकरण से कहा कि जब आप अरबों रुपये का राजस्व देने वाले ताजमहल को नहीं बचा सकते तो यमुना को क्या बचाएंगे। ताज के किनारे यमुना में कचरा फेंका जाता है। इससे बड़ी बेइज्जती ताजमहल की क्या होगी। एनजीटी ने कहा कि यमुना के डूब क्षेत्र तक ही नहीं नदी की तलहटी में संरचनाएं खड़ी हो गई हैं।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण समिति के सदस्य व याची डीके जोशी के मामले पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मामले पर शुक्रवार को सुनवाई जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग व आगरा विकास प्राधिकरण की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कहा एनजीटी के आदेशों का पालन किया जा रहा है। वहीं याची ने यमुना किनारे चल रही निर्माण परियोजनाओं की कुछ तस्वीरें पेश कीं। इन तस्वीरों को देखने के बाद एनजीटी ने कहा प्राधिकरणों को शर्म करनी चाहिए। परियोजनाएं नदी तक पहुंच गई हैं। तस्वीर की तस्दीक करने पर पीठ को जानकारी दी गई कि यह तस्वीर मंगलम एस्टेट के निर्माण कार्य की हैं। इस पर पीठ ने टिप्पणी में कहा कि अब प्राधिकरण इस पर क्या सफाई देंगे।
पीठ ने मंगलम एस्टेट की ओर से पेश अधिवक्ता से कहा वह नदी का रास्ता क्यों नहीं बदल देते। तस्वीर में जिस परियोजना पर सवाल खड़ा हुआ उसकी जमीन की खसरा संख्या 276 थी। आदेशों की अवहेलना और गलत दलीलों पर गुस्साए एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार और आगरा के संबंधित प्राधिकरणों से कहा कि तत्काल इसे नष्ट किया जाए। वहीं प्राधिकरणों की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दिया कि तस्वीर में जो संरचना याची की ओर से दिखाई जा रही हैं उसे नष्ट किया जा चुका है। इस पर पीठ ने कहा कि क्या आप अपना बयान रिकॉर्ड कराएंगे। इस बयान की जांच के लिए अभी लोकल कमिश्नर यहां से भेजे जाएंगे। इसके बाद अधिवक्ता अपनी बात से पलट गए। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति की जानकारी के लिए शुक्रवार तक का समय चाहिए। पीठ ने कहा कि समय दिया जाता है लेकिन पूरी और स्पष्ट जानकारी लेकर प्राधिकरण के अधिवक्ता ट्रिब्यूनल के समक्ष आएं।
विज्ञापन
इन परियोजनाओं के आ रहे नाम
याची ने अपनी दलील में कहा कि आगरा में 2010 में 25 साल की सबसे भीषण बाढ़ आई थी। इस लिहाज से कई परियोजनाओं का दायरा व क्षेत्र यमुना का डूब क्षेत्र है। इनमें कल्याणी, राधा वल्लभ इंटर कॉलेज, ताज व्यू अपार्टमेंट, अपर्णा, राजश्री एस्टेट जैसे नाम आ रहे हैं।
डूब क्षेत्र के नक्शे पर आपत्ति
याची के अधिवक्ता राहुल चौधरी ने ट्रिब्युनल में बहस दौरान सिंचाई विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए डूब क्षेत्र के नक्शे पर आपत्ति दर्ज की। उन्होंने इस संबंध विभिन्नि विभागों की रिपोर्टों का भी हवाला दिया। इधर, एनजीटी ने मंगलम एस्टेट के पीछे नदी किनारे बनी बाउंड्री पर सवाल खड़े किए। सिंचाई विभाग को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि यह बाउंड्री अभी हटी है या नहीं।
विज्ञापन
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण समिति के सदस्य व याची डीके जोशी के मामले पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मामले पर शुक्रवार को सुनवाई जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग व आगरा विकास प्राधिकरण की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कहा एनजीटी के आदेशों का पालन किया जा रहा है। वहीं याची ने यमुना किनारे चल रही निर्माण परियोजनाओं की कुछ तस्वीरें पेश कीं। इन तस्वीरों को देखने के बाद एनजीटी ने कहा प्राधिकरणों को शर्म करनी चाहिए। परियोजनाएं नदी तक पहुंच गई हैं। तस्वीर की तस्दीक करने पर पीठ को जानकारी दी गई कि यह तस्वीर मंगलम एस्टेट के निर्माण कार्य की हैं। इस पर पीठ ने टिप्पणी में कहा कि अब प्राधिकरण इस पर क्या सफाई देंगे।
विज्ञापन
पीठ ने मंगलम एस्टेट की ओर से पेश अधिवक्ता से कहा वह नदी का रास्ता क्यों नहीं बदल देते। तस्वीर में जिस परियोजना पर सवाल खड़ा हुआ उसकी जमीन की खसरा संख्या 276 थी। आदेशों की अवहेलना और गलत दलीलों पर गुस्साए एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार और आगरा के संबंधित प्राधिकरणों से कहा कि तत्काल इसे नष्ट किया जाए। वहीं प्राधिकरणों की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दिया कि तस्वीर में जो संरचना याची की ओर से दिखाई जा रही हैं उसे नष्ट किया जा चुका है। इस पर पीठ ने कहा कि क्या आप अपना बयान रिकॉर्ड कराएंगे। इस बयान की जांच के लिए अभी लोकल कमिश्नर यहां से भेजे जाएंगे। इसके बाद अधिवक्ता अपनी बात से पलट गए। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति की जानकारी के लिए शुक्रवार तक का समय चाहिए। पीठ ने कहा कि समय दिया जाता है लेकिन पूरी और स्पष्ट जानकारी लेकर प्राधिकरण के अधिवक्ता ट्रिब्यूनल के समक्ष आएं।
विज्ञापन
इन परियोजनाओं के आ रहे नाम
याची ने अपनी दलील में कहा कि आगरा में 2010 में 25 साल की सबसे भीषण बाढ़ आई थी। इस लिहाज से कई परियोजनाओं का दायरा व क्षेत्र यमुना का डूब क्षेत्र है। इनमें कल्याणी, राधा वल्लभ इंटर कॉलेज, ताज व्यू अपार्टमेंट, अपर्णा, राजश्री एस्टेट जैसे नाम आ रहे हैं।
डूब क्षेत्र के नक्शे पर आपत्ति
याची के अधिवक्ता राहुल चौधरी ने ट्रिब्युनल में बहस दौरान सिंचाई विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए डूब क्षेत्र के नक्शे पर आपत्ति दर्ज की। उन्होंने इस संबंध विभिन्नि विभागों की रिपोर्टों का भी हवाला दिया। इधर, एनजीटी ने मंगलम एस्टेट के पीछे नदी किनारे बनी बाउंड्री पर सवाल खड़े किए। सिंचाई विभाग को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि यह बाउंड्री अभी हटी है या नहीं।