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भूवैज्ञानिक की मौत का मामला: भांजे ने दी मुखाग्नि, बेटे और पत्नी नहीं आए; आखिरी बार बहनों ने देखा भाई का चेहरा

Wed, 20 Mar 2024 03:04 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Wed, 20 Mar 2024 03:04 PM IST
सार

आगरा में भूवैज्ञानिक की मौत पर भांजे ने मुखाग्नि दी। उनके बेटे और पत्नी नहीं आए। आखिरी बार बहनों ने भाई का चेहरा देखा।दोनों के दिलों में भाई के दुनिया से जाने का गम था।

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Nephew lit funeral pyre on death of geologist in Agra his son and wife did not come from abroad
भूवैज्ञानिक राजीव माथुर की बहनें व भांजा - फोटो : संवाद

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में ऋषि मार्ग (शाहगंज) के रहने वाले 75 वर्षीय भूवैज्ञानिक राजीव माथुर घर में अकेले ही रहते थे। बेटे और पत्नी से नाता तोड़ लिया था। बहनों से कभी-कभार फोन पर बात किया करते थे। वह भी 16 साल से मिलने नहीं आई थीं। मगर, जिंदगी का साथ छूटा तो अपनों को साथ जरूर मिल गया। उनकी मौत की खबर पर आखिरी बार भाई का चेहरा देखने के लिए दो छोटी बहनें आगरा आई थीं। दोनों के दिलों में भाई के दुनिया से जाने का गम था। भांजे ने मुखाग्नि दी।

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शुक्रवार को कोठी नंबर 85 में राजीव माथुर का शव मिला था। वह अकेले ही रहते थे। भू-वैज्ञानिक थे। पड़ोसियों ने दुर्गंध आने पर पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने शव को निकाला था। पत्नी और बेटे से संपर्क नहीं हो सका था। उनके वित्तीय सलाहकार प्रवीन जैन का नंबर मिला था। उनकी मदद से मुंबई और वडोदरा में रहने वाली बहनों रीटा और रेनू को सूचना दी गई थी। 

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मंगलवार को रीटा निगम, पति रवि, बेटे रोहित, रेनू और उनके पति राजेश सक्सेना आगरा पहुंचे। इस पर पुलिस ने पंचनामा की कार्रवाई की। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजन के सुपुर्द कर दिया गया। भांजे रोहित ने ताजगंज स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया। मामा को मुखाग्नि दी। इस दौरान बहनें रोती रहीं। यही सोच रही थीं कि भाई से एक बार और मिलने आ जातीं।

माता-पिता के लिए पत्नी और बेटे से तोड़ लिया नाता

बहन रेनू ने बताया कि भाई राजीव ने कनाडा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। वह ओएनजीसी में अधिकारी रहे। इसके बाद इंडियन ऑयल कार्पोरेशन में नौकरी की। वह अमेरिका भी चले गए। मां राजेंद्र कुमारी दयालबाग स्थित विद्यालय में प्रधानाचार्या थीं। पिता राज बिहारी माथुर पत्रकार थे। उन्हें जर्मन भाषा का भी ज्ञान था। 

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आगरा में माता-पिता अकेले रहते थे। राजीव माता-पिता से बेहद प्यार करते थे। इस कारण उन्होंने कनाडा से भारत आने का फैसला किया। उन्होंने भाभी को भी तलाक दे दिया। मां-बाप की सेवा के लिए वर्ष 1986 में आ गए थे। वर्ष 1994 में मां की मौत हो गई। 1 साल बाद पिता भी चल बसे। इससे राजीव पूरी तरह से टूट गए थे। भाई और पिता को अखबार पढऩे का शौक था। ऐसा कोई दिन नहीं जाता था, जब अखबार नहीं पढ़ते थे।

16 साल पहले भाई से हुई थी बहनों की मुलाकात

बहनों ने बताया कि भाई कभीकभार ही फोन पर बात करते थे। हालचाल पूछा करते थे। वर्ष 2008 में दोनों भाई से मिलने आई थीं। कई दिन रुककर भी गए थे। इसके बाद कभी मिलने नहीं आ सके। राजीव वीडियो कॉल भी करते थे। मगर, 2 मिनट से ज्यादा बात नहीं करते थे। एक बार कॉल कटने के बाद दोबारा रिसीव नहीं करते थे। 

बात करने के लिए कई दिन इंतजार करना पड़ता था। 1 महीने पहले भी फोन करके हालचाल पूछा था। बच्चों के बारे में जानकारी ली थी। उन्होंने उनके बारे में भी जानकारी की थी। कुछ देर बाद बात कर फोन काट दिया। 1 सप्ताह पहले फोन करने पर मोबाइल स्विच आफ आया था। इसके बाद फोन खुला नहीं। वह समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर भाई का फोन क्यों बंद है।

गेट से करते थे बात, कमरे में नहीं जाने देते थे राजीव

मध्य प्रदेश के रहने वाले प्रवीन जैन राजीव माथुर के वित्तीय सलाहकार थे। उन्होंने बताया कि वह कई बार भू-वैज्ञानिक के घर आए थे। मगर, वह उन्हें घर में प्रवेश नहीं देते थे। गेट पर ही खड़े होकर बात किया करते थे। ज्यादा देर तक रोकते भी नहीं थे। उन्हें मिलने के लिए कई बार इंतजार भी करना पड़ता था। उनके पास बेटे का फोन नंबर नहीं है। संपर्क का प्रयास कर रहे हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम कराया गया है। इसकी रिपोर्ट का इंतजार है। प्रथम दृष्टया बीमारी से मौत की आशंका है।

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