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इस संयोग की वजह से मंगलकारी होगा नवरात्र, पर ये युति दे रही ऐसे संकेत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 13 Mar 2018 04:14 PM IST
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चैत्र नवरात्र रविवार (18 मार्च) से प्रारंभ हो रहे हैं। नवरात्र इस साल आठ दिन के होंगे। सप्तमी और अष्टमी एक ही दिन रहेगी। माता हाथी पर सवार होकर भक्तों के लिए सुख-संपत्ति लेकर आएंगी।
ज्योतिषीय गणनाओं में यह नवरात्र खुशहाली लेकर आएगा। वासंतिक नवरात्र के साथ ही नव संवत्सर का आरंभ होता है। रविवार को नव संवत्सर शुरू होने से इस वर्ष का राजा सूर्य है।
कन्या लग्न में नवरात्र और नव वर्ष का प्रारंभ होना कई सुयोग बना रहा है। आठ दिन का नवरात्र रविवार को ही पूर्ण हो रहा है। गज पर सवार होकर आ रही माता हाथी पर ही विदा होंगी। ये संयोग व्रत को और भी मंगलकारी बना रहा है।
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ज्योतिषीय गणनाओं में यह नवरात्र खुशहाली लेकर आएगा। वासंतिक नवरात्र के साथ ही नव संवत्सर का आरंभ होता है। रविवार को नव संवत्सर शुरू होने से इस वर्ष का राजा सूर्य है।
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कन्या लग्न में नवरात्र और नव वर्ष का प्रारंभ होना कई सुयोग बना रहा है। आठ दिन का नवरात्र रविवार को ही पूर्ण हो रहा है। गज पर सवार होकर आ रही माता हाथी पर ही विदा होंगी। ये संयोग व्रत को और भी मंगलकारी बना रहा है।
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महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय के अनुसार नव संवत्सर की कुंडली के सप्तम भाव में स्थित सूर्य, चंद्र, बुध और शुक्र की युति से भद्र नामक योग बन रहा है।
ये कल्याणकारी फल देने वाला होता है। हालांकि, मंगल और शनि की युति राजनीतिक उथल-पुथल के संकेत दे रही हैं। डा. हरिगोपाल शर्मा (भागवत किंकर) के मुताबिक भद्र योग के चलते इस वर्ष रुके हुए मांगलिक कार्य होंगे।
वर्षा अधिक होगी, जिससे फसलें अच्छी होंगी। महिलाओं का सम्मान बढ़ेगा। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ होगा। देश को आर्थिक तरक्की की राह पर लेकर जाएगा।
ये कल्याणकारी फल देने वाला होता है। हालांकि, मंगल और शनि की युति राजनीतिक उथल-पुथल के संकेत दे रही हैं। डा. हरिगोपाल शर्मा (भागवत किंकर) के मुताबिक भद्र योग के चलते इस वर्ष रुके हुए मांगलिक कार्य होंगे।
वर्षा अधिक होगी, जिससे फसलें अच्छी होंगी। महिलाओं का सम्मान बढ़ेगा। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ होगा। देश को आर्थिक तरक्की की राह पर लेकर जाएगा।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक कर सकते हैं कलश स्थापित
कलश स्थापना
डा. हरिकृष्ण पाराशर के मुताबिक प्रतिपदा तिथि में कलश स्थापन का विधान है। 18 को प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से शाम 6:08 तक है। इस बीच कभी भी कलश स्थापना की जा सकती है।
विशेष मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.36 से लेकर अपराह्न 12.34 तक है। इसी बीच कलश स्थापित कर भगवती का आह्वान व षोडशोपचार पूजन कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का विधान है।
शुभ कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6.31 से 7.46 बजे तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त 9.18 से 10.47 बजे तक होगा। अभिजीत काल में कलश स्थापना का मुहूर्त दोपहर 12.05 से 12.53 बजे तक रहेगा।
विशेष मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.36 से लेकर अपराह्न 12.34 तक है। इसी बीच कलश स्थापित कर भगवती का आह्वान व षोडशोपचार पूजन कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का विधान है।
शुभ कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6.31 से 7.46 बजे तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त 9.18 से 10.47 बजे तक होगा। अभिजीत काल में कलश स्थापना का मुहूर्त दोपहर 12.05 से 12.53 बजे तक रहेगा।
सज गई पूजन सामग्री की दुकान
पदयात्री
- फोटो : अमर उजाला
नवरात्र के त्योहार को लेकर शहर में पूजन सामग्री की दुकानें सज गई है। माता की पोशाक, चुनरी, सुहाग का सामान, हवन सामग्री आदि से दुकानें भर गई है। इस दिनों करौली की पैदल यात्रा भी चल रही है।
इस वजह से दुकानों पर भीड़ भी होने लगी है। पैदल यात्रा माता का दरबार सजा कर ले जाते हैं। हाथों में झंडे और चुनरी होती है। इस वजह से दुकानदारों के समय पर नहीं है।
शाहगंज निवासी राजेश कुमार ने बताया कि अभी तो पदयात्री आ रही हैं लेकिन बुधवार के बाद से नवरात्र की पूजन सामग्री की बिक्री गति पकड़ लेगी।
इस वजह से दुकानों पर भीड़ भी होने लगी है। पैदल यात्रा माता का दरबार सजा कर ले जाते हैं। हाथों में झंडे और चुनरी होती है। इस वजह से दुकानदारों के समय पर नहीं है।
शाहगंज निवासी राजेश कुमार ने बताया कि अभी तो पदयात्री आ रही हैं लेकिन बुधवार के बाद से नवरात्र की पूजन सामग्री की बिक्री गति पकड़ लेगी।