{"_id":"59c287e94f1c1b38688b56b5","slug":"navratra-in-begins-in-agra","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"घर-घर विराजेंगी मां दुर्गा, नवरात्र में इस तरह रोज बनेंगे शुभ योग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घर-घर विराजेंगी मां दुर्गा, नवरात्र में इस तरह रोज बनेंगे शुभ योग
ब्यूरो/अमर उजाला बाह (आगरा)
Updated Thu, 21 Sep 2017 09:35 AM IST
विज्ञापन
नवरात्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शारदीय नवरात्र का शुभारंभ गुरुवार सुबह से होगा। घट पूजन के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएंगी। पंडितों के मुताबिक इस बार नवरात्र में हर दिन शुभ योग होंगे।
ज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर ने बताया कि गुरुवार को हस्त नक्षत्र में प्रारंभ हो रहे नवरात्र में हर रोज शुभ योग बनेंगे। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र अगर हस्त नक्षत्र में आए तो उसका विशेष महत्व होता है। इस तरह से यह नवरात्रि विशेष शुभकारी है। परिवार में सुख, समृद्धि बढ़ेगी और साथ ही बीमारियां और कष्ट दूर होंगे।
बताया कि गुरुवार को सूर्य, चंद्र की स्थिति से ब्रह्म योग बनेगा। 22 सितंबर को सूर्य, चंद्र की नक्षत्र गणना से रवि योग बनेगा। 23 सितंबर को रवि और सर्वार्थ सिद्घि योग, 24 सितंबर को रवि योग, 25 सितंबर को रवि एवं सर्वार्थ सिद्घि योग, 27 सितंबर को सौभाग्य योग, 28 सितंबर को शोभन योग, 29 सितंबर प्रवर्ध व आनंद योग और 30 सितंबर को रवि एवं सर्वार्थ सिद्घ योग बनेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
ज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर ने बताया कि गुरुवार को हस्त नक्षत्र में प्रारंभ हो रहे नवरात्र में हर रोज शुभ योग बनेंगे। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र अगर हस्त नक्षत्र में आए तो उसका विशेष महत्व होता है। इस तरह से यह नवरात्रि विशेष शुभकारी है। परिवार में सुख, समृद्धि बढ़ेगी और साथ ही बीमारियां और कष्ट दूर होंगे।
विज्ञापन
बताया कि गुरुवार को सूर्य, चंद्र की स्थिति से ब्रह्म योग बनेगा। 22 सितंबर को सूर्य, चंद्र की नक्षत्र गणना से रवि योग बनेगा। 23 सितंबर को रवि और सर्वार्थ सिद्घि योग, 24 सितंबर को रवि योग, 25 सितंबर को रवि एवं सर्वार्थ सिद्घि योग, 27 सितंबर को सौभाग्य योग, 28 सितंबर को शोभन योग, 29 सितंबर प्रवर्ध व आनंद योग और 30 सितंबर को रवि एवं सर्वार्थ सिद्घ योग बनेगा।
विज्ञापन
नवरात्र का क्रम
नवरात्र
- फोटो : SELF
21 सितंबर को पहला नवरात्र (प्रतिपदा) शैलपुत्री स्वरूप की पूजा करें। 22 सितंबर शुक्रवार दूसरा नवरात्र देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। 23 सितंबर शनिवार तीसरा नवरात्र चंद्रघंटा की पूजा करें। 24 सितंबर रविवार चौथा नवरात्र कुष्मांडा स्वरूप की पूजा करें।
25 सितंबर सोमवार पांचवा नवरात्र स्कंदमाता की पूजा करें। 26 सितंबर मंगलवार छठा नवरात्र कात्यायनी देवी की पूजा करें। 27 सितंबर बुधवार सातवां नवरात्र कालरात्रि की पूजा करें। 28 सितंबर गुरुवार आठवां नवरात्र (श्रीदुर्गा अष्टमी) महागौरी स्वरूप की पूजा करें। 29 सितंबर शुक्रवार नौंवा नवरात्र महानवमी, 30 को सिद्घि दात्री स्वरूप की पूजा करें।
25 सितंबर सोमवार पांचवा नवरात्र स्कंदमाता की पूजा करें। 26 सितंबर मंगलवार छठा नवरात्र कात्यायनी देवी की पूजा करें। 27 सितंबर बुधवार सातवां नवरात्र कालरात्रि की पूजा करें। 28 सितंबर गुरुवार आठवां नवरात्र (श्रीदुर्गा अष्टमी) महागौरी स्वरूप की पूजा करें। 29 सितंबर शुक्रवार नौंवा नवरात्र महानवमी, 30 को सिद्घि दात्री स्वरूप की पूजा करें।
ऐसे करें घट स्थापना
navratra
आचार्य डा. हरिगोपाल शास्त्री (भागवत किंकर) के मुताबिक 21 सितंबर को घट स्थापना और माता की चौकी की स्थापना की जाएगी। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.30 से 8.00 बजे तक रहेगा। आचार्य हरिकृष्ण पाराशर के मुताबिक घट स्थापना सुबह 6 बजे से 7.30 बजे तक हो सकेगी।
ऐसे सजाएं मां की चौकी
आचार्य हरिकृष्ण पाराशर के मुताबिक माता की चौकी सजाने का कुछ विधान बताए गए हैं, जिन्हें आमजन आसानी से पूरा कर सकते हैं। आचार्यों के मुताबिक एक चौकी पर पवित्र लाल कपड़ा बिछाकर अष्टदल कमल बनाएं। प्रथम दिन मिट्टी में गेहूं या जौ बोएं।
जौ बोए जाएं तो बेहतर होगा। चौकी पर मां दुर्गा, गणेश और नवग्रहों की स्थापना करें। देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन करें। यदि नवरात्र का व्रत रखना चाहते हैं तो संकल्प करें और मां से व्रत पूरे होने का आशीर्वाद मांगे। नवरात्र में दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ करें।
जौ बोए जाएं तो बेहतर होगा। चौकी पर मां दुर्गा, गणेश और नवग्रहों की स्थापना करें। देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन करें। यदि नवरात्र का व्रत रखना चाहते हैं तो संकल्प करें और मां से व्रत पूरे होने का आशीर्वाद मांगे। नवरात्र में दुर्गा चालीसा और सप्तशती का पाठ करें।