Agra: खुले में सीवर बहाने पर नालंदा बिल्डर पर दो करोड़ का जुर्माना, STP न बनाने पर लगी पर्यावरण क्षतिपूर्ति
आगरा स्थित नालंदा टाउन कॉलोनी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण न कराकर सीवर को सीधे मैदान में फेंकने के मामले में बिल्डर पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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आगरा में नालंदा टाउन का सीवर खुले मैदान में छोड़ने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आगरा विकास प्राधिकरण पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। अब उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने खुले मैदान में ही सीवर डाल देने से पर्यावरण को हुए नुकसान पर नालंदा टाउन पर 2.13 करोड़ रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति यानि जुर्माना लगाया है। बिल्डर से एक सप्ताह के अंदर जुर्माना जमा करने के लिए कहा गया है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शमसाबाद रोड पर बनाई गई नालंदा टाउन कॉलोनी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण न करने पर सीवर को सीधे मैदान में फेंकने के मामले में डायरेक्टर राधेश्याम शर्मा पुत्र रामआसरे शर्मा को जुर्माना जमा करने का नोटिस भेजा है। उन्हें पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 2,13,98,438 रुपये यूनियन बैंक ऑफ इंडिया गोमती नगर लखनऊ शाखा में जमा करने को कहा गया है। उन्हें दो बार पहले भी नोटिस भेजे गए थे, पर जुर्माना जमा न होने पर अब आखिरी नोटिस भेजा गया है और उसी के साथ प्रशासन को आरसी जारी करने के लिए बोर्ड ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एडीए पर भी लग चुका है दो करोड़ का जुर्माना
शमसाबाद रोड स्थित नालंदा टाउन में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट न होने के मामले में निवासी देवांशु बोस ने एनजीटी में पर्यावरण क्षति को लेकर याचिका दायर की थी। इसकी सुनवाई के बाद एनजीटी ने एडीए पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, इसके बाद भी सीवर का निस्तारण सही तरह से कराने में एडीए सफल नहीं हुआ।
18 जनवरी को एनजीटी के चेयरमैन आदर्श कुमार गोयल, जस्टिस सुधीर कुमार और विशेषज्ञ सदस्य सैंथिल वेल की पीठ में सुनवाई के बाद एडीए को लापरवाही बरतने पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना और वसूलने के आदेश दिए हैं। नालंदा टाउन की तरह 62 कॉलोनियां यहां ऐसी हैं, जहां सीवर ट्रीटीमेंट प्लांट नहीं है। इसमें बरौली अहीर की 42 और रजरई की 20 कालोनियां हैं।
एसटीपी न बनाने वाली कॉलोनियां निशाने पर
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि नालंदा टाउन की तरह कई कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है, जो एसटीपी बनाने की जगह अपना सीवर खुले मैदान या नाले में डाल रहे हैं। उन सभी को नोटिस भेजकर पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के इस मामले में स्पष्ट आदेश हैं। उनका पालन कराया जाएगा।