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आगरा की मुस्लिम महिलाएं बोलीं- बुर्का संस्कृति का हिस्सा, इसे सियासत में न घसीटें
Tue, 07 May 2019 02:04 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 07 May 2019 02:04 PM IST
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मुस्लिम महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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बुर्के पर प्रतिबंध लगाने को लेकर कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं की बयानबाजी को आगरा की मुस्लिम युवतियों और महिलाओं ने सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि यह पहनावा थोपा नहीं गया है। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। अपनी सुविधा के मुताबिक इसे पहनती हैं। ज्यादातर लड़कियां शादी के बाद बुर्का पहनती हैं।
नई आबादी के पक्की सराय की रहने वाली अशरफ कहती हैं कि बुर्के में हम अपने आपको बुरी नजर और बुरी नीयत से महफूज करते हैं। बुर्का एक मुकम्मल ड्रेस है। इसमें किसी तरह का दिखावा और फैशन नहीं है। इसे पहनने को लेकर परिवार का भी कोई दबाव नहीं होता है। ज्यादातर बुर्का लड़कियां शादी के बाद पहनती हैं। यह उनकी मर्जी पर निर्भर होता है।
शहीद नगर की सोनी कुरैशी कहती हैं कि हिजाब या बुर्का पहनना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इसे पहनने पर रोक लगाने की बात कहना है, भेदभाव को बढ़ाने वाली बात है। क्या घूंघट पर बैन लगेगा। सलीकेदार पहनावा है बुर्का और ज्यादातर स्टूडेंट लाइफ में तो इसे नहीं पहनती हैं।
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नई आबादी के पक्की सराय की रहने वाली अशरफ कहती हैं कि बुर्के में हम अपने आपको बुरी नजर और बुरी नीयत से महफूज करते हैं। बुर्का एक मुकम्मल ड्रेस है। इसमें किसी तरह का दिखावा और फैशन नहीं है। इसे पहनने को लेकर परिवार का भी कोई दबाव नहीं होता है। ज्यादातर बुर्का लड़कियां शादी के बाद पहनती हैं। यह उनकी मर्जी पर निर्भर होता है।
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शहीद नगर की सोनी कुरैशी कहती हैं कि हिजाब या बुर्का पहनना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इसे पहनने पर रोक लगाने की बात कहना है, भेदभाव को बढ़ाने वाली बात है। क्या घूंघट पर बैन लगेगा। सलीकेदार पहनावा है बुर्का और ज्यादातर स्टूडेंट लाइफ में तो इसे नहीं पहनती हैं।
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इस्लाम में कोई जोर जबरदस्ती नहीं
शाहगंज की फौजिया इमरान कहती हैं कि बुर्का हमारी पहचान है। जिसको हम अपने मजहब के तौर तरीके से अपनी मर्जी से पहनते हैं। इस्लाम में किसी भी काम करने के लिए कोई जोर जबर्दस्ती नहीं होती है। जिसे जैसी जिंदगी पसंद है, वो गुजार सकता है।
सगीर फातिमा गर्ल्स इंटर कालेज की शिक्षिका सायमा फातिमा कहती हैं कि मैंने बुर्का पहनकर अपनी पढ़ाई पूरी और आज सगीर फातिमा में शिक्षिका हूं। आज भी बुर्का पहनने में कोई दिक्कत नहीं होती है। जिन लोगों को हमारे बुर्के से दिक्कत हैं, उन्हें अपनी मानसिकता का इलाज कराना चाहिए।
सगीर फातिमा गर्ल्स इंटर कालेज की शिक्षिका सायमा फातिमा कहती हैं कि मैंने बुर्का पहनकर अपनी पढ़ाई पूरी और आज सगीर फातिमा में शिक्षिका हूं। आज भी बुर्का पहनने में कोई दिक्कत नहीं होती है। जिन लोगों को हमारे बुर्के से दिक्कत हैं, उन्हें अपनी मानसिकता का इलाज कराना चाहिए।