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Janmashtami 2024: ठाकुरजी को सजाने संवारने की तैयारी में जुटे ‘अल्लाह के बंदे’, दिन-रात कर रहे हैं मेहनत
Sun, 25 Aug 2024 12:24 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमित मुदगल, मथुरा
अमित मुदगल, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sun, 25 Aug 2024 12:24 PM IST
सार
मथुरा में कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। धर्मनगरी मथुरा भक्ति के साथ सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश भी दे रही है। यहां अल्लाह के बंदे (मुस्लिम समाज के लोग) भी श्रद्धा के साथ जन्माष्टमी के दिन ठाकुरजी के शृंगार में पहनाई जाने वाली पोशाक के निर्माण में जुटे हैं।
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ठाकुरजी को सजाने संवारने की तैयारी में जुटे ‘अल्लाह के बंदे’
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां पूरे उल्लास से चल रही हैं। 26 अगस्त सोमवार को जन्माष्टमी है। इस मौके पर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों को सजाने संवारने, उनकी पोशाक, उनके आभूषण आदि तैयार करने के लिए मथुरा में तेजी से काम चल रहा है। विशेष बात यह है कि यहां सांवरे सलोने गिरधारी के आभूषण अधिकांश मुस्लिम समाज के लोग तैयार करते हैं।
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मथुरा की गलियों में इस समय आभूषण बनाने, पोशाक आदि का काम बहुत जोरों से चल रहा है। वैसे तो यह कार्य यहां साल भर चलता है, लेकिन जन्माष्टमी से दो माह पूर्व यह काम तेजी से शुरू होता है। यह आखरी महीना तो बहुत ही चुनौती भरा है। कोलकाता, मुंबई सूरत आदि में भी जो पोशाक तैयार होती हैं उनके लिए मुकुट माला और अन्य आभूषण मथुरा में ही तैयार होते हैं। न केवल मथुरा में बल्कि अन्य जगहों पर भी इनकी आपूर्ति की जाती है।
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आभूषण तैयार कर रहे पप्पू, यामीन, इमरान, इकराम आदि बताते हैं कि इस समय दिन रात काम चल रहा है। उनका यह भी कहना है कि यहां हिंदू मुस्लिम की बात नहीं है। मथुरा में सब एक जैसे हैं और मुसलमानों को इस बात से बड़ी खुशी मिलती है कि वह भगवान कृष्ण की पोशाक के तैयार कर रहे हैं।
उनका भी यही भक्ति भाव है और इस कार्य को करते-करते वह भी अक्सर राधे-राधे बोलते हैं। भगवान कृष्ण के साथ ही राधा रानी के आभूषण उनके वस्त्र भी यही तैयार हो रहे हैं । मथुरा की गली-गली में इस समय यह काम तेजी से चल रहा है और चुनौती बस एक ही है कि जन्माष्टमी से पहले ही उसकी पूर्व संध्या पर सारे आभूषण तैयार होकर मंदिरों में और बाजार में पहुंच जाएं। पूरे मथुरा की बात करें तो सालाना यह 100 करोड़ से ऊपर का कारोबार है जिसमें यहां के लोग बड़ी शिद्दत से जुड़े हैं यह न केवल उनकी आय का साधन है बल्कि आपसी सौहार्द का भी प्रतीक बना है।