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आगरा: बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या का मामला: कोर्ट ने दुष्कर्म के दोषी को मृत्युदंड देने की वजह बताई
Wed, 24 Feb 2021 11:47 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 24 Feb 2021 11:47 AM IST
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दुष्कर्म के आरोपी को ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या कर दिए जाने के जघन्य मामले में सजा-ए-मौत न दिए जाने की वजह स्पेशल जज (पॉक्सो एक्ट) वीके जायसवाल ने फैसले में बताई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए उन्होंने लिखा है कि दुष्कर्म के दोषी को मृत्युदंड केवल उन मामलों में देना चाहिए जब कोई दूसरा विकल्प मौजूद न हो। मृत्युदंड का निर्धारण करते समय वारदात में की गई क्रूरता को ध्यान में रखना चाहिए।
विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि फैसले में ऐसी कई उदाहरण दिए गए हैं जिनमें इस तरह के मामलों में मृत्युदंड नहीं दिया गया। एक मामला राजकुमार बनाम स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश का है। इसमें 14 साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या में 35 वर्ष के
कारावास से दंडित किया।
आगरा: दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा
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एक और केस टट्टू लोधी बनाम स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश में उम्र कैद की सजा दी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे सही माना। इस केस में सात साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी। एक अन्य मामला सचिन कुमार बनाम स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश में पांच साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी को मृत्युदंड दिया गया। दोषी के अपील करने पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे 25 साल कैद की सजा में बदल दिया था।
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विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि फैसले में ऐसी कई उदाहरण दिए गए हैं जिनमें इस तरह के मामलों में मृत्युदंड नहीं दिया गया। एक मामला राजकुमार बनाम स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश का है। इसमें 14 साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या में 35 वर्ष के
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कारावास से दंडित किया।
आगरा: दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा
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एक और केस टट्टू लोधी बनाम स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश में उम्र कैद की सजा दी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे सही माना। इस केस में सात साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी। एक अन्य मामला सचिन कुमार बनाम स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश में पांच साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी को मृत्युदंड दिया गया। दोषी के अपील करने पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे 25 साल कैद की सजा में बदल दिया था।
एक गुनाह में दस साल दूसरे में सात साल कारावास, चार गुनाहों में उम्रकैद
कोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के दोषी को चार गुनाहों में उम्रकैद की सजा सुनाई है। दो अन्य में सात और दस साल कारावास की सजा सुनाई है। सजाएं एक साथ चलेंगी। अर्थदंड न चुकाने पर कारावास की सजा बढ़ जाएगी।
- हत्या में उम्रकैद और 50 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड जमा न करने पर कारावास की सजा एक साल बढ़ जाएगी।
- दुष्कर्म में उम्रकैद और 50 हजार के अर्थदंड की सजा है। अर्थदंड जमा न करने पर एक साल और जेल में रहना होगा।
- पॉक्सो एक्ट में उम्रकैद और 50 हजार का अर्थदंड है। अर्थदंड न देने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतेगा।
- एसएसी-एसटी एक्ट में उम्रकैद और 50 हजार का अर्थदंड है। अर्थदंड न देने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
- अपहरण में दस साल की कैद और 30 हजार के अर्थदंड की सजा है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतेगा।
- साक्ष्य मिटाने में सात साल कैद और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा है। अर्थदंड न देने पर चार माह का अतिरिक्त कारावास होगा।
कोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के दोषी को चार गुनाहों में उम्रकैद की सजा सुनाई है। दो अन्य में सात और दस साल कारावास की सजा सुनाई है। सजाएं एक साथ चलेंगी। अर्थदंड न चुकाने पर कारावास की सजा बढ़ जाएगी।
- हत्या में उम्रकैद और 50 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड जमा न करने पर कारावास की सजा एक साल बढ़ जाएगी।
- दुष्कर्म में उम्रकैद और 50 हजार के अर्थदंड की सजा है। अर्थदंड जमा न करने पर एक साल और जेल में रहना होगा।
- पॉक्सो एक्ट में उम्रकैद और 50 हजार का अर्थदंड है। अर्थदंड न देने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतेगा।
- एसएसी-एसटी एक्ट में उम्रकैद और 50 हजार का अर्थदंड है। अर्थदंड न देने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
- अपहरण में दस साल की कैद और 30 हजार के अर्थदंड की सजा है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतेगा।
- साक्ष्य मिटाने में सात साल कैद और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा है। अर्थदंड न देने पर चार माह का अतिरिक्त कारावास होगा।
दरिंदे के परिजनों ने किया किनारा
दरिंदे के परिजनों ने उससे किनारा कर लिया। सजा सुनाए जाते समय कोई भी कोर्ट में नहीं आया। उसे जब पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तब भी कोई नहीं आया था।
बच्ची के गिड़गिड़ाने पर भी नहीं पसीजा था दरिंदा
बच्ची को अगवा कर ले जाने के बाद जब उसके साथ दुष्कर्म किया गया तो वह चीखने लगी थी। इस पर दरिंदे ने उसका मुंह हाथ से बंद कर दिया था। इसके बाद बच्ची उसके सामने गिड़गिड़ाई थी कि उसे जान से न मारे। इस केस की विवेचना करने वाले इंस्पेक्टर महेश गौतम ने बताया कि उन्होंने जब आरोपी ठाकुर से पूछताछ की तो उसने बताया था कि बच्ची ने उसके सामने हाथ जोड़कर भी कहा था कि वह उसकी जान न ले। वह उसे अंकल कह रही थी। उसने उसे इसलिए मारा क्योंकि अगर छोड़ देता तो वह पकड़ा जाता।
सजा के लिए दलील, जघन्य अपराध किया है, कड़ी सजा मिले
विशेष लोक अभियोजक विमलेश आनंद ने कहा कि घटना के समय बच्ची की आयु सिर्फ आठ वर्ष थी। अभियुक्त ने उसके साथ जघन्य किस्म का अपराध किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
पहला अपराध है, इसलिए न्यूनतम सजा दी जाए
बचाव पक्ष के अधिवक्ता एनपी नोहवार ने कहा कि अभियुक्त का यह प्रथम अपराध है, वह परिवार की देखभाल करने वाला अकेला व्यक्ति है और युवा है। उसे न्यूनतम दंड दिया जाए।
दरिंदे के परिजनों ने उससे किनारा कर लिया। सजा सुनाए जाते समय कोई भी कोर्ट में नहीं आया। उसे जब पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तब भी कोई नहीं आया था।
बच्ची के गिड़गिड़ाने पर भी नहीं पसीजा था दरिंदा
बच्ची को अगवा कर ले जाने के बाद जब उसके साथ दुष्कर्म किया गया तो वह चीखने लगी थी। इस पर दरिंदे ने उसका मुंह हाथ से बंद कर दिया था। इसके बाद बच्ची उसके सामने गिड़गिड़ाई थी कि उसे जान से न मारे। इस केस की विवेचना करने वाले इंस्पेक्टर महेश गौतम ने बताया कि उन्होंने जब आरोपी ठाकुर से पूछताछ की तो उसने बताया था कि बच्ची ने उसके सामने हाथ जोड़कर भी कहा था कि वह उसकी जान न ले। वह उसे अंकल कह रही थी। उसने उसे इसलिए मारा क्योंकि अगर छोड़ देता तो वह पकड़ा जाता।
सजा के लिए दलील, जघन्य अपराध किया है, कड़ी सजा मिले
विशेष लोक अभियोजक विमलेश आनंद ने कहा कि घटना के समय बच्ची की आयु सिर्फ आठ वर्ष थी। अभियुक्त ने उसके साथ जघन्य किस्म का अपराध किया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
पहला अपराध है, इसलिए न्यूनतम सजा दी जाए
बचाव पक्ष के अधिवक्ता एनपी नोहवार ने कहा कि अभियुक्त का यह प्रथम अपराध है, वह परिवार की देखभाल करने वाला अकेला व्यक्ति है और युवा है। उसे न्यूनतम दंड दिया जाए।