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आगरा: दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा, कैमरे से मिला था दरिंदे की करतूत का सुबूत

Wed, 24 Feb 2021 08:16 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 24 Feb 2021 08:16 AM IST
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Convicted For Life Sentence In Case Of Murder And Sexual Assault With Girl Child
बच्ची का दुष्कर्म और हत्या करने का आरोपी युवक - फोटो : अमर उजाला
तीन साल पहले आगरा कॉलेज के क्रिकेट मैदान में आठ साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दिए जाने के सनसनीखेज मामले में दोषी पाए गए युवक  हरीश उर्फ ठाकुर को मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। आगरा कॉलेज में ही एलएलबी प्रथम वर्ष का छात्र रहा ठाकुर सेंट जोंस चौराहे के पास फुटपाथ पर सो रही बच्ची को उसकी दादी के पास से उठाकर ले गया था। इसी दौरान का सीसीटीवी फुटेज उसके खिलाफ अहम सुबूत बना। 
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स्पेशल जज ( पॉक्सो एक्ट ) वीके जायसवाल ने सजा सुनाई। वारदात 16 मार्च 2018 की रात में हुई थी। विशेष लोक अभियोजक विमलेश आनंद ने बताया कि बाग मुजफ्फर खां निवासी ठाकुर के खिलाफ 11 गवाह और 26 सुबूत पेश किए गए। रिपोर्ट बच्ची के पिता ने दर्ज कराई थी। वह मूल रूप से मथुरा के दाऊजी केपास के गांव का निवासी है और काफी समय से आगरा में सेंट जोंस चौराहा के पास फुटपाथ पर जूता पॉलिश का काम करता है। इसी के पास ठाकुर का सैलून था। वारदात के समय वह शराब के नशे में था।
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बच्ची के माता-पिता को मिलेंगे दो लाख

दोषी को दी गई सजा में 2.55 लाख रुपये का अर्थदंड भी है। इसके जमा होने पर इसमें से दो लाख रुपये बच्ची के माता-पिता को दिए जाएंगे। अगर दोषी अर्थदंड जमा नहीं करता है तो उसकी कैद की सजा बढ़ जाएगी।
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कैमरे से मिला था दरिंदे की करतूत का सबसे अहम सुबूत
बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में 11 गवाह और 22 साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए। इनमें सबसे अहम साक्ष्य सीसीटीवी फुटेज रहे। इससे ही घटना का खुलासा हुआ था। पुलिस के पास उस समय कोई और सुराग नहीं था। इस घटना की विवेचना हरीपर्वत थाना के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक महेश चंद गौतम ने की थी। वह इस समय एंटी करप्शन ब्यूरो में आगरा में ही तैनात हैं। उन्होंने बताया कि  पुलिस बूथ के पास एक खंभे पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से ही पता चला था कि बच्ची को फुटपाथ से कोई उठाकर ले गया। दो फुटेज मिले थे। एक बच्ची को लेने जाते हुए समय का था।

आरोपी हरीश उर्फ ठाकुर का सैलून सेंट जोंस चौराहे के पास ही था। जब फुटेज लोगों को दिखाए गए, तो वे उसे पहचान गए। इसके बाद उसके मोबाइल की लोकेशन देखी गई तो यह भी सेंट जोंस चौराहे के पास की आई। यहीं पर फुटपाथ पर बच्ची का परिवार रहता है। बच्ची को दादी के पास से उठाया गया था।

इस मामले में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता रमाशंकर सिंह राजपूत और एसएस चौहान ने निशुल्क पैरवी की। चौहान ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज ही अहम सुबूत रहे। इसके अलावा बच्ची के कपड़ों की फोरेंसिक जांच, आरोपी की मोबाइल लोकेशन भी साक्ष्य के रूप में पेश की गई थी।

शोर मचाने पर की थी हत्या
महेश चंद गौतम ने बताया कि उन्होंने आरोपी से पूछताछ की थी। इसमें उसने बताया था कि बच्ची जब शोर मचाने लगी तो उसका गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। उसे डर था कि अगर वह उसे नहीं मारता तो वह परिजनों को सब बता देती और वह पकड़ा जाता।

सात दिन तक कैंडल मार्च निकले थे
घटना के बाद शहर में आक्रोश था। सात दिन तक कैंडल मार्च निकले थे। हत्यारोपी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग को लेकर कई प्रदर्शन भी हुए थे।

सजा दिलाने के लिए चिह्नित किया था केस
एसएसपी बबलू कुमार ने ऐसे 20 से अधिक केस चिह्नित किए थे जिनमें बच्चियों के साथ दरिंदगी हुई। इनमें यह मामला भी था। ये केस कोर्ट में पैरवी करके आरोपियों को सजा दिलाने के लिए चिह्नित किए गए थे।
 
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