{"_id":"6343f59f3fd063498241cbd3","slug":"mulayam-singh-yadav-rewarded-the-one-who-was-kind-in-politics","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mulayam Death: 'मुलायम' दिल ने संवारे बहुतों के किरदार, नए चेहरों पर लगाए दांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mulayam Death: 'मुलायम' दिल ने संवारे बहुतों के किरदार, नए चेहरों पर लगाए दांव
Mon, 10 Oct 2022 04:06 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 10 Oct 2022 04:06 PM IST
सार
सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रोफेसर केसी यादव बताते हैं कि नेताजी जिस पर मेहरबान हुए उसको इनाम जरूर दिया। यही वजह है कि नेताजी से जुड़ने वाले लोग अंतिम समय तक उनके साथ रहे।
विज्ञापन
मुलायम सिंह यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की रहमदिली किसी ने छिपी नहीं रही। जिले की राजनीति में जिस पर मेहरबान हुए उसको इनाम दिया। नए चेहरों पर हमेशा दांव लगाया। चुनाव जिताकर उनको सम्मान भी दिलाया। जब भी मैनपुरी आए तो उनका हालचाल लेना कभी नहीं भूले।
विज्ञापन
विज्ञापन
बदल दी परिवार की किस्मत
कांग्रेस शासन के बाद जिले की राजनीति में भी बदलाव आया। जागीर के रहने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष रहे कांग्रेस सूरज यादव के परिवार ने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में आस्था जताई तो उस परिवार को नेताजी ने इनाम भी दिया। सूरज यादव की पुत्रवधू सुमन यादव को दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया। सूरज यादव के पुत्र अवधेश यादव को एमएलसी बनाया। सुमन यादव के पति अशोक यादव को ब्लॉक प्रमुख जागीर तक बनवाया। जब भी नेताजी मैनपुरी आए तो सूरज यादव से राजनीतिक चर्चा किए बगैर नहीं लौटे।
विज्ञापन
नए चेहरों पर लगाया दांव
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने हमेशा नए चेहरों पर दांव लगाया। टिकट देने के बाद उनको जिताकर राजनीतिक क्षेत्र में सम्मान भी दिलाया। किशनी विधानसभा क्षेत्र में रामेश्वर दयाल वाल्मीकि, संध्या कठेरिया, ब्रजेश कठेरिया जैसे नए चेहरों को पहचान देकर विधानसभा पहुंचाया। मैनपुरी विधानसभा क्षेत्र से मानिकचंद्र यादव और राजू यादव जैसे नए चेहरों पर दांव लगाकर उनको पहचान दिलाई। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रोफेसर केसी यादव बताते हैं कि नेताजी जिस पर मेहरबान हुए उसको इनाम जरूर दिया। यही वजह है कि नेताजी से जुड़ने वाले लोग अंतिम समय तक उनके साथ रहे। सपा की राजनीति में नेताजी की भरपाई हो पाना बहुत मुश्किल है।
विज्ञापन