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गंगा के पवित्र जल से प्रभावित थे बादशाह अकबर, प्रतिदिन सोरों से पीने के लिए मंगाते थे गंगाजल
Fri, 11 Sep 2020 01:41 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 11 Sep 2020 01:41 PM IST
सार
गंगा के पवित्र जल का अकबर पर बेहद प्रभाव था। गंगा जल की मान्यता थी कि इसका सेवन करने से चर्म रोग दूर होते हैं और शारीरिक विकार भी दूर होते हैं। इसी प्रभाव के चलते बड़े-बड़े कलशों में प्रतिदिन गंगाजल जाता था। इसके लिए सोरों में एक अलग से
चौकी स्थापित की गई थी।
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soron railway station
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विस्तार
गंगातीर्थ सोरों सदियों से श्रद्धा का केंद्र रहा है। सोरों और गंगा के प्रति हर समुदाय के लोगों की अगाध श्रद्धा रही है। मुगलशासक अकबर जब फतेहपुर सीकरी में शासन करते थे तब सन 1582-83 में लगातार सोरों से उनके लिए गंगाजल जाता था। बताते हैं जब वह दिल्ली से शासन करते थे तब हरिद्वार से गंगाजल उनके लिए जाता था।
गंगा के पवित्र जल का अकबर पर बेहद प्रभाव था। गंगा जल की मान्यता थी कि इसका सेवन करने से चर्म रोग दूर होते हैं और शारीरिक विकार भी दूर होते हैं। इसी प्रभाव के चलते बड़े-बड़े कलशों में प्रतिदिन गंगाजल जाता था।
ये भी पढ़ें- पितृपक्ष: सोरों में मुगलों-अंग्रेजों ने भी तीर्थनगरी में किए थे श्राद्धकर्म, पोथियों में दर्ज हैं साक्ष्य
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इसके लिए सोरों में एक अलग से चौकी स्थापित की गई थी। आइने अकबरी में यह वर्णन मिलता है। सोरों के बारे में अकबर के प्रमुख दरबारी, नवरत्न, अबुल फजल ने आइने अकबरी में भगवान श्रीवाराह के द्वारा दैत्यराज हिरण्याक्ष के वध को प्रसंग भी वर्णित किया है।
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गंगा के पवित्र जल का अकबर पर बेहद प्रभाव था। गंगा जल की मान्यता थी कि इसका सेवन करने से चर्म रोग दूर होते हैं और शारीरिक विकार भी दूर होते हैं। इसी प्रभाव के चलते बड़े-बड़े कलशों में प्रतिदिन गंगाजल जाता था।
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इसके लिए सोरों में एक अलग से चौकी स्थापित की गई थी। आइने अकबरी में यह वर्णन मिलता है। सोरों के बारे में अकबर के प्रमुख दरबारी, नवरत्न, अबुल फजल ने आइने अकबरी में भगवान श्रीवाराह के द्वारा दैत्यराज हिरण्याक्ष के वध को प्रसंग भी वर्णित किया है।
पंडित सुनील तिवारी, प्रद्युन्र निर्भय, पुरोहित
- फोटो : अमर उजाला
क्या कहते हैं पुरोहित
तीर्थनगरी में गंगा का जल इतना पवित्र और मीठा होता था कि अकबर यह जल सोरों गंगाघाट से प्रतिदिन मंगाकर पीते थे। आइने अकबरी में यह वर्णन मिलता है। उनके विश्वासपात्र सेवत गंगाजल को यहां से लेकर जाते थे। अकबर ने जब तक फतेहपुर सीकरी में शासन किया तब तक सोरों से गंगाजल मंगवाकर पिया। - पंडित सुनील तिवारी।
वराहपुराण में सोरों का महत्व वर्णित है। सोरों तीर्थ में एक प्रहर जप तप करने से शुभफल प्राप्त होता है जो सैकड़ों वर्ष तप करने के बाद मिलता है। तीर्थनगरी का इतिहास सदियों पुराना है।
अकबर तो गंगाजल मंगवाकर पीते ही थे। वहीं ऐसे तमाम राजा महाराजा सोरों तीर्थनगरी में जीवन को सफल बनाने के लिए यात्रा करते थे। सोरों का इतिहास ऐसे तमाम वर्णनों से भरा है।- प्रद्युन्र निर्भय।
तीर्थनगरी में गंगा का जल इतना पवित्र और मीठा होता था कि अकबर यह जल सोरों गंगाघाट से प्रतिदिन मंगाकर पीते थे। आइने अकबरी में यह वर्णन मिलता है। उनके विश्वासपात्र सेवत गंगाजल को यहां से लेकर जाते थे। अकबर ने जब तक फतेहपुर सीकरी में शासन किया तब तक सोरों से गंगाजल मंगवाकर पिया। - पंडित सुनील तिवारी।
वराहपुराण में सोरों का महत्व वर्णित है। सोरों तीर्थ में एक प्रहर जप तप करने से शुभफल प्राप्त होता है जो सैकड़ों वर्ष तप करने के बाद मिलता है। तीर्थनगरी का इतिहास सदियों पुराना है।
अकबर तो गंगाजल मंगवाकर पीते ही थे। वहीं ऐसे तमाम राजा महाराजा सोरों तीर्थनगरी में जीवन को सफल बनाने के लिए यात्रा करते थे। सोरों का इतिहास ऐसे तमाम वर्णनों से भरा है।- प्रद्युन्र निर्भय।