{"_id":"ffcb85bd9a328ab83a77510a72515908","slug":"muaavja-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुआवजे का हिसाब देने को खंगाली फाइलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुआवजे का हिसाब देने को खंगाली फाइलें
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 24 Dec 2015 02:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के लिए जमीन अधिग्रहण में बांटे गए मुआवजे में गोलमाल के खुलासे पर भूमि अध्याप्ति कार्यालय में हड़कंप मच गया है। बुधवार को छुट्टी के होने बावजूद कलेक्ट्रेट स्थित भूमि अध्याप्ति कार्यालय खुला और हिसाब देने के लिए कर्मचारियों ने फाइलों को खंगाला।
बता दें, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलमेंट अथारिटी (यूपीडा) की आडिट टीम ने मुआवजा वितरण के हिसाब में तमाम गड़बड़ी पकड़ी हैं। भूमि अध्याप्ति कार्यालय के अधिकारी करीब 3,49,92,78,000 रुपये के व्यय का पूरा हिसाब नहीं दे पा रहे हैं। यूपीडा की आडिट टीम ने इसे वित्तीय अनियमितता करार दिया है। इसके साथ किसानों के बैनामों में स्टांप शुल्क के भुगतान में भी करोड़ों रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई है। अमर उजाला ने बुधवार के अंक में इस गोलमाल का खुलासा किया तो भू अध्याप्ति कार्यालय में हड़कंप मच गया। जिन फाइलों को कर्मचारी पोटली में बांधकर भूल चुके हैं बुधवार को चौधरी चरण सिंह जयंती पर छुट्टी होने के बावजूद कार्यालय खोलकर उन्हें खंगाला गया। बैंक खातों के रिकार्ड, पासबुक, भुगतान के कागज देखे गए। दरअसल, तीन सप्ताह के अंदर आपत्तियों के निस्तारण के लिए साक्ष्य आडिट टीम के समक्ष प्रस्तुत करने हैं।
इनबाक्स...
खेल खुला तो अब खरीद लिया कंप्यूटर
कर्मचारियों से जब कुछ पूछताछ करने की कोशिश की गई तो उन्होंने यह कह दिया कि हिसाब में कोई गड़बड़ी नहीं है। किसानों को पैसा आरटीजीएस के जरिये ट्रांसफर हुआ है। जब कंप्यूटर और स्टेशनरी के संबंध में सवाल किया तो एक कर्मचारी ताव में आ गया बोला ‘कौन कह रहा है कि कंप्यूटर और स्टेशनरी नहीं खरीदी? हमने यह कंप्यूटर तो अभी आठ दिन पहले ही खरीदा है.... अभी तो इसका बिल भी नहीं बना है’ यहां उल्लेखनीय है कि आडिट टीम ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि भूमि अध्याप्ति कार्यालय को कंप्यूटर और स्टेशनरी खरीद को 75 हजार रुपये दिए गए थे, लेकिन कंप्यूटर और स्टेशनरी खरीद का कोई रिकार्ड नहीं दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि जो कंप्यूटर अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान उन्हीं दिनों खरीदना चाहिए था। वह एक सप्ताह पहले क्यों खरीदा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलमेंट अथारिटी (यूपीडा) की आडिट टीम ने मुआवजा वितरण के हिसाब में तमाम गड़बड़ी पकड़ी हैं। भूमि अध्याप्ति कार्यालय के अधिकारी करीब 3,49,92,78,000 रुपये के व्यय का पूरा हिसाब नहीं दे पा रहे हैं। यूपीडा की आडिट टीम ने इसे वित्तीय अनियमितता करार दिया है। इसके साथ किसानों के बैनामों में स्टांप शुल्क के भुगतान में भी करोड़ों रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई है। अमर उजाला ने बुधवार के अंक में इस गोलमाल का खुलासा किया तो भू अध्याप्ति कार्यालय में हड़कंप मच गया। जिन फाइलों को कर्मचारी पोटली में बांधकर भूल चुके हैं बुधवार को चौधरी चरण सिंह जयंती पर छुट्टी होने के बावजूद कार्यालय खोलकर उन्हें खंगाला गया। बैंक खातों के रिकार्ड, पासबुक, भुगतान के कागज देखे गए। दरअसल, तीन सप्ताह के अंदर आपत्तियों के निस्तारण के लिए साक्ष्य आडिट टीम के समक्ष प्रस्तुत करने हैं।
विज्ञापन
इनबाक्स...
खेल खुला तो अब खरीद लिया कंप्यूटर
कर्मचारियों से जब कुछ पूछताछ करने की कोशिश की गई तो उन्होंने यह कह दिया कि हिसाब में कोई गड़बड़ी नहीं है। किसानों को पैसा आरटीजीएस के जरिये ट्रांसफर हुआ है। जब कंप्यूटर और स्टेशनरी के संबंध में सवाल किया तो एक कर्मचारी ताव में आ गया बोला ‘कौन कह रहा है कि कंप्यूटर और स्टेशनरी नहीं खरीदी? हमने यह कंप्यूटर तो अभी आठ दिन पहले ही खरीदा है.... अभी तो इसका बिल भी नहीं बना है’ यहां उल्लेखनीय है कि आडिट टीम ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि भूमि अध्याप्ति कार्यालय को कंप्यूटर और स्टेशनरी खरीद को 75 हजार रुपये दिए गए थे, लेकिन कंप्यूटर और स्टेशनरी खरीद का कोई रिकार्ड नहीं दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि जो कंप्यूटर अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान उन्हीं दिनों खरीदना चाहिए था। वह एक सप्ताह पहले क्यों खरीदा गया है।
विज्ञापन