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ज्ञान बांटने को निकली मां ऋ तु वसंत सी चले बयार
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मैनपुरी। शब्द साधना मंच के तत्वाधान में च्यवन ऋषि पब्लिक स्कूल, हसनपुर में शनिवार की रात वसंत पंचमी पर काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। राजकिशोर राज ने-घट घट में प्यार समाया है, ऊपर से कंचन काया है, कविता पढ़ी। डॉ. अरविंद कुमार पाल ने कहा-श्वेत वस्त्र की ओढ़ चुनरिया और हंस पर हुई सवार, ज्ञान बांटने को निकलीं मां, ऋतु वसंत सी चले बयार।
मां सरस्वती के चित्र पर अतिथियों ने माल्यार्पण कर गोष्ठी का शुभारंभ किया। मां सरस्वती की वंदना ओम प्रकाश वर्मा ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि आज निरालाजी का जन्म दिवस भी है। यश कुमार मिश्रा ने कहा- हुस्न खुद का ही आज कातिल है, ये न कहना नहीं मोहब्बत है। विजय राज योगी ने कहा- आज किसान दुखी हैं भाइया, डीजल-पेट्रोल के दाम से नेताओं के काम से। हरवीर सिंह यादव ने कहा मजदूर को नहीं है रोजी-रोटी, कृषकों का हाल बेहाल है, साड़ घूम रहे उसकी फसल में, यह कैसा अमृतकाल है।
रमेश चंद्र चक ने कहा- अति उत्सुक मिलन को गात रमेश अंगहि अंग अनंग समायो। ओम प्रकाश वर्मा ने-बहे वैरिन वसंती बयार, बनाये मोहिबा बटिया। संजय दुबे ने, न शर्माओ हमसे मिलाओ नयन, कही बीत जाए न ये शुभ लगन। विनोद माहेश्वरी ने-भाई-भाई का रिश्ता विपत्ती बांटने का था, आज संपत्ति बांटने का हो गया। उपेंद्र भोला ने-हालातों से बड़ा भिक्षक कभी देखा नही मैनें, यहां मां से बड़ा रक्षक कभी देखा नही मैनें सुनाया।
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काव्यगोष्ठी में अभय शर्मा, जयप्रकाश मिश्रा, जगदीशचंद्र त्रिपाठी, श्रीचंद्र वर्मा, ज्ञानेश्वर सक्सेना, डॉ. अनुराग दुबे, डॉ. संतोष दुबे, मुनींद्र चौहान, जयदेव जय, विनोद माहेश्वरी मौजूद रहे। अध्यक्षता कवि ओमप्रकाश वर्मा ने, मुख्य अतिथि कवि गिरीशचंद्र निराला और विशिष्ठ अतिथि कवि संजय दुबे रहे। संचालन उपेंद्र भोला ने और आभार मंत्री डॉ. अरविंद कुमार पाल ने व्यक्त किया।
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मां सरस्वती के चित्र पर अतिथियों ने माल्यार्पण कर गोष्ठी का शुभारंभ किया। मां सरस्वती की वंदना ओम प्रकाश वर्मा ने प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि आज निरालाजी का जन्म दिवस भी है। यश कुमार मिश्रा ने कहा- हुस्न खुद का ही आज कातिल है, ये न कहना नहीं मोहब्बत है। विजय राज योगी ने कहा- आज किसान दुखी हैं भाइया, डीजल-पेट्रोल के दाम से नेताओं के काम से। हरवीर सिंह यादव ने कहा मजदूर को नहीं है रोजी-रोटी, कृषकों का हाल बेहाल है, साड़ घूम रहे उसकी फसल में, यह कैसा अमृतकाल है।
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रमेश चंद्र चक ने कहा- अति उत्सुक मिलन को गात रमेश अंगहि अंग अनंग समायो। ओम प्रकाश वर्मा ने-बहे वैरिन वसंती बयार, बनाये मोहिबा बटिया। संजय दुबे ने, न शर्माओ हमसे मिलाओ नयन, कही बीत जाए न ये शुभ लगन। विनोद माहेश्वरी ने-भाई-भाई का रिश्ता विपत्ती बांटने का था, आज संपत्ति बांटने का हो गया। उपेंद्र भोला ने-हालातों से बड़ा भिक्षक कभी देखा नही मैनें, यहां मां से बड़ा रक्षक कभी देखा नही मैनें सुनाया।
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काव्यगोष्ठी में अभय शर्मा, जयप्रकाश मिश्रा, जगदीशचंद्र त्रिपाठी, श्रीचंद्र वर्मा, ज्ञानेश्वर सक्सेना, डॉ. अनुराग दुबे, डॉ. संतोष दुबे, मुनींद्र चौहान, जयदेव जय, विनोद माहेश्वरी मौजूद रहे। अध्यक्षता कवि ओमप्रकाश वर्मा ने, मुख्य अतिथि कवि गिरीशचंद्र निराला और विशिष्ठ अतिथि कवि संजय दुबे रहे। संचालन उपेंद्र भोला ने और आभार मंत्री डॉ. अरविंद कुमार पाल ने व्यक्त किया।