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पहल: कूड़े में मिश्रित मैटेरियल की होगी रिकवरी, फिर होगा निस्तारण
Tue, 05 Jan 2021 02:37 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 05 Jan 2021 02:37 PM IST
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कूड़ा प्लांट की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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कूड़ा प्रबंधन की एक नई पहल की गई है। कूड़े में मिश्रित विभिन्न मैटेरियल अब अलग हो सकेगा। उसके बाद ही कूड़े का निस्तारण होगा। इसके लिए जिलेभर के सभी निकायों में एमआरएफ( मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) केंद्र तैयार किए जा रहे हैं। अधिकांश निकायों ने जगह चिह्नित कर काम भी शुरू कर दिया है। धनराशि सभी निकायों को मिल चुकी है।
एमआरएफ सेंटर सभी निकायों में निर्धारित धनराशि से तैयार किए जा रहे हैं। कासगंज सहित कई निकायों में इसका काम शुरू कर दिया गया है। एमआरएफ सेंटरों में सूखा एवं गीला कूड़ा प्रबंधन के लिए अलग-अलग हॉल तैयार किए जा रहे हैं। इन सेंटरों में कमरे भी होंगे। तीन कमरों में एक स्टोर रूम, एक रैस्ट रूम और एक दफ्तर की व्यवस्था होगी। सेंटरों में श्रेडर मशीन और कंपोस्ट मशीन लगेंगी। मशीन से प्लास्टिक को काटकर उसकी पैकिंग की जाएगी तो गीले कूड़े को कंपोस्ट मशीन के जरिए खाद में तब्दील किया जाएगा। एमआरएफ सेंटरों में नगर निकायों द्वारा कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।
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यह है उद्देश्य
एमआरएफ सेंटर बनाने के पीछे उद्देश्य है कि कूड़े में मिश्रित जो प्लास्टिक, लोहा, सिल्वर आदि हैं उन्हें कूड़े से अलग निकाला जाएगा। उसके बाद ही कूड़े का निस्तारण हो सकेगा। इससे पर्यावरण में पॉलिथीन या अन्य घातक वस्तुओं का असर कम होगा।
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एमआरएफ सेंटर सभी निकायों में निर्धारित धनराशि से तैयार किए जा रहे हैं। कासगंज सहित कई निकायों में इसका काम शुरू कर दिया गया है। एमआरएफ सेंटरों में सूखा एवं गीला कूड़ा प्रबंधन के लिए अलग-अलग हॉल तैयार किए जा रहे हैं। इन सेंटरों में कमरे भी होंगे। तीन कमरों में एक स्टोर रूम, एक रैस्ट रूम और एक दफ्तर की व्यवस्था होगी। सेंटरों में श्रेडर मशीन और कंपोस्ट मशीन लगेंगी। मशीन से प्लास्टिक को काटकर उसकी पैकिंग की जाएगी तो गीले कूड़े को कंपोस्ट मशीन के जरिए खाद में तब्दील किया जाएगा। एमआरएफ सेंटरों में नगर निकायों द्वारा कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।
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यह है उद्देश्य
एमआरएफ सेंटर बनाने के पीछे उद्देश्य है कि कूड़े में मिश्रित जो प्लास्टिक, लोहा, सिल्वर आदि हैं उन्हें कूड़े से अलग निकाला जाएगा। उसके बाद ही कूड़े का निस्तारण हो सकेगा। इससे पर्यावरण में पॉलिथीन या अन्य घातक वस्तुओं का असर कम होगा।
आंकड़े की नजर से
- 3.55 करोड़ रुपये की लागत से जिलेभर में तैयार किए जा रहे एमआरएफ सेंटर।
- 10 निकाय हैं जिलेभर में।
- 35.50 लाख रुपये से प्रत्येक निकाय में तैयार हो रहे सेंटर।
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कासगंज में गांव हिम्मतपुरसई के समीप जगह चिह्नित कर ली गई है। फरवरी में हर हाल में सेंटर तैयार करने का लक्ष्य है। उसके बाद कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था बदलेगी। - लवकुश गुप्ता, ईओ।
- 3.55 करोड़ रुपये की लागत से जिलेभर में तैयार किए जा रहे एमआरएफ सेंटर।
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कासगंज में गांव हिम्मतपुरसई के समीप जगह चिह्नित कर ली गई है। फरवरी में हर हाल में सेंटर तैयार करने का लक्ष्य है। उसके बाद कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था बदलेगी। - लवकुश गुप्ता, ईओ।