{"_id":"5ff4291f6c81f149c607d767","slug":"dedicated-freight-corridor-with-advanced-technology-of-italy-and-spain-speed-up-of-goods-train","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी: इटली और स्पेन की तकनीक ने फ्रेट कॉरिडोर पर बढ़ाई मालगाड़ियों की रफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: इटली और स्पेन की तकनीक ने फ्रेट कॉरिडोर पर बढ़ाई मालगाड़ियों की रफ्तार
Tue, 05 Jan 2021 02:24 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 05 Jan 2021 02:24 PM IST
सार
- फ्रांस के बाद देश में पहली बार हो रहा इस्तेमाल
- न्यू टूंडला में लगे हैं इटली और स्पेन टेक्नोलॉजी के केंटीलीवर और केटनरी वायर
विज्ञापन
टूंडला में डेडीकेट फ्रेट कॉरिडोर लाइन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फ्रांस के बाद पहली बार टूंडला में इटली और स्पेन की एडवांस टेक्नोलॉजी से डेडीकेट फ्रेट कॉरिडोर पर ट्रेनें दोगुनी रफ्तार से दौड़ रहीं हैं। डीएफसीसी (डेडीकेट फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन पहली बार एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल देश के सबसे बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में किया है।
डीएफसीसीआईएल के अधिकारी दावा करते हैं कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में इटली और स्पेन की एडवांस टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है, जोकि देश में पहली बार आई है। इस एडवांस टेक्नोलॉजी के माध्यम से न्यू खुर्जा से न्यू भाऊपुर तक के 351 किलोमीटर के ट्रैक पर मालगाड़ियां दोगुनी रफ्तार से डबल लांग हॉल मालगाड़ियां 12 हजार हॉर्स पावर वाले इंजन से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हैं।
केटनरी वायर से संतुलित हो रहे वोल्टेज
डीएफसीसीआईएल के अधिकारी बताते हैं कि इस पूरे ट्रैक में बनाए गए डबल पोटल में स्पेन की टेक्नोलॉजी के आधार पर केटनरी वायर लगाया गया है। इस वायर के बीच में ड्रॉप वायर लगाया गया है, जोकि दोनों केटनरी वायर के बीच में वोल्टेज के संतुलन को बनाए रखता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डीएफसीसीआईएल के अधिकारी दावा करते हैं कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में इटली और स्पेन की एडवांस टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है, जोकि देश में पहली बार आई है। इस एडवांस टेक्नोलॉजी के माध्यम से न्यू खुर्जा से न्यू भाऊपुर तक के 351 किलोमीटर के ट्रैक पर मालगाड़ियां दोगुनी रफ्तार से डबल लांग हॉल मालगाड़ियां 12 हजार हॉर्स पावर वाले इंजन से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हैं।
विज्ञापन
केटनरी वायर से संतुलित हो रहे वोल्टेज
डीएफसीसीआईएल के अधिकारी बताते हैं कि इस पूरे ट्रैक में बनाए गए डबल पोटल में स्पेन की टेक्नोलॉजी के आधार पर केटनरी वायर लगाया गया है। इस वायर के बीच में ड्रॉप वायर लगाया गया है, जोकि दोनों केटनरी वायर के बीच में वोल्टेज के संतुलन को बनाए रखता है।
विज्ञापन
ये हैं इसकी खास बातें
1-डीएफसीसी के ट्रैक में इटली की टेक्नोलॉजी का है केंटीलीवर
2-रेलट्रैक के किनारे वोल्टेज को संतुलित करने के लिए लगाया है ट्रांसफार्मर
3- रेलट्रैक के ऊपर लगे हुए वायरों में 25 केवी का करंट प्रवाहित हो रहा है
4-दोगुनी क्षमता से दौड़ सकती हैं मालगाड़ियां
5-इंडियन रेलवे की टेक्नोलॉजी से कहीं अधिक एडवांस है टेक्नोलॉजी।
डीएफसीसी की इलेक्ट्रिकल टीम ने कॉरिडोर के निर्माण के दौरान कई खास बातों का ध्यान रखा है। इसकी मदद से मालगाड़ियां डबल लांग हॉल होने के बावजूद 100 किमी की स्पीड से दौड़ सकती हैं। एसएम श्रीवास्तव
ट्रैफिक मैनेजर-डीएफसीसी, नई दिल्ली
डीएफसीसी के प्रोजेक्ट में गुणवत्ता का खास ख्याल रखा गया है। इसमें इलेक्ट्रिकल टीम का भी विशेष योगदान है। इसकी मदद से मालगाड़ियां दोगुनी रफ्तार से दौड़ रही हैं। ये सभी मेक इन इंडिया है, लेकिन इसमें इटली और स्पेन की टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। वेद प्रकाश, पीआरओ-डीएफसीसी, नई दिल्ली
1-डीएफसीसी के ट्रैक में इटली की टेक्नोलॉजी का है केंटीलीवर
2-रेलट्रैक के किनारे वोल्टेज को संतुलित करने के लिए लगाया है ट्रांसफार्मर
3- रेलट्रैक के ऊपर लगे हुए वायरों में 25 केवी का करंट प्रवाहित हो रहा है
4-दोगुनी क्षमता से दौड़ सकती हैं मालगाड़ियां
5-इंडियन रेलवे की टेक्नोलॉजी से कहीं अधिक एडवांस है टेक्नोलॉजी।
डीएफसीसी की इलेक्ट्रिकल टीम ने कॉरिडोर के निर्माण के दौरान कई खास बातों का ध्यान रखा है। इसकी मदद से मालगाड़ियां डबल लांग हॉल होने के बावजूद 100 किमी की स्पीड से दौड़ सकती हैं। एसएम श्रीवास्तव
ट्रैफिक मैनेजर-डीएफसीसी, नई दिल्ली
डीएफसीसी के प्रोजेक्ट में गुणवत्ता का खास ख्याल रखा गया है। इसमें इलेक्ट्रिकल टीम का भी विशेष योगदान है। इसकी मदद से मालगाड़ियां दोगुनी रफ्तार से दौड़ रही हैं। ये सभी मेक इन इंडिया है, लेकिन इसमें इटली और स्पेन की टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। वेद प्रकाश, पीआरओ-डीएफसीसी, नई दिल्ली