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मिशन रफ्तार : दिल्ली-मुंबई के बीच 12 घंटे में पहुंचने की उम्मीद होगी साकार
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आगरा। दिल्ली और मुंबई जाने वाले आगरा के यात्रियों के लिए तेज रेल सफर की तैयारी तेज हो गई है। मिशन रफ्तार के तहत आगरा मंडल में हाईस्पीड ट्रेनों के लिए बिजली और पटरियों का ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसका फायदा मिलने पर यात्रियों का यात्रा समय घट सकता है। दोनों महानगरों के बीच यात्रा समय 12 घंटे के भीतर लाने का लक्ष्य है।
एनसीआर के सीपीआरओ डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि छाता के 132 केवी बिजली उपकेंद्र को 7 सितंबर को चालू कर दिया गया है। इससे ट्रेनों को जरूरी बिजली देने की व्यवस्था तैयार हुई है। कोसीकलां, मथुरा और शोलाका की बिजली सुविधाएं भी चालू हो चुकी हैं। वृंदावन में अंतिम जांच चल रही है, जिसे बृहस्पतिवार 10 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।
मथुरा-भूतेश्वर खंड में सहायक अर्थ तार यानी बिजली सुरक्षा के लिए लगाया जाने वाला अतिरिक्त तार अंतिम चरण में है। पटरियों के किनारे खंभों की नींव और अधिकांश बड़े बिजली खंभे तैयार हैं। मथुरा-भूतेश्वर यार्ड में नई और चौथी लाइन का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि अक्तूबर में आगरा नियंत्रण केंद्र से बिजली व्यवस्था की दूर से निगरानी शुरू करने की तैयारी है। 30 सितंबर तक जरूरी काम पूरा होने के बाद हाईस्पीड ट्रेनों के लिए ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) की क्षमता को परखने के लिए ओएचई ट्रायल शुरू किया जा सकेगा।
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एनसीआर के सीपीआरओ डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि छाता के 132 केवी बिजली उपकेंद्र को 7 सितंबर को चालू कर दिया गया है। इससे ट्रेनों को जरूरी बिजली देने की व्यवस्था तैयार हुई है। कोसीकलां, मथुरा और शोलाका की बिजली सुविधाएं भी चालू हो चुकी हैं। वृंदावन में अंतिम जांच चल रही है, जिसे बृहस्पतिवार 10 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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मथुरा-भूतेश्वर खंड में सहायक अर्थ तार यानी बिजली सुरक्षा के लिए लगाया जाने वाला अतिरिक्त तार अंतिम चरण में है। पटरियों के किनारे खंभों की नींव और अधिकांश बड़े बिजली खंभे तैयार हैं। मथुरा-भूतेश्वर यार्ड में नई और चौथी लाइन का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि अक्तूबर में आगरा नियंत्रण केंद्र से बिजली व्यवस्था की दूर से निगरानी शुरू करने की तैयारी है। 30 सितंबर तक जरूरी काम पूरा होने के बाद हाईस्पीड ट्रेनों के लिए ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) की क्षमता को परखने के लिए ओएचई ट्रायल शुरू किया जा सकेगा।
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