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Agra News: आज भी ताजा हैं संयुक्त राष्ट्र में अटल के हिंदी भाषण की यादें
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बाह: संयुक्त राष्ट्र संघ में अटल जी के हिंदी भाषण की यादें, अटल जी के भ्रमण का फाइल फोटो
बाह। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर में उनके संयुक्त राष्ट्र में दिए गए हिंदी भाषणों को आज भी गर्व से याद किया जाता है। उन्होंने 4 अक्तूबर 1977 को विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देकर दुनिया में हिंदी का मान बढ़ाया था।
अटल ने सितंबर 2000 में भी प्रधानमंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया था। बाह के साहित्यकार शिवशंकर कटारे ने बताया कि अटल के भाषण से दुनिया में हिंदी का डंका बजा था। उन्होंने कहा, हिंदी से जुड़ी उनकी यादों को सहेजा जाना चाहिए और राजभाषा के विकास के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। बाह के विनोदन जैन ने याद करते हुए कहा कि उन्होंने तब रेडियो पर भाषण सुना था। गौरव के आंसुओं से उनकी आंखें भर आई थीं। बटेश्वर के नरेंद्र वर्मा ने बताया कि अटल के भाषण के वक्त गांव में उत्सव जैसा माहौल था।
ऐतिहासिक क्षणों की यादें बटेश्वर के लोग अटल के हिंदी भाषणों को ऐतिहासिक पल मानते हैं। लालू तोमर, भूपेंद्र सिंह भदौरिया, राजू चौहान, विनोद सिंह प्रधान और पूर्व अध्यक्ष सुनील बाबू ने कहा, अटल ने दुनिया में हिंदी का गौरव बढ़ाया था। बटेश्वर में हिंदी के ऐतिहासिक पल की यादें संरक्षित होनी चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि उनकी यादों को सहेजना आवश्यक है।
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स्मृतियों के संरक्षण के प्रयास
केंद्र और प्रदेश सरकार बटेश्वर की विरासत के साथ अटल की स्मृतियों को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है। स्थानीय लोग भी इन स्मृतियों को सहेजने की मांग कर रहे हैं। राजभाषा के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। अटल के योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है। यह उनके पैतृक गांव के लिए विशेष महत्व रखता है।
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अटल ने सितंबर 2000 में भी प्रधानमंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया था। बाह के साहित्यकार शिवशंकर कटारे ने बताया कि अटल के भाषण से दुनिया में हिंदी का डंका बजा था। उन्होंने कहा, हिंदी से जुड़ी उनकी यादों को सहेजा जाना चाहिए और राजभाषा के विकास के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। बाह के विनोदन जैन ने याद करते हुए कहा कि उन्होंने तब रेडियो पर भाषण सुना था। गौरव के आंसुओं से उनकी आंखें भर आई थीं। बटेश्वर के नरेंद्र वर्मा ने बताया कि अटल के भाषण के वक्त गांव में उत्सव जैसा माहौल था।
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ऐतिहासिक क्षणों की यादें बटेश्वर के लोग अटल के हिंदी भाषणों को ऐतिहासिक पल मानते हैं। लालू तोमर, भूपेंद्र सिंह भदौरिया, राजू चौहान, विनोद सिंह प्रधान और पूर्व अध्यक्ष सुनील बाबू ने कहा, अटल ने दुनिया में हिंदी का गौरव बढ़ाया था। बटेश्वर में हिंदी के ऐतिहासिक पल की यादें संरक्षित होनी चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि उनकी यादों को सहेजना आवश्यक है।
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स्मृतियों के संरक्षण के प्रयास
केंद्र और प्रदेश सरकार बटेश्वर की विरासत के साथ अटल की स्मृतियों को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है। स्थानीय लोग भी इन स्मृतियों को सहेजने की मांग कर रहे हैं। राजभाषा के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। अटल के योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है। यह उनके पैतृक गांव के लिए विशेष महत्व रखता है।