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मेडिकल कॉलेज: अल्ट्रासाउंड के लिए भटकती हैं गर्भवती
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फिरोजाबाद। जिले में मेडिकल कॉलेज बनने के बाद गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए जद्दोजेहद करनी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद प्रसव की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध हो गई है लेकिन प्रसव से पूर्व अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को इंतजार करना पड़ता है। कई बार गर्भवती महिलाओं को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है।
रामनगर निवासी किरन देवी, टापा कलां की अमिता, किशन नगर से आई मीनाक्षी राठौर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज नाम का है। यहां सुविधाओं का अभाव है। जिला महिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित कर दिया है लेकिन सुविधाओं में इजाफा नहीं हुआ है। पूर्व में भी महिला अस्पताल में 70 पलंग की सुविधा थी और मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी 70 पलंग ही हैं।
अधिक प्रसव अथवा ऑपरेशन की स्थिति में एक पलंग पर दो-दो प्रसूताओं को लेटा दिया जाता है। अल्ट्रासाउंड की बात करें तो सीएमओ कार्यालय से संबद्ध एक चिकित्सक यहां जांच करते हैं। एक दिन में अधिकतम 30 अल्ट्रासाउंड ही होते हैं। हालांकि मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 50 से 60 महिलाएं अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंचती हैं। यदि चिकित्सक अवकाश पर रहें तो गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड बाहर से कराना पड़ता है।
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महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी हैं। इस कारण कभी-कभी अल्ट्रासाउंड कराने में दिक्कत आती हैं। कोरोना के कारण अस्पताल दूसरी जगह शिफ्ट है। इसलिए पलंग भी 70 हैं। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद चिकित्सक बढ़े हैं। ऑपरेशन और प्रसव में बढ़ोत्तरी हुई है। मरीजों की सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा।
डॉ. साधना राठौर, सीएमएस
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रामनगर निवासी किरन देवी, टापा कलां की अमिता, किशन नगर से आई मीनाक्षी राठौर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज नाम का है। यहां सुविधाओं का अभाव है। जिला महिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित कर दिया है लेकिन सुविधाओं में इजाफा नहीं हुआ है। पूर्व में भी महिला अस्पताल में 70 पलंग की सुविधा थी और मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी 70 पलंग ही हैं।
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अधिक प्रसव अथवा ऑपरेशन की स्थिति में एक पलंग पर दो-दो प्रसूताओं को लेटा दिया जाता है। अल्ट्रासाउंड की बात करें तो सीएमओ कार्यालय से संबद्ध एक चिकित्सक यहां जांच करते हैं। एक दिन में अधिकतम 30 अल्ट्रासाउंड ही होते हैं। हालांकि मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 50 से 60 महिलाएं अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंचती हैं। यदि चिकित्सक अवकाश पर रहें तो गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड बाहर से कराना पड़ता है।
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महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी हैं। इस कारण कभी-कभी अल्ट्रासाउंड कराने में दिक्कत आती हैं। कोरोना के कारण अस्पताल दूसरी जगह शिफ्ट है। इसलिए पलंग भी 70 हैं। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद चिकित्सक बढ़े हैं। ऑपरेशन और प्रसव में बढ़ोत्तरी हुई है। मरीजों की सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा।
डॉ. साधना राठौर, सीएमएस