{"_id":"5cee30b4bdec22078775c87e","slug":"mayawati-can-change-organization-before-vidhansabha-elections-in-agra-aligarh-up","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लोकसभा चुनाव में हार के बाद बसपा में 'बड़े बदलाव' की तैयारी, ब्रज में मिली थी करारी शिकस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकसभा चुनाव में हार के बाद बसपा में 'बड़े बदलाव' की तैयारी, ब्रज में मिली थी करारी शिकस्त
Wed, 29 May 2019 03:13 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 29 May 2019 03:13 PM IST
विज्ञापन
बसपा सुप्रीमो मायावती
- फोटो : amar ujala
चुनाव में सपा से गठबंधन के बाद भी आगरा मंडल में बसपा को निराशाजनक परिणाम मिला। जिस सीट पर बसपा ने पहलीही बार में सांसद बनाया, उस फतेहपुर सीकरी सीट पर बसपा प्रत्याशी को करारी हार का सामना करना पड़ा और तीसरे स्थान पर पहुंच गया।
आगरा में भी परिणाम उम्मीदों से उलट रहे। इसके बाद संगठन में अब बड़े पैमाने पर बदलाव करने की तैयारी की जा रही है। सपा के दोनों प्रत्याशियों ने पार्टी अध्यक्ष को हार के कारणों समेत रिपोर्ट दी है। इसके अलावा बामसेफ और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं ने लखनऊ तक अपनी बात पहुंचाई है।
सूत्रों के मुताबिक बसपा अध्यक्ष मायावती हार के कारणों की समीक्षा के लिए जल्द ही बैठक बुलाने वाली हैं, जिसमें जोन कोआर्डिनेटरों के साथ चर्चा की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
आगरा में भी परिणाम उम्मीदों से उलट रहे। इसके बाद संगठन में अब बड़े पैमाने पर बदलाव करने की तैयारी की जा रही है। सपा के दोनों प्रत्याशियों ने पार्टी अध्यक्ष को हार के कारणों समेत रिपोर्ट दी है। इसके अलावा बामसेफ और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं ने लखनऊ तक अपनी बात पहुंचाई है।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक बसपा अध्यक्ष मायावती हार के कारणों की समीक्षा के लिए जल्द ही बैठक बुलाने वाली हैं, जिसमें जोन कोआर्डिनेटरों के साथ चर्चा की जाएगी।
विज्ञापन
इसी बैठक में आगरा, अलीगढ़ मंडल में संगठन के नेताओं पर कार्रवाई का फरमान सुनाया जा सकता है। बसपा यहां अपने गढ़ में भी हार गई। गठबंधन का मजबूत गणित होने पर भी कई बूथों पर पार्टी प्रत्याशी को वोट नहीं मिले।
संगठन के कई नेताओं पर सवाल पहले से ही उठ रहे थे। चुनाव के दौरान पार्टी के कई पूर्व विधायकों ने बसपा छोड़कर भाजपा और कांग्रेस की सदस्यता ले ली। इनमें दो बार के पूर्व विधायक भी शामिल थे।
एक पूर्व विधायक पहले ही सपा का दामन थाम चुके थे। पार्टी के कभी 6 विधायक थे, लेकिन इनमें से पांच पूर्व विधायक बसपा छोड़ कर चले गए। संगठन के नेताओं की यह बड़ी कमजोरी मानी जा रही है कि वह चुनाव के समय कुनबा एकजुट न रख सके। पूर्व विधायकों के पार्टी छोड़ने का वोटरों के बीच बड़ा संदेश चला गया।
संगठन के कई नेताओं पर सवाल पहले से ही उठ रहे थे। चुनाव के दौरान पार्टी के कई पूर्व विधायकों ने बसपा छोड़कर भाजपा और कांग्रेस की सदस्यता ले ली। इनमें दो बार के पूर्व विधायक भी शामिल थे।
एक पूर्व विधायक पहले ही सपा का दामन थाम चुके थे। पार्टी के कभी 6 विधायक थे, लेकिन इनमें से पांच पूर्व विधायक बसपा छोड़ कर चले गए। संगठन के नेताओं की यह बड़ी कमजोरी मानी जा रही है कि वह चुनाव के समय कुनबा एकजुट न रख सके। पूर्व विधायकों के पार्टी छोड़ने का वोटरों के बीच बड़ा संदेश चला गया।