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मथुरा: आतिशबाजी से चमक उठा आसमान
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वृंदावन (मथुरा)। दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव में बुधवार को गरुड़ जी पर विराजमान होकर भगवान रंगनाथ निकले। प्रात:काल वेला में भगवान रंगनाथ की सवारी के दर्शन कर श्रद्धालु अभिभूत हो गए। देर शाम बड़े बगीचा में आतिशबाजी का आयोजन किया गया। इस आतिशबाजी की चमक से आसमान भी चमक उठा। वृंदावन में दक्षिण शैली के विशालतम मंदिर रंगनाथ में दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
बुधवार को ब्रह्मोत्सव का तीसरा दिन रहा। इस दिन भगवान रंगनाथ ने गरुड़ जी की सवारी की। पक्षीराज गरुड़ को वेदों की आत्मा कहा गया है। उनके पंखों से सामवेद का गायन होता है। गरुड़ जी पर वेदवैद्य भगवान विराजते हैं । इसी वाहन पर बैठकर प्रभु ने गजराज को ग्राह के फंदे से मुक्त किया था। गरुड़ जी सेवा एवं भक्ति के प्रतीक है।
स्वर्ण निर्मित गरुड़ वाहन पर विराजमान होकर भगवान रंगनाथ निज मंदिर से निकलकर बारहद्वारी मंडप पर पहुंचे। यहां सस्वर पाठ किया गया। इसके बाद आगे चल रहे गजराज और बैंडबाजों की भक्तिमय ध्वनि के बीच भगवान रंगनाथ की सवारी बड़े बगीचा पहुंची, जहां भगवान की कुंभरती की गई। देर शाम बड़े बगीचा में आतिशबाजी का आयोजन किया गया। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। आतिशबाजी की आभा देखते ही बन रही थी। रंग बिरंगी रोशनी लोगों को आकर्षित करती रहीं।
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बुधवार को ब्रह्मोत्सव का तीसरा दिन रहा। इस दिन भगवान रंगनाथ ने गरुड़ जी की सवारी की। पक्षीराज गरुड़ को वेदों की आत्मा कहा गया है। उनके पंखों से सामवेद का गायन होता है। गरुड़ जी पर वेदवैद्य भगवान विराजते हैं । इसी वाहन पर बैठकर प्रभु ने गजराज को ग्राह के फंदे से मुक्त किया था। गरुड़ जी सेवा एवं भक्ति के प्रतीक है।
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स्वर्ण निर्मित गरुड़ वाहन पर विराजमान होकर भगवान रंगनाथ निज मंदिर से निकलकर बारहद्वारी मंडप पर पहुंचे। यहां सस्वर पाठ किया गया। इसके बाद आगे चल रहे गजराज और बैंडबाजों की भक्तिमय ध्वनि के बीच भगवान रंगनाथ की सवारी बड़े बगीचा पहुंची, जहां भगवान की कुंभरती की गई। देर शाम बड़े बगीचा में आतिशबाजी का आयोजन किया गया। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। आतिशबाजी की आभा देखते ही बन रही थी। रंग बिरंगी रोशनी लोगों को आकर्षित करती रहीं।
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