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मथुरा: प्रदेश का सबसे बड़ा पार्क बनाने की योजना, यमुना किनारे 130 हेक्टेयर में तैयार होगा सौभरि वन
Fri, 30 Jul 2021 11:14 AM IST
आगरा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jul 2021 11:14 AM IST
सार
सौभरि वन को लेकर कलक्ट्रेट सभाकक्ष में डीएम नवनीत चहल और ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप के नेतृत्व में आयोजित बैठक में विकास प्राधिकरण और वन विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया। लंबे विचार-विमर्श के बाद कई बिंदुओं पर सहमति बनी। इसमें 130 हेक्टेयर भूमि पर वन विभाग द्वारा कृष्णकालीन प्रजातियों से जुड़े लगभग 76875 पौधों का रोपण करने का फैसला लिया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वृंदावन (मथुरा)। भगवान श्रीराधाकृष्ण की लीलास्थली वृंदावन में यमुना किनारे कुंभ क्षेत्र पर पौधरोपण के बाद अब उत्तरप्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ग्राम सुनरख के निकट 130 हेक्टेयर क्षेत्र में सौभरि वन स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। इस परियोजना पर जिला प्रशासन, वन विभाग और विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर अंजाम देगा।
बृहस्पतिवार को सौभरि वन को लेकर कलक्ट्रेट सभाकक्ष में डीएम नवनीत चहल और ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप के नेतृत्व में आयोजित बैठक में विकास प्राधिकरण और वन विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया। लंबे विचार-विमर्श के बाद कई बिंदुओं पर सहमति बनी। इसमें 130 हेक्टेयर भूमि पर वन विभाग द्वारा कृष्णकालीन प्रजातियों से जुड़े लगभग 76875 पौधों का रोपण करने का फैसला लिया गया।
चयनित स्थल को कांटेदार तारबाड़ एवं 4 वाच टावरों की स्थापना की जाएगी। यहां पौधालय की स्थापना, मियांबाकी पौधरोपण, जल एवं मृदा संरक्षण, जल निकाय एवं जल निकासी वाहिकाओं का निर्माण, लैंड स्केपिंग का कार्य द्वितीय चरण में होगा। चयनित स्थल को अतिक्रमण से मुक्त कराने का कार्य जिला प्रशासन के सहयोग से होगा।
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पार्क के रूप में प्रदेश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र होगा
सौभरि वन के विकास का प्लान दो साल पहले बनाया गया था, लेकिन बजट अभाव में यह क्रियान्वित न हो सका। यह अब तक का प्रदेश में सबसे बड़ा वन होगा। सौभरि वन (नगर वन) परियोजना से ईको रेस्टोरेशन, वन्य जीव प्राकृतवास और स्थानीय पर्यावरण स्थल का विकास होगा। भविष्य में यह बंदरों के प्राकृतवास के लिए उपयोगी बनेगा।
इसके एक ओर कोसी ड्रेन और दूसरी ओर यमुना नदी है। बीच का यह स्थल भगवान श्रीकृष्ण की कालीयदेह दमन लीला और सौभरि ऋषि की तपोस्थली है। इस कारण चयनित क्षेत्र पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्राम सुनरख में सौभरि ऋषि का आश्रम भी है।
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बृहस्पतिवार को सौभरि वन को लेकर कलक्ट्रेट सभाकक्ष में डीएम नवनीत चहल और ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप के नेतृत्व में आयोजित बैठक में विकास प्राधिकरण और वन विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया। लंबे विचार-विमर्श के बाद कई बिंदुओं पर सहमति बनी। इसमें 130 हेक्टेयर भूमि पर वन विभाग द्वारा कृष्णकालीन प्रजातियों से जुड़े लगभग 76875 पौधों का रोपण करने का फैसला लिया गया।
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चयनित स्थल को कांटेदार तारबाड़ एवं 4 वाच टावरों की स्थापना की जाएगी। यहां पौधालय की स्थापना, मियांबाकी पौधरोपण, जल एवं मृदा संरक्षण, जल निकाय एवं जल निकासी वाहिकाओं का निर्माण, लैंड स्केपिंग का कार्य द्वितीय चरण में होगा। चयनित स्थल को अतिक्रमण से मुक्त कराने का कार्य जिला प्रशासन के सहयोग से होगा।
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पार्क के रूप में प्रदेश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र होगा
सौभरि वन के विकास का प्लान दो साल पहले बनाया गया था, लेकिन बजट अभाव में यह क्रियान्वित न हो सका। यह अब तक का प्रदेश में सबसे बड़ा वन होगा। सौभरि वन (नगर वन) परियोजना से ईको रेस्टोरेशन, वन्य जीव प्राकृतवास और स्थानीय पर्यावरण स्थल का विकास होगा। भविष्य में यह बंदरों के प्राकृतवास के लिए उपयोगी बनेगा।
इसके एक ओर कोसी ड्रेन और दूसरी ओर यमुना नदी है। बीच का यह स्थल भगवान श्रीकृष्ण की कालीयदेह दमन लीला और सौभरि ऋषि की तपोस्थली है। इस कारण चयनित क्षेत्र पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्राम सुनरख में सौभरि ऋषि का आश्रम भी है।