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मथुरा: शनि अमावस्या: कोकिलावन में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
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मथुरा। कोकिलावन में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।
- फोटो : KOSI
कोसीकलां (मथुरा)। कोरोना संक्रमण के बाद मंदिर खुलने पर पड़ी पहली शनि अमावस्या पर शनिधाम कोकिलावन में शनिवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने सूरज कुंड में स्नान कर शनिदेव के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना कर मनौती मांगी। पूरे दिन परिक्रमा मार्ग एवं मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।
कोकिलावन धाम में सुबह से ही शनि भक्तों का तांता लगा रहा। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए भक्तों ने यहां पहुंचकर कोकिलावन की तीन कोसीय परिक्रमा की, जिसके बाद भक्तों ने मंदिर प्रांगण में स्थित सूरज कुंड में स्नान किया। इसके बाद उन्होंने लंबी कतारों में लग शनिदेव के गुरु बरखंडी महाराज का जलाभिषेक किया और विशेष पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने शनि देव मंदिर पहुंच शनिदेव के विग्रह पर सरसों का तेल, काले उड़द, काले तिल आदि सामग्री अर्पित किए। पुलिस प्रशासन ने भारी संख्या में यहां आए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था की।
श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भंडारों का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों शनि भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। शनिदेव मंदिर के महंत प्रेम दास महाराज ने बताया कि शनि अमावस्या पर शनिदेव की परिक्रमा कर दर्शन और पूजा-अर्चना करने पर अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।
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कोकिलावन धाम में सुबह से ही शनि भक्तों का तांता लगा रहा। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए भक्तों ने यहां पहुंचकर कोकिलावन की तीन कोसीय परिक्रमा की, जिसके बाद भक्तों ने मंदिर प्रांगण में स्थित सूरज कुंड में स्नान किया। इसके बाद उन्होंने लंबी कतारों में लग शनिदेव के गुरु बरखंडी महाराज का जलाभिषेक किया और विशेष पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने शनि देव मंदिर पहुंच शनिदेव के विग्रह पर सरसों का तेल, काले उड़द, काले तिल आदि सामग्री अर्पित किए। पुलिस प्रशासन ने भारी संख्या में यहां आए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था की।
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श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भंडारों का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों शनि भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। शनिदेव मंदिर के महंत प्रेम दास महाराज ने बताया कि शनि अमावस्या पर शनिदेव की परिक्रमा कर दर्शन और पूजा-अर्चना करने पर अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।
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