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...चांदनी रात में हर सजनी अपने सजना को देखेगी
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 29 Oct 2015 02:00 AM IST
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प्रीत और रीत की प्यारी सी चूनर ओढ़े आ गया है करवाचौथ का दिन। सजनी की खुशी की पार नहीं है। तन-मन तरंगित है। इस निर्जल व्रत को करके वह धन्य हो जाएगी। यह व्रत उसे अखंड सौभाग्य देगा। पति के प्रति उसके प्रेम और समर्पण को बयां करेगा।
शुक्रवार को चंद्रमा पति-पत्नी के अटूट बंधन का साक्षी बनेगा। सोलह शृंगार कर दुल्हन बनी सजनी करवाचौथ का व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करेगी। रात को चांदनी रात में चांद और फिर सुहाग को देखने के बाद अपना व्रत खोलेंगी।
शुक्रवार के लिए महिलाओं ने पूरी तैयारी कर ली है। तीन दिन पहले से ही पार्लर में जाना शुरू कर दिया है। आखिरी दिन मेक अप और हेयर स्टाइल की जाएगी। बुधवार से महिलाओं ने मेंहदी लगवाना शुरू कर दिया।
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करवाचौथ पर महिलाएं प्रेम के लाल रंग की ओढ़नी ओढ़कर अपने सजना को रिझाएंगीं। शाम को सज धज कर कहानी सुनेंगी व पूजा करेंगी। शुक्रवार को सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग है जो सुहागिनों के लिए बहुत शुभ है।
पूजन का विधान
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार, शाम 5-7 बजे के मध्य में पूजा आरंभ करें। पहले कच्ची मिट्टी के गौर पार्वती व गणेश जी बनाएं। उन्हें पटरे पर स्थापित कर नई चुनरी व शृंगार का सामान चढ़ाएं। नीचे करवा और लोटा रखा जाता है। गणपति और गौर-पार्वती का पूजन करने के बाद पूड़ी, पूए, लड्डू आदि का भोग लगाएं। उसके बाद हाथ में जौ या चावल लेकर कहानी सुनते हैं। उसके बाद करवे और लोटे का स्थान सात बार बदला जाता है। पूजा के बाद बायना निकालते हैं। ननद या सास को चीनी का करवा मंसा जाता है।
अक्को गद्दी के दिनेश गुरु ने बताया कि 30 अक्तूबर को 8:26 बजे तक तीज रहेगी। उसके बाद चौथ प्रारंभ होगी। प्रात: 8:24 मिनट तक भद्रा हैं। इस कारण महिलाओं को अपने बिछुए बदलने का कार्य भद्राओं के बाद करना चाहिए।
चंद्रोदय का समय
मौसम विभाग के अनुसार, चंद्रोदय का समय 7:30 बजे है।
नव विवाहित जोड़ों के यहां होगी सामूहिक पूजा
करवाचौथ के त्योहार को लेकर पंजाबी समाज में उल्लास छाया है। नव विवाहित जोड़ों के यहां यह उत्सव सामूहिक रूप से मनाया जाएगा। रानी सुहानी ने बताया कि एक दिन पहले तारों की छांव में सास बहू को सरगी देगी। इसमें मिठाई, फैनी, फल, सुहाग का सामान, ड्राईफ्रूट्स आदि होते हैं। सरगी खाने के बाद व्रत शुरू हो जाता है। शाम को पूजा होती है। जिसकी पहली करवाचौथ होती है, उसकेयहां से सबको बुलावा जाता है। उसके घर पर सामूहिक रूप से उत्सव मनाया जाता है। पंडिताइन करवाचौथ की कथा सुनाती है। सुहागिनें सात बार अपनी थाली घुमाती हैं। थाली में सामान पूज कर सास को दिया जाता है। जब थाली वापिस घूमकर आ जाती है तो उसे चूमकर लोटे पर रख लिया जाता है। रुठणा मनाइणा सुतणा जगाइणा, लै वीरे करवणा... गीत गाया जाता है। रात को चांद को अर्घ्य देकर पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलते हैं।
कथा
इंद्रप्रस्थ नगरी में वेद शर्मा नामक ब्राह्मण थे। उनके सात पुत्र व एक पुत्री थी जिसका नाम वीरावती था। सातों भाई बहन को बहुत प्यार करते थे। एक बार बहन ने मायके में निर्जला व्रत रखा। भाइयों ने बहन को निढाल देखकर उसका व्रत जल्दी पूर्ण कराने के बारे में सोचा। उन्होंने नीम के पेड़ पर चलनी रखकर पीछे से दीपक दिखा दिया। वीरावती ने उसे चंद्र समझकर अपना व्रत खोल लिया। इससे उसके सुहाग की मृत्यु हो गई। उसने भगवान शिव और पार्वती से अपने पति को जीवित करने की प्रार्थना की। भगवान ने इंद्राणी को भेजा। इंद्राणी ने वीरावती को करवाचौथ के व्रत का विधि विधान बताया। उस व्रत को करने से वीरावती को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई।
फोटो है...
राजस्थानी शैली के आभूषण पहली पसंद
करवाचौथ पर महिलाएं सजने संवरने को तैयार हुईं तो सोने का भाव भी स्थिर हो गया। सोने के आभूषण अब खूब चमक रहे हैं। महिलाओं को चोकर्स और नेकलेस फिर से भा रहे हैं। डायमंड और स्टोन के उलट अब सिर्फ सोने के आभूषण ही खरीदे जा रहे हैं। राजस्थानी शैली के आभूषण महिलाओं की पहली पसंद बने हुए हैं।
लाइट वेट ज्वेलरी ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। करवाचौथ के साथ सहालग में भी उस आभूषण को पहन सकें, ऐसी खरीद हो रही है। 24 कैरेट सोना 27,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर और 22 कैरेट 26 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम का भाव है। ज्वेलर्स एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश हेमदेव ने बताया कि लंबे समय बाद सोने के रेट स्थिर हुए हैं।
हालांकि अब खरीदारी का ट्रेंड बदला है। महिलाएं 15 दिन पहले की जगह चार से पांच दिन पहले ही खरीदारी को पहुंच रही हैं। दो दिनों से भीड़ अच्छी है। हो सकता है कि इससे बाजार की मंदी दूर हो जाए।
अग्रबंधु समन्वय समिति की महिला इकाई ने बुधवार को बल्केश्वर स्थित बेबी अग्रवाल के निवास पर करवाचौथ उत्सव मनाया। महिलाएं सजकर पहुंचीं। कई कलश और थाल सजाकर ले आई थीं। उत्सव में सभी ने सजना के नाम की मेंहदी लगाई। डांस, तंबोला आदि प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर भरपूर मस्ती भी की। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ समिति की अध्यक्षा ममता सिंघल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उत्सव में पार्षद मधुबाला अग्रवाल, रजनी अग्रवाल, नूतन अग्रवाल, रितु गोयल, राजकुमारी अग्रवाल, मीना गर्ग , मंजू आदि मौजूद रहीं।
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शुक्रवार को चंद्रमा पति-पत्नी के अटूट बंधन का साक्षी बनेगा। सोलह शृंगार कर दुल्हन बनी सजनी करवाचौथ का व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करेगी। रात को चांदनी रात में चांद और फिर सुहाग को देखने के बाद अपना व्रत खोलेंगी।
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शुक्रवार के लिए महिलाओं ने पूरी तैयारी कर ली है। तीन दिन पहले से ही पार्लर में जाना शुरू कर दिया है। आखिरी दिन मेक अप और हेयर स्टाइल की जाएगी। बुधवार से महिलाओं ने मेंहदी लगवाना शुरू कर दिया।
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करवाचौथ पर महिलाएं प्रेम के लाल रंग की ओढ़नी ओढ़कर अपने सजना को रिझाएंगीं। शाम को सज धज कर कहानी सुनेंगी व पूजा करेंगी। शुक्रवार को सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग है जो सुहागिनों के लिए बहुत शुभ है।
पूजन का विधान
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार, शाम 5-7 बजे के मध्य में पूजा आरंभ करें। पहले कच्ची मिट्टी के गौर पार्वती व गणेश जी बनाएं। उन्हें पटरे पर स्थापित कर नई चुनरी व शृंगार का सामान चढ़ाएं। नीचे करवा और लोटा रखा जाता है। गणपति और गौर-पार्वती का पूजन करने के बाद पूड़ी, पूए, लड्डू आदि का भोग लगाएं। उसके बाद हाथ में जौ या चावल लेकर कहानी सुनते हैं। उसके बाद करवे और लोटे का स्थान सात बार बदला जाता है। पूजा के बाद बायना निकालते हैं। ननद या सास को चीनी का करवा मंसा जाता है।
अक्को गद्दी के दिनेश गुरु ने बताया कि 30 अक्तूबर को 8:26 बजे तक तीज रहेगी। उसके बाद चौथ प्रारंभ होगी। प्रात: 8:24 मिनट तक भद्रा हैं। इस कारण महिलाओं को अपने बिछुए बदलने का कार्य भद्राओं के बाद करना चाहिए।
चंद्रोदय का समय
मौसम विभाग के अनुसार, चंद्रोदय का समय 7:30 बजे है।
नव विवाहित जोड़ों के यहां होगी सामूहिक पूजा
करवाचौथ के त्योहार को लेकर पंजाबी समाज में उल्लास छाया है। नव विवाहित जोड़ों के यहां यह उत्सव सामूहिक रूप से मनाया जाएगा। रानी सुहानी ने बताया कि एक दिन पहले तारों की छांव में सास बहू को सरगी देगी। इसमें मिठाई, फैनी, फल, सुहाग का सामान, ड्राईफ्रूट्स आदि होते हैं। सरगी खाने के बाद व्रत शुरू हो जाता है। शाम को पूजा होती है। जिसकी पहली करवाचौथ होती है, उसकेयहां से सबको बुलावा जाता है। उसके घर पर सामूहिक रूप से उत्सव मनाया जाता है। पंडिताइन करवाचौथ की कथा सुनाती है। सुहागिनें सात बार अपनी थाली घुमाती हैं। थाली में सामान पूज कर सास को दिया जाता है। जब थाली वापिस घूमकर आ जाती है तो उसे चूमकर लोटे पर रख लिया जाता है। रुठणा मनाइणा सुतणा जगाइणा, लै वीरे करवणा... गीत गाया जाता है। रात को चांद को अर्घ्य देकर पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलते हैं।
कथा
इंद्रप्रस्थ नगरी में वेद शर्मा नामक ब्राह्मण थे। उनके सात पुत्र व एक पुत्री थी जिसका नाम वीरावती था। सातों भाई बहन को बहुत प्यार करते थे। एक बार बहन ने मायके में निर्जला व्रत रखा। भाइयों ने बहन को निढाल देखकर उसका व्रत जल्दी पूर्ण कराने के बारे में सोचा। उन्होंने नीम के पेड़ पर चलनी रखकर पीछे से दीपक दिखा दिया। वीरावती ने उसे चंद्र समझकर अपना व्रत खोल लिया। इससे उसके सुहाग की मृत्यु हो गई। उसने भगवान शिव और पार्वती से अपने पति को जीवित करने की प्रार्थना की। भगवान ने इंद्राणी को भेजा। इंद्राणी ने वीरावती को करवाचौथ के व्रत का विधि विधान बताया। उस व्रत को करने से वीरावती को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई।
फोटो है...
राजस्थानी शैली के आभूषण पहली पसंद
करवाचौथ पर महिलाएं सजने संवरने को तैयार हुईं तो सोने का भाव भी स्थिर हो गया। सोने के आभूषण अब खूब चमक रहे हैं। महिलाओं को चोकर्स और नेकलेस फिर से भा रहे हैं। डायमंड और स्टोन के उलट अब सिर्फ सोने के आभूषण ही खरीदे जा रहे हैं। राजस्थानी शैली के आभूषण महिलाओं की पहली पसंद बने हुए हैं।
लाइट वेट ज्वेलरी ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। करवाचौथ के साथ सहालग में भी उस आभूषण को पहन सकें, ऐसी खरीद हो रही है। 24 कैरेट सोना 27,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर और 22 कैरेट 26 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम का भाव है। ज्वेलर्स एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश हेमदेव ने बताया कि लंबे समय बाद सोने के रेट स्थिर हुए हैं।
हालांकि अब खरीदारी का ट्रेंड बदला है। महिलाएं 15 दिन पहले की जगह चार से पांच दिन पहले ही खरीदारी को पहुंच रही हैं। दो दिनों से भीड़ अच्छी है। हो सकता है कि इससे बाजार की मंदी दूर हो जाए।
अग्रबंधु समन्वय समिति की महिला इकाई ने बुधवार को बल्केश्वर स्थित बेबी अग्रवाल के निवास पर करवाचौथ उत्सव मनाया। महिलाएं सजकर पहुंचीं। कई कलश और थाल सजाकर ले आई थीं। उत्सव में सभी ने सजना के नाम की मेंहदी लगाई। डांस, तंबोला आदि प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर भरपूर मस्ती भी की। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ समिति की अध्यक्षा ममता सिंघल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उत्सव में पार्षद मधुबाला अग्रवाल, रजनी अग्रवाल, नूतन अग्रवाल, रितु गोयल, राजकुमारी अग्रवाल, मीना गर्ग , मंजू आदि मौजूद रहीं।