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Panwari kand: मुकदमे में नामजदगी न हथियारों की बरामदगी, अभियोजन की कार्रवाई को लेकर खड़े हो गए कई सवाल

Fri, 05 Aug 2022 02:12 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 05 Aug 2022 02:12 PM IST
सार

एडीजीसी शशि शर्मा ने बताया कि फैसले का अवलोकन किया जाएगा। अगर, मामला अपील के योग्य है तो फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।

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Many questions have arisen regarding the action of the prosecution in Panwari kand
पनवारी कांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के चर्चित पनवारी कांड में आठ आरोपियों के दोष मुक्त होने पर अभियोजन की कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट ने माना कि किसी आरोपी को मुकदमे में नामजद नहीं किया गया। मौके पर किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई। हथियार भी बरामद नहीं किया गया। पुलिस की विवेचना में कमियों का लाभ आरोपी पक्ष को मिला।

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एडीजीसी शशि शर्मा ने बताया कि पनवारी निवासी चोखेलाल की बेटी की शादी थी। जाट समाज के लोगों ने बरात न चढ़ने देने का पहले से ऐलान कर रखा था। चोखेलाल ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से लेकर शासन में शिकायत की थी। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस प्रशासनिक अधिकारी बैठक भी करते रहे। घटना के बाद चोखेलाल से तहरीर नहीं ली गई। वह शुरू से चौधरी बाबूलाल सहित अन्य आरोपियों के नाम ले रहे थे, मगर पुलिस ने अपनी ओर से मुकदमा दर्ज किया तो किसी के नाम का उल्लेख नहीं किया। तकरीबन डेढ़ महीने बाद प्रकाश में आए नामों को मुकदमे में खोला गया।
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घटना के बाद किसी की मौके से गिरफ्तारी नहीं की। आगजनी और तोड़फोड़ से संबंधित साक्ष्य भी नहीं जुटाए गए, जिससे एफएसएल की रिपोर्ट मिल सके। आरोपियों से कोई हथियार भी नहीं बरामद किया। कई आरोपियों ने कोर्ट में समर्पण किया। उनकी गिरफ्तारी में भी पुलिस फेल रही। चश्मदीद गवाहों के बयान भी पुलिस ने काफी विलंब से लिए। इसका कोई स्पष्टीकरण भी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया।
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मुख्य बात यह रही कि बरात चढ़ाई के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन, भाजपा नेता सुभाष भिलावली और अधिवक्ता करतार सिंह भारतीय बरात चढ़ाई के दौरान मौके पर मौजूद थे। उनको गवाह बनाया गया। मगर, तीनों ने कोर्ट में दिए अपने बयान में किसी आरोपी को दोषी नहीं बताया। एडीजीसी शशि शर्मा ने बताया कि फैसले का अवलोकन किया जाएगा। अगर, मामला अपील के योग्य है तो फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।

यह रहीं कमियां

- छह हजार लोगों भीड़ के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना।
- अभियुक्तगण का मुकदमे में नामजदगी न होना। 
- गवाहों के बयान काफी विलंब से दर्ज करना। 
- विलंब का कोई स्पष्टीकरण नहीं देना। 
- वरिष्ठ अधिकारियों के मौके पर होते हुए भी किसी की गिरफ्तारी नहीं होना। 
- किसी भी हथियार का बरामद नहीं करना। 
- चोखेलाल के परिवार के किसी सदस्य को चोट नहीं आना। 
- चोखेलाल के मुकदमा नहीं लिखाना और पुलिस की ओर से मुकदमा लिखना। 

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