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118 साल पहले के सिटी स्टेशन को बनाएं हेरिटेज स्टेशन: चैंबर
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आगरा सिटी स्टेशन को हेरिटेज स्टेशन का दर्जा देने की मांग करने वाले नेशनल चैंबर पदाधिकारी स्टेशन ?
- फोटो : a
आगरा। अंग्रेजों के जमाने में 118 साल पहले 1903 में बनाए गए आगरा सिटी रेलवे स्टेशन को हेरिटेज स्टेशन में बदलने की मांग नेशनल चैंबर आफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स ने उठाई है। नेशनल चैंबर के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल सिटी रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने के लिए बुधवार को पहुंचा, जिसने ब्रिटिश वास्तुकला के इस अनूठे नमूने सिटी स्टेशन का भ्रमण कर इसके जीर्णोद्धार और हेरिटेज स्टेशन का दर्जा देने की मांग की। चैंबर ने रेलवे से यहां रेल संग्रहालय बनाने की मांग भी उठाई है ताकि ब्रिटिश राज से लेकर अब तक के 100 सालों के रेल इतिहास से आगरा आने वाले सैलानी न केवल रूबरू हो सकें, बल्कि आगरा में आकर्षण का एक और केंद्र तैयार हो सके।
ब्रिटिश राज में आगरा का व्यापारिक केंद्र बेलनगंज था, जिसके नजदीक सिटी स्टेशन बनवाया गया। गुजरात के कारीगरों को बुलाकर अनूठी वास्तुकला में यह स्टेशन तैयार हुआ, जिसमें अंडरपास है। सिटी स्टेशन पूरे देश के रेल ट्रैक से जुड़ा था। स्टेशन से बाहर निकलने के लिए यह पहला स्टेशन था, जहां अंडरपास है। यह अब तक अच्छी स्थिति में है। सिटी स्टेशन के बाहर 4 हेक्टेयर जमीन खाली पड़ी है, जहां पौधरोपण के लिए मांग उठती रही है। पुराने शहर के लोगों के लिए यही एकमात्र जगह है, जहां वह घूमने, हवा लेने पहुंच सकते हैं। पूर्व में यहां रेल संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव तत्कालीन डीआरएम ने भेजा था, पर बाद में यह संग्रहालय झांसी में तय हो गया।
शहर के बीचोबीच जहां एक पौधा लगने की जगह नहीं, वहां स्टेशन का क्षेत्र बेकार पड़ा है। यहां 4 हेक्टेयर जमीन पर पौधरोपण के साथ इसे हेरिटेज स्टेशन की तरह सुरक्षित रखा जाए। रेलवे संग्रहालय के रूप में यह विकसित किया जाए। पुराने शहर के साथ यह आगरा का बड़ा आकर्षण बन सकेगा।
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मनीष अग्रवाल, अध्यक्ष, नेशनल चैंबर
आगरा में हर माह लाखों परीक्षार्थी आते हैं, जिनके लिए यह स्टेशन और रेल संग्रहालय आकर्षण बन लोगों के लिए शाम को घूमने का केंद्र बनाया जा सकता है। 4 हेक्टेयर में हरियाली विकसित हो तो यह पुराने शहर के लिए ऑक्सीजन का काम करेगा। - राजीव सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार
पुराने शहर के लोगों की इस स्टेशन से स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। बेलनगंज, फ्रीगंज, धूलियागंज के व्यापारियों के लिए यह स्टेशन मुफीद था। इतनी जगह पुराने शहर में कहीं नहीं, इसलिए इसे सुरक्षित रख हेरिटेज स्टेशन का दर्जा दिया जाए ताकि यादें सहेजी जा सकें
सीताराम अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चैंबर
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ब्रिटिश राज में आगरा का व्यापारिक केंद्र बेलनगंज था, जिसके नजदीक सिटी स्टेशन बनवाया गया। गुजरात के कारीगरों को बुलाकर अनूठी वास्तुकला में यह स्टेशन तैयार हुआ, जिसमें अंडरपास है। सिटी स्टेशन पूरे देश के रेल ट्रैक से जुड़ा था। स्टेशन से बाहर निकलने के लिए यह पहला स्टेशन था, जहां अंडरपास है। यह अब तक अच्छी स्थिति में है। सिटी स्टेशन के बाहर 4 हेक्टेयर जमीन खाली पड़ी है, जहां पौधरोपण के लिए मांग उठती रही है। पुराने शहर के लोगों के लिए यही एकमात्र जगह है, जहां वह घूमने, हवा लेने पहुंच सकते हैं। पूर्व में यहां रेल संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव तत्कालीन डीआरएम ने भेजा था, पर बाद में यह संग्रहालय झांसी में तय हो गया।
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शहर के बीचोबीच जहां एक पौधा लगने की जगह नहीं, वहां स्टेशन का क्षेत्र बेकार पड़ा है। यहां 4 हेक्टेयर जमीन पर पौधरोपण के साथ इसे हेरिटेज स्टेशन की तरह सुरक्षित रखा जाए। रेलवे संग्रहालय के रूप में यह विकसित किया जाए। पुराने शहर के साथ यह आगरा का बड़ा आकर्षण बन सकेगा।
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मनीष अग्रवाल, अध्यक्ष, नेशनल चैंबर
आगरा में हर माह लाखों परीक्षार्थी आते हैं, जिनके लिए यह स्टेशन और रेल संग्रहालय आकर्षण बन लोगों के लिए शाम को घूमने का केंद्र बनाया जा सकता है। 4 हेक्टेयर में हरियाली विकसित हो तो यह पुराने शहर के लिए ऑक्सीजन का काम करेगा। - राजीव सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार
पुराने शहर के लोगों की इस स्टेशन से स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। बेलनगंज, फ्रीगंज, धूलियागंज के व्यापारियों के लिए यह स्टेशन मुफीद था। इतनी जगह पुराने शहर में कहीं नहीं, इसलिए इसे सुरक्षित रख हेरिटेज स्टेशन का दर्जा दिया जाए ताकि यादें सहेजी जा सकें
सीताराम अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चैंबर