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मैनपुरी के वासुदेव को नसीब नहीं हो सकी घर की दहलीज, बीमारी से दिल्ली में हुई थी मौत
Tue, 31 Mar 2020 05:00 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 31 Mar 2020 05:00 PM IST
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मृतक का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना वायरस का भय कहें या मैनपुरी के गांव अरसारा निवासी वासुदेव का दुर्भाग्य। दिल्ली में मौत होने के बाद उसका शव गांव तक तो लाया गया, लेकिन घर की दहलीज तक नहीं पहुंचा। गांव के लोग भी दूरी बनाए रहे। गांव के बाहर ही मंगलवार को शव को अंतिम संस्कार कर दिया गया।
गांव अरसारा निवासी 35 वर्षीय वासुदेव बाथम दिल्ली में रहकर रिक्शा चलाता था। दो दिन पूर्व आंतों में संक्रमण की वजह से तबियत खराब हो गई। परिजनों ने लिए दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार को उपचार के दौरान वासुदेव की मौत हो गई।
मंगलवार को वासुदेव का शव गांव तक लाया गया, लेकिन कोरोना संक्रमण का भय ग्रामीणों में नजर आया। उधर, परिजनों ने भी शव को घर की दहलीज पर ले जाने की बजाय गांव के बाहर ही अंतिम संस्कार करना उचित समझा।
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गांव के बाहर नदी किनारे शव का अंतिम संस्कार किया गया। शव यात्रा में शामिल होने के लिए गिने चुने ग्रामीण ही नजर आए। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम यात्रा घर की दहलीज से उठती है, लेकिन शायद वासुदेव का दुर्भाग्य रहा जो ऐसा न हो सका।
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गांव अरसारा निवासी 35 वर्षीय वासुदेव बाथम दिल्ली में रहकर रिक्शा चलाता था। दो दिन पूर्व आंतों में संक्रमण की वजह से तबियत खराब हो गई। परिजनों ने लिए दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार को उपचार के दौरान वासुदेव की मौत हो गई।
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मंगलवार को वासुदेव का शव गांव तक लाया गया, लेकिन कोरोना संक्रमण का भय ग्रामीणों में नजर आया। उधर, परिजनों ने भी शव को घर की दहलीज पर ले जाने की बजाय गांव के बाहर ही अंतिम संस्कार करना उचित समझा।
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गांव के बाहर नदी किनारे शव का अंतिम संस्कार किया गया। शव यात्रा में शामिल होने के लिए गिने चुने ग्रामीण ही नजर आए। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम यात्रा घर की दहलीज से उठती है, लेकिन शायद वासुदेव का दुर्भाग्य रहा जो ऐसा न हो सका।