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Agra News: खास खबरः जागी चेतना, बहुरेंगे वन चेतना केंद्र के दिन
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मैनपुरी। बदहाल वन चेतना केंद्र के भी दिन बहुरेंगे। जिलाधिकारी ने शहर की इस ऐतिहासिक धरोहर को संवारने के लिए संज्ञान लिया है। उम्मीद है कि इसमें फिर से फल-फूल के पेड़-पौधे लहराएंगे। कुछ जानवरों को भी यहां फिर से लाकर बसाया जाएगा।
वर्ष 1990-91 में सपा सरकार के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने कलेक्ट्रेट के पास डेढ़ हेक्टेयर में वन चेतना केंद्र का शुभारंभ किया था। इसमें बत्तखों के लिए तालाब और बारहसिंहा और मगरमच्छ, घड़ियाल रखने के लिए अलग-अलग घरोंदे बनाकर उनमें इन जानवरों को छोड़ा गया था। विशेष प्रजाति के पक्षी भी यहां लाए गए थे। मगर, जैसे ही सपा की सरकार गई उसके बाद वन चेतना केंद्र के बुरे दिन शुरू हो गए थे। बजट न मिलने के कारण उसमें मौजूद पशु-पक्षियों को कानपुर, लखनऊ के चिडि़या घरों में भेज दिया गया। देखरेख न होने के कारण घरोंदे भी बदहाल हो गए। 2012 में प्रदेश में तीसरी बार सपा की सरकार बनने पर लोगों की उम्मीद थी कि लोहिया पार्क की तर्ज पर वन चेतना केंद्र की भी चेतना लौटेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सरकार बनने के बाद प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में से सिर्फ बाउंड्रीवॉल बनाकर सरकार ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है।
वर्तमान की यह है स्थिति
वन चेतना केंद्र में लगाए गए फल और फूलों के कीमती पौधे सूख चुके हैं। रखरखाव और देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं है। वन चेतना केंद्र में जंगली घास उग रही है, जिसे वर्षो से नहीं काटा गया है।
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2024 में भी चलीं थीं फाइलें
वन चेतना केंद्र के जीर्णोंद्धार के लिए 2024 में भी वन विभाग की ओर से कार्ययोजना तैयार हुई। वन विभाग नगर वन के तौर पर इसे विकसित करने को तैयार हुआ। मगर, बाउंड्रीवाल, जो कि वर्तमान में जर्जर स्थिति में है। उसे कराने के लिए बड़े बजट की जरूरत थी। इस बजट को पर्यटन विभाग से प्राप्त करने के लिए अधिकारियों ने बात भी की। इसके बाद फिर से मामला फाइलों में दफन हो गया था।
वन चेतना केंद्र का विकास कराया जाएगा। मैनपुरी के लोगों के लिए यह एक अच्छा पर्यटन स्थल होगा। संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ जल्द इस संबंध में बैठक की जाएगी।
- अंजनी कुमार सिंह, डीएम
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वर्ष 1990-91 में सपा सरकार के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने कलेक्ट्रेट के पास डेढ़ हेक्टेयर में वन चेतना केंद्र का शुभारंभ किया था। इसमें बत्तखों के लिए तालाब और बारहसिंहा और मगरमच्छ, घड़ियाल रखने के लिए अलग-अलग घरोंदे बनाकर उनमें इन जानवरों को छोड़ा गया था। विशेष प्रजाति के पक्षी भी यहां लाए गए थे। मगर, जैसे ही सपा की सरकार गई उसके बाद वन चेतना केंद्र के बुरे दिन शुरू हो गए थे। बजट न मिलने के कारण उसमें मौजूद पशु-पक्षियों को कानपुर, लखनऊ के चिडि़या घरों में भेज दिया गया। देखरेख न होने के कारण घरोंदे भी बदहाल हो गए। 2012 में प्रदेश में तीसरी बार सपा की सरकार बनने पर लोगों की उम्मीद थी कि लोहिया पार्क की तर्ज पर वन चेतना केंद्र की भी चेतना लौटेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सरकार बनने के बाद प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में से सिर्फ बाउंड्रीवॉल बनाकर सरकार ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है।
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वर्तमान की यह है स्थिति
वन चेतना केंद्र में लगाए गए फल और फूलों के कीमती पौधे सूख चुके हैं। रखरखाव और देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं है। वन चेतना केंद्र में जंगली घास उग रही है, जिसे वर्षो से नहीं काटा गया है।
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2024 में भी चलीं थीं फाइलें
वन चेतना केंद्र के जीर्णोंद्धार के लिए 2024 में भी वन विभाग की ओर से कार्ययोजना तैयार हुई। वन विभाग नगर वन के तौर पर इसे विकसित करने को तैयार हुआ। मगर, बाउंड्रीवाल, जो कि वर्तमान में जर्जर स्थिति में है। उसे कराने के लिए बड़े बजट की जरूरत थी। इस बजट को पर्यटन विभाग से प्राप्त करने के लिए अधिकारियों ने बात भी की। इसके बाद फिर से मामला फाइलों में दफन हो गया था।
वन चेतना केंद्र का विकास कराया जाएगा। मैनपुरी के लोगों के लिए यह एक अच्छा पर्यटन स्थल होगा। संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ जल्द इस संबंध में बैठक की जाएगी।
- अंजनी कुमार सिंह, डीएम