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Agra News: बडे़ भाई की मौत का सदमा नहीं सह पाए धनीराम
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मृतक धनीराम
- फोटो : फाइल
भोगांव। रक्षाबंधन से एक दिन पहले गांव जगतपुर में दो सगे भाइयों की मौत से शोक की लहर दौड़ गई। कैंसर पीड़ित भाई की मौत की सूचना मिलने के चार घंटे बाद ही छोटे भाई ने भी दम तोड़ दिया। दोनों की अर्थी एक साथ उठी तो ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।
गांव जगतपुर के रहने वाले 62 वर्षीय किसान रामफेरे कश्यप कैंसर से पीड़ित थे। उनका इलाज दिल्ली के एक अस्पताल से चल रहा था। कुछ दिन पहले ही परिजन उन्हें लेकर गांव आए थे। शुक्रवार की तड़के करीब तीन बजे रामफेरे की मौत हो गई। बड़े भाई की मौत की खबर जब 54 वर्षीय धनीराम कश्यप को हुई तो वह बदहवास हो गए। उन्हें इतना सदमा लगा कि वह घर के एक कोने में जाकर बैठ गए। सुबह करीब सात बजे धनीराम की भी सांसें छूट गईं। महज चार घंटे में दो सगे भाइयों की मौत के बाद घर में मातम छा गया। दोनों भाइयों की अर्थियां घर से एक साथ उठीं तो सभी की आंखें नम हो गईं।
पांच भाई, मगर नहीं टूटी संयुक्त परिवार की परंपरा
रामफेरे पांच भाइयों में दूसरे नंबर के थे वहीं धनीराम सबसे छोटे थे। दोनों भाइयों के बीच अपार प्रेम था। अन्य भाई भी एक दूसरे का हमेशा साथ देते थे। सभी भाइयों की शादियां हुईं, परिवार बढे। मगर, संयुक्त परिवार की परंपरा नहीं टूटी। ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी धनीराम और रामफेरे के बीच झगड़ा नहीं हुआ।
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ट्रेन हादसे में धनीराम ने गवां दिया था पैर
सगे भाई धनीराम और रामफेरे की मौत के साथ ही भाइयों के बीच प्रेम की चर्चा हो रही है। परिजन ने बताया कि वर्ष 2018 में हुए ट्रेन हादसे में धनीराम का एक पैर कट गया था। तभी से रामफेरे छोटे भाई के लिए परेशान रहते थे।
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गांव जगतपुर के रहने वाले 62 वर्षीय किसान रामफेरे कश्यप कैंसर से पीड़ित थे। उनका इलाज दिल्ली के एक अस्पताल से चल रहा था। कुछ दिन पहले ही परिजन उन्हें लेकर गांव आए थे। शुक्रवार की तड़के करीब तीन बजे रामफेरे की मौत हो गई। बड़े भाई की मौत की खबर जब 54 वर्षीय धनीराम कश्यप को हुई तो वह बदहवास हो गए। उन्हें इतना सदमा लगा कि वह घर के एक कोने में जाकर बैठ गए। सुबह करीब सात बजे धनीराम की भी सांसें छूट गईं। महज चार घंटे में दो सगे भाइयों की मौत के बाद घर में मातम छा गया। दोनों भाइयों की अर्थियां घर से एक साथ उठीं तो सभी की आंखें नम हो गईं।
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पांच भाई, मगर नहीं टूटी संयुक्त परिवार की परंपरा
रामफेरे पांच भाइयों में दूसरे नंबर के थे वहीं धनीराम सबसे छोटे थे। दोनों भाइयों के बीच अपार प्रेम था। अन्य भाई भी एक दूसरे का हमेशा साथ देते थे। सभी भाइयों की शादियां हुईं, परिवार बढे। मगर, संयुक्त परिवार की परंपरा नहीं टूटी। ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी धनीराम और रामफेरे के बीच झगड़ा नहीं हुआ।
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ट्रेन हादसे में धनीराम ने गवां दिया था पैर
सगे भाई धनीराम और रामफेरे की मौत के साथ ही भाइयों के बीच प्रेम की चर्चा हो रही है। परिजन ने बताया कि वर्ष 2018 में हुए ट्रेन हादसे में धनीराम का एक पैर कट गया था। तभी से रामफेरे छोटे भाई के लिए परेशान रहते थे।