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ऐतिहासिक इमारतों को नहीं मिला संरक्षण
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मार्कंडेय ऋषि मंदिर।
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। जिले में ऐतिहासिक इमारतें सरकारी उदासीनता का शिकार हैं। कई ऐतिहासिक और पौराणिक इमारतों को पुरातत्व विभाग का अब तक संरक्षण नहीं मिल पाया है। इनमें कई ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल हैं जिनको संरक्षित किए जाने की कई बार मांग उठी है। हर बार इस मांग की अनदेखी की गई है।
संरक्षण नहीं मिल पाने से इन इमारतों और स्थलों का सही तरीके से रखरखाव भी नहीं हो पा रहा है। पर्यटन के नक्शे पर जिले की तस्वीर नहीं बन पा रही है। लोगों का मानना है अगर ऐतिहासिक इमारतों और स्थलों को पुरातत्व विभाग का संरक्षण मिले, पर्यटन विभाग इनका प्रचार करे तो पर्यटक उन्हें देखने आएंगे। इससे जिले में कई रोजगारों को भी बढ़ावा मिलेगा।
औंछा में है ऋषि-मुनियों की तपोस्थली
प्राचीन काल में औंछा क्षेत्र ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है। च्यवन ऋषि आश्रम, अजोम कुंड की पुरातन मान्यता है। आश्रम को च्यवन ऋषि की तपोस्थली कहा जाता हैँ। औंछा क्षेत्र में कई पुराने टीले, प्राचीन मंदिर और आश्रम पौराणिक महत्व की गवाही देते हैं। क्षेत्र में खुदाई केे दौरान आएदिन खंडित प्राचीन प्रतिमाएं निकालती हैं। पांच साल पहले आगरा पुरातत्व विभाग की टीम ने आकर सर्वे करने के बाद ऐसे स्थानों को संरक्षित किए जाने की बात कहते हुए संस्तुति की थी।
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विधूना क्षेत्र का पौराणिक महत्व
घिरोर क्षेत्र के मार्कंडेय विधूना का पौराणिक महत्व है। वहां के खंडहर आज भी इतिहास की याद दिलाते हैं। मार्कडेय को सभी देवताओं का भांजा भी कहा जाता है। मान्यता है अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इसी स्थान पर समय बिताया था। मार्कडेंय विधूना के टीले, मंदिर, खंडहर आज भी लोगों के बीच आस्था के प्रतीक हैं। इस स्थान पर दीपावली के बाद हर साल मेला भी लगता है।
उपेक्षा का शिकार तेजसिंह किला
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुए आंदोलन में जिले का योगदान रहा है। शहर के बीच स्थित महाराजा तेजसिंह किला आज भी आजादी आंदोलन की निशानी है। किले की पीछे की दीवार आज भी अंग्रेजों के आतंक की याद दिलाती है। अब किले की देखरेख महाराजा तेजसिंह के रिश्तेदार अरविंद कुमार सिंह करते हैं। संरक्षण नहीं होने के कारण किला जर्जर होता जा रहा है।
शासन में दबी मंत्री की आवाज
राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली प्रदेश की भाजपा सरकार में पर्यटन मंत्री रहे अशोक यादव ने जिले को पर्यटन के नक्शे पर लाने का प्रस्ताव शासन में दिया था। उनकी आवाज उनकी ही सरकार में दब गई। आज तक पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
जिले में कई पौराणिक, ऐतिहासिक इमारतें और स्थल हैं। इनका पुराने अभिलेखों से पता चलता है। पुरातत्व विभाग का संरक्षण मिलने के बाद पर्यटन को बढ़ावा मिलने की अपार संभावनाएं हैं। शासन स्तर पर इसका प्रयास होना चाहिए।
-श्रीकृष्ण मिश्र, साहित्यकार
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संरक्षण नहीं मिल पाने से इन इमारतों और स्थलों का सही तरीके से रखरखाव भी नहीं हो पा रहा है। पर्यटन के नक्शे पर जिले की तस्वीर नहीं बन पा रही है। लोगों का मानना है अगर ऐतिहासिक इमारतों और स्थलों को पुरातत्व विभाग का संरक्षण मिले, पर्यटन विभाग इनका प्रचार करे तो पर्यटक उन्हें देखने आएंगे। इससे जिले में कई रोजगारों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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औंछा में है ऋषि-मुनियों की तपोस्थली
प्राचीन काल में औंछा क्षेत्र ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है। च्यवन ऋषि आश्रम, अजोम कुंड की पुरातन मान्यता है। आश्रम को च्यवन ऋषि की तपोस्थली कहा जाता हैँ। औंछा क्षेत्र में कई पुराने टीले, प्राचीन मंदिर और आश्रम पौराणिक महत्व की गवाही देते हैं। क्षेत्र में खुदाई केे दौरान आएदिन खंडित प्राचीन प्रतिमाएं निकालती हैं। पांच साल पहले आगरा पुरातत्व विभाग की टीम ने आकर सर्वे करने के बाद ऐसे स्थानों को संरक्षित किए जाने की बात कहते हुए संस्तुति की थी।
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विधूना क्षेत्र का पौराणिक महत्व
घिरोर क्षेत्र के मार्कंडेय विधूना का पौराणिक महत्व है। वहां के खंडहर आज भी इतिहास की याद दिलाते हैं। मार्कडेय को सभी देवताओं का भांजा भी कहा जाता है। मान्यता है अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इसी स्थान पर समय बिताया था। मार्कडेंय विधूना के टीले, मंदिर, खंडहर आज भी लोगों के बीच आस्था के प्रतीक हैं। इस स्थान पर दीपावली के बाद हर साल मेला भी लगता है।
उपेक्षा का शिकार तेजसिंह किला
ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुए आंदोलन में जिले का योगदान रहा है। शहर के बीच स्थित महाराजा तेजसिंह किला आज भी आजादी आंदोलन की निशानी है। किले की पीछे की दीवार आज भी अंग्रेजों के आतंक की याद दिलाती है। अब किले की देखरेख महाराजा तेजसिंह के रिश्तेदार अरविंद कुमार सिंह करते हैं। संरक्षण नहीं होने के कारण किला जर्जर होता जा रहा है।
शासन में दबी मंत्री की आवाज
राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली प्रदेश की भाजपा सरकार में पर्यटन मंत्री रहे अशोक यादव ने जिले को पर्यटन के नक्शे पर लाने का प्रस्ताव शासन में दिया था। उनकी आवाज उनकी ही सरकार में दब गई। आज तक पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
जिले में कई पौराणिक, ऐतिहासिक इमारतें और स्थल हैं। इनका पुराने अभिलेखों से पता चलता है। पुरातत्व विभाग का संरक्षण मिलने के बाद पर्यटन को बढ़ावा मिलने की अपार संभावनाएं हैं। शासन स्तर पर इसका प्रयास होना चाहिए।
-श्रीकृष्ण मिश्र, साहित्यकार