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बर्थडे स्पेशल: शैलेंद्र से कह रहीं मथुरा की गलियां, कहीं तो मिलोगे तो पूछेंगे हाल
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 30 Aug 2017 03:44 PM IST
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गीतकार शैलेंद्र मार्ग
- फोटो : अमर उजाला
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भगवान कृष्ण की नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले मथुरा की एक पहचान हिंदी फिल्मों के महान गीतकार शैलेंद्र भी हैं। ‘आज फिर जीने की तमन्ना है...’, मेरा जूता है जापानी..., आवारा हूं... जैसे हिंदी फिल्मों के मशहूर नगमों की रचना करने वाले शैलेंद्र मथुरा की ही गलियों में खेले और बड़े हुए थे।
मथुरा के धौली प्याऊ स्थित में गीतकार शैलेंद्र मार्ग (पहले गली गंगा सिंह) पर वो मकान, जहां उनका बचपन बीता आज भी उन्हें याद करता है। इसके साथ ही हर 30 अगस्त को उनके जन्मदिन पर मथुरा के लोग शैलेंद्र के ही एक नगमे 'छोटी सी है दुनिया, पहचाने रास्ते हैं, कहीं तो मिलोगे तो पूछेंगे हाल' गाकर उन्हें आज भी याद करते हैं।
बता दें कि शैलेंद्र का जन्म पंजाब के रावलपिंडी (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। शैलेंद्र उनका पेन नेम था। असली नाम शंकरदास केसरीलाल था। शैलेंद्र ने करीब 117 फिल्मों में 800 से अधिक गीत लिखे। जीवन के महज 43 बसंत देखने के बाद ही वो दुनिया से चल बसे।
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मथुरा में पले और बढ़े शैलेंद्र ने यहीं के राजकीय इंटर कॉलेज से हाईस्कूल किया और केआर इंटर कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास की। कविता का पहला पाठ भी उन्होंने मथुरा में ही सीखा। इसके बाद उन्होंने वर्कशॉप में बेल्डिंग करने की नौकरी कर ली।
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मथुरा के धौली प्याऊ स्थित में गीतकार शैलेंद्र मार्ग (पहले गली गंगा सिंह) पर वो मकान, जहां उनका बचपन बीता आज भी उन्हें याद करता है। इसके साथ ही हर 30 अगस्त को उनके जन्मदिन पर मथुरा के लोग शैलेंद्र के ही एक नगमे 'छोटी सी है दुनिया, पहचाने रास्ते हैं, कहीं तो मिलोगे तो पूछेंगे हाल' गाकर उन्हें आज भी याद करते हैं।
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बता दें कि शैलेंद्र का जन्म पंजाब के रावलपिंडी (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। शैलेंद्र उनका पेन नेम था। असली नाम शंकरदास केसरीलाल था। शैलेंद्र ने करीब 117 फिल्मों में 800 से अधिक गीत लिखे। जीवन के महज 43 बसंत देखने के बाद ही वो दुनिया से चल बसे।
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मथुरा में पले और बढ़े शैलेंद्र ने यहीं के राजकीय इंटर कॉलेज से हाईस्कूल किया और केआर इंटर कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास की। कविता का पहला पाठ भी उन्होंने मथुरा में ही सीखा। इसके बाद उन्होंने वर्कशॉप में बेल्डिंग करने की नौकरी कर ली।
शैलेंद्र के नाम पर पुरस्कार
मकान जहां शैलेंद्र रहते थे
- फोटो : अमर उजाला
जन सांस्कृतिक मंच के प्रयासों से उनकी स्मृति शेषों को बचाने की पहल की जा रही है। धौलीप्याऊ पर उनके घर को जाने वाले मार्ग का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया है। मंच के अध्यक्ष डा. अशोक बंसल ने बताया निर्णय लिया गया है कि शैलेंद्र के नाम पर केआर इंटर कॉलेज में प्रथम आने वाले छात्र को हर साल सिल्वर का मेडल प्रदान किया जाएगा।