आस्था या अंधविश्वास: बटेश्वर में नंदी पी रहे दूध, शिवालय में लगी कतार, एडीजे भी पहुंचे
आस्था कहें या अंधविश्वास, बटेश्वर में शिवालय पर भक्तों की लंबी कतार लगी हुई है। ये भीड़ उमड़ी है भगवान शिव की सवारी नंदी को दूध पिलाने के लिए। इतना ही नहीं एडीजे भी पत्नी के साथ शिवालय पहुंच गए और नंदी को दूध पिलाया।
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नंदी की मूर्ति के दूध पीने की अफवाह पर रविवार को लोग मंदिरों की ओर दौड़ पडे़। बटेश्वर में नंदी को दूध पिलाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ दिखी। यहां पर भोलेनाथ के दर्शन पूजन के लिए पहुंचे एडीजे प्रदीप शर्मा भी खुद को पत्नी संग नंदी की मूर्ति को दूध पिलाने से नहीं रोक सके।
लगी हुई है भक्तों की भीड़
ब्रह्मलाल जी मंदिर के पुजारी राकेश वाजपेयी ने बताया कि शनिवार की रात से नंदी के दूध पीने की चर्चा शुरू हुई थी। बटेश्वर के कुंदन रात में ही नंदी को दूध पिलाने के लिए मंदिर पर पहुंचे। रविवार की सुबह से ही श्रद्धालुओं का बटेश्वर में नंदी को दूध पिलाने के लिए तांता लगा हुआ है। लोग लोटा, चम्मच से नंदी को दूध पिलाते नजर आए।
बटेश्वर में सोनपाल, रामबरन, श्याम शर्मा, उत्तम दुबे, हजारी लाल, संगीता, किरन देवी, मोनल, मीनाक्षी, सरिता देवी आदि का दावा था कि उनके हाथ से नंदी ने दूध पीया है। है। वहीं बिजौली, जरार, पुरा कनैरा, बासौनी, बाह, जैतपुर आदि गांवों के लोग कटोरी में दूध लेकर इकट्ठा हो गए। सबने बारी-बारी से चम्मच से भरा दूध मूर्ति के मुख के सामने लगाया और दावा किया कि नंदी की मूर्ति ने दूध पीया है।
ये चमत्कार नहीं है, पृष्ठ तनाव के कारण होता है
ऑर्गेनाइजेशन फॉर साइंटिफिक इनोवेशन एंड रिसर्च के प्रबंध निदेशक डॉ. मनीष भारद्वाज ने बताया कि नंदी की मूर्ति का दूध, पानी या कोई तरल पदार्थ पीना कोई चमत्कार नहीं है। यह पृष्ठ तनाव (सरफेस टेंशन) और केशकीय बल (केपलरी फोर्स) की वजह से होना आम बात है।
नीम के पेड़ से दूध की धार निकलने की भी अफवाह
थाना पिढ़ौरा क्षेत्र के गांव गोपालपुरा के समीप स्थित भूमिया बाबा के मंदिर के समीप लगे एक नीम के पेड़ से सफेद झाग जैसा निकल रहा है। गांव के देवकांत त्यागी आदि ने बताया कि इस दूध की धार निकलना मानकर लोग पूजा करने लगे हैं।