अमर उजाला पड़ताल: आगरा के केके नगर में छतों के ऊपर दौड़ रहा करंट... खतरे में जिंदगियां
बीते एक साल में 17 विद्युत हादसे हो चुके हैं। जिनमें 4 व्यक्तियों और 12 पशुओं की मौत हो गई। पीड़ितों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा के केके नगर स्थित उमाकुंज में 250 से अधिक जिंदगियों के सिर पर हर वक्त करंट लगने का खतरा मंडराता रहता है। घरों की छतों पर बिजली के जर्जर तार झूल रहे हैं। गलियों में केबलें लटकी हैं। दीवारों से चिपके बिजली के खंभों से बरसात में अर्थिंग आती है। गली नंबर तीन में 60 से अधिक परिवार घरों में छतों पर जाने से डरते हैं।
शुक्रवार रात बारिश के दौरान सदर क्षेत्र में हुए हादसे के बाद यह डर और बढ़ गया है। यहां बारिश में टूटे बिजली के तार से करंट लगने से पिता-पुत्र की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे के लिए स्थानीय लोगों ने बिजली कंपनी और नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया। लोगों का कहना था कि अफसरों की लापरवारी के का करण यह हादसा हुआ है। मामले में मुकदमा भी दर्ज कराया गया।
बाईंपुर वार्ड की घनी आबादी में आने वाले केके नगर, गणपति विहार, शिवा कुंज, उमाकुंज समेत छह कॉलोनियों में बिजली विभाग की लापरवाही किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। उमाकुंज निवासी रामहेत दिवाकर ने बताया कि पिछले एक महीने में तीन लोग विद्युत दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। उनकी पांच साल की नातिनी को करंट लग चुका है। गनीमत है कि उसकी जान बच गई। 75 वर्षीय मिठ्ठनलाल ने बताया कि कोई रिश्तेदार अगर घर आता है तो उसे छत पर जाने नहीं देते।
शहर से देहात तक बीते एक साल में 17 विद्युत हादसे हो चुके हैं। जिनमें 4 व्यक्तियों और 12 पशुओं की मौत हो गई। स्ट्रीट लाइट के खंभों की चपेट में आकर करंट से हुई मौतों की जांच अधूरी है। पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिल सका।
पृथ्वीनाथ फाटक पर स्ट्रीट लाइट के खंभे से चिपककर युवक की मौत हो गई। वजीरपुरा में होली वाले तिराहे पर गाय ने करंट की चपेट में आने से दम तोड़ा। इन मामलों में नगर निगम के सहायक अभियंता को बयान दर्ज कराने हैं लेकिन एक साल से जांच अधर में लटकी है। जबकि मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश है कि विद्युत हादसों में तत्काल जांच कर पीड़ितों को तत्काल मुआवजा दिलाया जाए।
'हम कहां से लाएं पैसा '
उमाकुंज के कमलेश का कहना है कि एक साल से खंभों को हटवाने के लिए प्रार्थनापत्र दे रहे हैं। कोई सुनवाई नहीं हुई। बिजली विभाग के इंजीनियर खंभों को शिफ्ट करने के नाम पर एक-एक लाख रुपये मांगते हैं। हम मजदूर लोग हैं, कहां से लाएं इतना पैसा।
पांच साल से सुनवाई नहीं
मोहित कुमार ने कहा कि बिजली के तार छतों पर झूल रहे हैं। इन्हें हटवाने के लिए पांच साल से बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं, कोई सुनवाई नहीं होती। इंजीनियर कहते हैं, जमीन खरीदने से पहले क्यों नहीं सोचा कि ऊपर बिजली की लाइन है।
सिकंदरा विद्युत खंड के एसडीओ राजकुमार ने कहा कि उमाकुंज का मामला संज्ञान में आया है। वहां से बिजली की लाइन को शिफ्ट करना पड़ेगा। पिछले साल एस्टीमेट बनाकर दिए थे। विभाग को भी एस्टीमेट भेजे हैं, लेकिन विभाग बिजली लाइनों की शिफ्टिंग नहीं करता। फिर भी मैं दोबारा मौका-मुआयना करवा लेता हूं।
डीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक अमित किशोर ने कहा कि इस तरह का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। आपने बताया है तो मौके पर जांच कराई जाएगी। लाइनों की शिफ्टिंग क्षेत्रीय लोगों को अपने खर्चे पर करानी होगी।