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Agra News: हत्या के दोषी दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास
Sat, 18 Jan 2025 11:21 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sat, 18 Jan 2025 11:21 PM IST
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मैनपुरी। भोगांव थाने में दर्ज 16 वर्ष पुराने हत्याकांड में शनिवार को एडीजे-3 राकेश पटेल की कोर्ट से दोषी दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया है। जुर्माना राशि में से 80 प्रतिशत पीड़ित पक्ष को अदा करनी होगी। दोषियों ने 2008 में एक युवक की पुरानी रंजिश में हत्या कर दी थी।
घटना 16 सितंबर 2008 को हुई थी। 19 सितंबर को मृतक के भाई राजपाल पुत्र हवलदार सिंह निवासी आलीपुर पट्टी, भोगांव की ओर से थाने पर मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप लगाया कि उनके भाई ओमशरण की हत्या तीन सगे भाई चंद्रकांत दीक्षित, कृष्णकांत दीक्षित, लक्ष्मीकांत दीक्षित और कृष्णकांत के बेटे विवेकेंद्र और लक्ष्मीकांत के बेटे रिंकू निवासीगण आलीपुर पट्टी, भोगांव ने की। दरअसल चंद्रकांत के नाती की हत्या में प्रचलित मुकदमे में बतौर आरोपी ओमशरण एक तारीख 16 सितंबर को दीवानी गया था। वहां विपक्षियों की ओर से उसे धमकाया गया था। इसके बाद उसी दिन शाम को आलीपुर रोड स्थित नहर पर झाल के पुल पर होमशरण को घर लौटते वक्त आरोपियों ने घेर लिया। उसे बंदूक की बटों से पीटा। इसके बाद गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को नहर में फेंक दिया। इस घटना को ओमशरण के भतीजे राहुल ने अपनी आंखों ने देखा। पुलिस ने मुकदमे में विवेचना की। इसके बाद लक्ष्मीकांत और चंद्रकांत के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। अन्य अभियुक्तों को मुकदमे से निकाल दिया।
इन दोनों के खिलाफ एडीजे-3 राकेश पटेल की कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से पुष्पेंद्र दुबे ने साक्ष्य और गवाह पेश किए। कोर्ट ने दोनों साक्ष्यों और गवाही के आधार पर दोनों को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
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घटना 16 सितंबर 2008 को हुई थी। 19 सितंबर को मृतक के भाई राजपाल पुत्र हवलदार सिंह निवासी आलीपुर पट्टी, भोगांव की ओर से थाने पर मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप लगाया कि उनके भाई ओमशरण की हत्या तीन सगे भाई चंद्रकांत दीक्षित, कृष्णकांत दीक्षित, लक्ष्मीकांत दीक्षित और कृष्णकांत के बेटे विवेकेंद्र और लक्ष्मीकांत के बेटे रिंकू निवासीगण आलीपुर पट्टी, भोगांव ने की। दरअसल चंद्रकांत के नाती की हत्या में प्रचलित मुकदमे में बतौर आरोपी ओमशरण एक तारीख 16 सितंबर को दीवानी गया था। वहां विपक्षियों की ओर से उसे धमकाया गया था। इसके बाद उसी दिन शाम को आलीपुर रोड स्थित नहर पर झाल के पुल पर होमशरण को घर लौटते वक्त आरोपियों ने घेर लिया। उसे बंदूक की बटों से पीटा। इसके बाद गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को नहर में फेंक दिया। इस घटना को ओमशरण के भतीजे राहुल ने अपनी आंखों ने देखा। पुलिस ने मुकदमे में विवेचना की। इसके बाद लक्ष्मीकांत और चंद्रकांत के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। अन्य अभियुक्तों को मुकदमे से निकाल दिया।
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इन दोनों के खिलाफ एडीजे-3 राकेश पटेल की कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से पुष्पेंद्र दुबे ने साक्ष्य और गवाह पेश किए। कोर्ट ने दोनों साक्ष्यों और गवाही के आधार पर दोनों को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
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