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गीत गाते चलो पग बढ़ाते चलो, शान भारत की हिंदी बनाते चलो..
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मैनपुरी। जिले के गांव मुड़ई निवासी कवि श्रीचंद्र वर्मा एडवोकेट हिंदी के उत्थान के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनके द्वारा तुलसीदास की तर्ज पर आध्यात्मिक क्षेत्र में दोहा के साथ काव्य पाठ किया जा रहा है। आध्यात्मिक क्षेत्र में काव्य रचनाओं के लिए उन्हें प्रदेश के कई मंचों से पुरस्कार भी मिले हैं। गीत गाते चलो पग बढ़ाते चलो, शान भारत की हिंदी बनाते चलो, उनका यह गीत लोगों की पसंद है।
कवि श्रीचंद्र वर्मा का जन्म दो जुलाई सन 1852 को जनपद के गांव मुड़ई में लालमनि वर्मा के यहां हुआ था। माता का नाम क्षेमकली था। उन्होंने स्नातक करने के बाद वकालत की डिग्री हासिल की। बचपन से ही उन्हें हिंदी साहित्य में रुचि थी। अधिवक्ता बनने के बाद भी उन्होंने हिंदी के उत्थान के लिए कार्य करना जारी रखा। जब भी समय मिलता वे हिंदी साहित्यक सम्मेलनों में भाग लेते और रचनाओं को प्रस्तुत करते। आध्यात्मिक क्षेत्र में उनकी रचनाओं को देखते हुए उन्हें विसरिया शिक्षा एवं सेवा समिति लखनऊ द्वारा साहित्य गौरव मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। वह जनपद के साथ लखनऊ और दिल्ली में भी कविता पाठ कर चुके हैं। उनके दोहा और छंद लोगों को हिंदी के क्षेत्र में भागेदारी के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी रचनाएं कई पत्र और पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
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प्रमुख रचनाएं
-श्रीचंद दोहावली
- तुलसी तरंग खंड काव्य
-गीत गाते चलो पग बढ़ाते चलो
-मां इस दुनियां में तू नहीं
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प्राप्त पुरस्कार
- भारतीय भाषा प्रतिष्ठापन राष्ट्रीय परिषद मुंबई और करनाल द्वारा साहित्य गौरव मानद उपाधि
- विसरिया शिक्षा एवं सेवा समिति लखनऊ द्वारा आध्यात्मिक साहित्य गौरव मानद उपाधि
- अखिल भारतीय साहित्य संस्था प्रेरणा परिवार पुवायां शाहजहांपुर द्वारा छंद रत्न सम्मान
-उत्कृष्ट प्रकाशन मेरठ द्वारा हिंदी साहित्य गौरव सम्मान
-सरस्वती साधना परिषद मैनपुरी द्वारा विश्वनाथ प्रसाद हजेला पुरस्कार
-हिंदी लाओ देश बचाओ समारोह मैनपुरी द्वारा हिंदी साहित्य भूषण की मानद उपाधि
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कवि श्रीचंद्र वर्मा का जन्म दो जुलाई सन 1852 को जनपद के गांव मुड़ई में लालमनि वर्मा के यहां हुआ था। माता का नाम क्षेमकली था। उन्होंने स्नातक करने के बाद वकालत की डिग्री हासिल की। बचपन से ही उन्हें हिंदी साहित्य में रुचि थी। अधिवक्ता बनने के बाद भी उन्होंने हिंदी के उत्थान के लिए कार्य करना जारी रखा। जब भी समय मिलता वे हिंदी साहित्यक सम्मेलनों में भाग लेते और रचनाओं को प्रस्तुत करते। आध्यात्मिक क्षेत्र में उनकी रचनाओं को देखते हुए उन्हें विसरिया शिक्षा एवं सेवा समिति लखनऊ द्वारा साहित्य गौरव मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। वह जनपद के साथ लखनऊ और दिल्ली में भी कविता पाठ कर चुके हैं। उनके दोहा और छंद लोगों को हिंदी के क्षेत्र में भागेदारी के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी रचनाएं कई पत्र और पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
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प्रमुख रचनाएं
-श्रीचंद दोहावली
- तुलसी तरंग खंड काव्य
-गीत गाते चलो पग बढ़ाते चलो
-मां इस दुनियां में तू नहीं
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प्राप्त पुरस्कार
- भारतीय भाषा प्रतिष्ठापन राष्ट्रीय परिषद मुंबई और करनाल द्वारा साहित्य गौरव मानद उपाधि
- विसरिया शिक्षा एवं सेवा समिति लखनऊ द्वारा आध्यात्मिक साहित्य गौरव मानद उपाधि
- अखिल भारतीय साहित्य संस्था प्रेरणा परिवार पुवायां शाहजहांपुर द्वारा छंद रत्न सम्मान
-उत्कृष्ट प्रकाशन मेरठ द्वारा हिंदी साहित्य गौरव सम्मान
-सरस्वती साधना परिषद मैनपुरी द्वारा विश्वनाथ प्रसाद हजेला पुरस्कार
-हिंदी लाओ देश बचाओ समारोह मैनपुरी द्वारा हिंदी साहित्य भूषण की मानद उपाधि