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वृंदावन से ही सीख लीजिए ट्रैफिक मैनेजमेंट
ब्यूरो, अमर उजाला, आगरा
Updated Sun, 24 Jan 2016 12:53 AM IST
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वीकएंड पर सैलानियों का सैलाब। बेतरतीब ट्रैफिक और नतीजा जाम। आगरा और वृंदावन की यह समस्याएं एक जैसी हैं, लेकिन वृंदावन ने वीकएंड और छुट्टियों पर सैलाब के कारण जाम से निपटने के लिए प्लान बनाया जो दो सप्ताह से सफल रहा है। वृंदावन में शनिवार को नए प्लान के लागू होने से जाम नहीं लगा, जबकि आगरा अभी ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान के इंतजार में है। फ्लॉप हो चुके ट्रैफिक के प्रयोगों के बाद लोगों ने डीएम से अपील की है कि कम से कम वृंदावन की तरह ही आगरा को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए कुछ तो करें।
ताजमहल पर वीकएंड में शनिवार को करीब 90 हजार तो रविवार को 80 हजार से ज्यादा सैलानी उमड़ते हैं। यमुना एक्सप्रेस वे से अधिकांश ट्रैफिक आने के कारण यमुना किनारा रोड पर हाथी घाट से लेकर ताजमहल पश्चिमी गेट पार्किंग तक जाम लग जाता है। पिछले एक साल से हर शनिवार-रविवार यही हो रहा है, लेकिन पुलिस ऐसे प्रयोग करती रही जो हर सप्ताह फ्लॉप ही साबित होते रहे हैं। वाहनों की भीड़ का आलम ये कि पश्चिमी गेट पार्किंग से यमुना किनारा पर हाथीघाट रेलवे पुल तक सड़क के दोनों किनारों पर कारें ही पार्क की जाती हैं। इसका नतीजा ये कि यमुना किनारा का पूरा ट्रैफिक जीवनी मंडी से ही पालीवाल पार्क होते हुए एमजी रोड पर डायवर्ट होने लगता है। इससे एमजी रोड और पालीवाल पार्क के साथ हरीपर्वत पर जाम लगता है। वृंदावन की तरह स्थानीय प्रशासन पार्किंग के लिए न तो जगह उपलब्ध करा सका और न ही कोई मैनेजमेंट प्लान ही बना सका है।
रोजगार भी, जाम से मुक्ति भी
वृंदावन में तीन जगहों पर पार्किंग बनाने के बाद कस्बे तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को रिक्शा, ऑटो, टेंपो ट्रेवलर उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशासन ने इसके लिए रेट लिस्ट भी तय की है और तय संख्या में ही ऑटो, रिक्शा चलाने की अनुमति दी है। इससे वृंदावन के लोगों को रोजगार भी मिला और जाम से मुक्ति भी। पार्किंग स्थलों से मंदिरों तक जाने के दौरान पर्यटक भी पूरी तल्लीनता से नजारे ले रहे हैं और तसल्ली से मंदिरों के दर्शन भी कर पा रहे हैं। वृंदावन में पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने नए प्लान की सराहना की है, जबकि आगरा में प्रशासन इस बारे में अब तक कुछ सोच ही नहीं सका। पद संभालने के समय डीएम से लेकर कमिश्नर और एसएसपी से लेकर आईजी तक ट्रैफिक मैनेजमेंट को अपनी प्राथमिकता बताते हैं, लेकिन जाम से मुक्ति दिलाने के कारगर कदम कोई न उठा सका।
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ताजमहल पर वीकएंड में शनिवार को करीब 90 हजार तो रविवार को 80 हजार से ज्यादा सैलानी उमड़ते हैं। यमुना एक्सप्रेस वे से अधिकांश ट्रैफिक आने के कारण यमुना किनारा रोड पर हाथी घाट से लेकर ताजमहल पश्चिमी गेट पार्किंग तक जाम लग जाता है। पिछले एक साल से हर शनिवार-रविवार यही हो रहा है, लेकिन पुलिस ऐसे प्रयोग करती रही जो हर सप्ताह फ्लॉप ही साबित होते रहे हैं। वाहनों की भीड़ का आलम ये कि पश्चिमी गेट पार्किंग से यमुना किनारा पर हाथीघाट रेलवे पुल तक सड़क के दोनों किनारों पर कारें ही पार्क की जाती हैं। इसका नतीजा ये कि यमुना किनारा का पूरा ट्रैफिक जीवनी मंडी से ही पालीवाल पार्क होते हुए एमजी रोड पर डायवर्ट होने लगता है। इससे एमजी रोड और पालीवाल पार्क के साथ हरीपर्वत पर जाम लगता है। वृंदावन की तरह स्थानीय प्रशासन पार्किंग के लिए न तो जगह उपलब्ध करा सका और न ही कोई मैनेजमेंट प्लान ही बना सका है।
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रोजगार भी, जाम से मुक्ति भी
वृंदावन में तीन जगहों पर पार्किंग बनाने के बाद कस्बे तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को रिक्शा, ऑटो, टेंपो ट्रेवलर उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशासन ने इसके लिए रेट लिस्ट भी तय की है और तय संख्या में ही ऑटो, रिक्शा चलाने की अनुमति दी है। इससे वृंदावन के लोगों को रोजगार भी मिला और जाम से मुक्ति भी। पार्किंग स्थलों से मंदिरों तक जाने के दौरान पर्यटक भी पूरी तल्लीनता से नजारे ले रहे हैं और तसल्ली से मंदिरों के दर्शन भी कर पा रहे हैं। वृंदावन में पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने नए प्लान की सराहना की है, जबकि आगरा में प्रशासन इस बारे में अब तक कुछ सोच ही नहीं सका। पद संभालने के समय डीएम से लेकर कमिश्नर और एसएसपी से लेकर आईजी तक ट्रैफिक मैनेजमेंट को अपनी प्राथमिकता बताते हैं, लेकिन जाम से मुक्ति दिलाने के कारगर कदम कोई न उठा सका।
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