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आगरा में चमड़े के जूते को मिला जीआई टैग: दुनिया में बढ़ेगी धमक, उद्योग में आएगी चमक; दिखीं नई उम्मीदें

Wed, 09 Aug 2023 03:52 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Wed, 09 Aug 2023 03:52 PM IST
सार

आगरा में चमड़े के जूते को जीआई टैग मिलने से दुनिया में इसकी धमक बढ़ेगी। उद्योग में चमक भी आएगी। इससे कारोबारियों में नई उम्मीदें जगी हैं। 

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Leather shoes made in Agra get GI tag
Agra: जूता मंडी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में बनने वाले चमड़े के जूते को जीआई टैग मिलने से दुनिया में आगरा की धमक बढ़ेगी। जूता उद्योग को नई चमक मिलेगी। कारोबारी, उद्यमी और संगठनों में खुशी की लहर है। कारोबार में नई उम्मीद जागी हैं। आगरा में बड़े पैमाने पर चमड़े के जूता का निर्माण होता है।

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आगरा में जूता बनाने की कला मुगलकाल से शुरू हुई। 500 साल में चमड़ा शोधन से लेकर निर्माण में आगरा के जूते ने नए आयाम स्थापित किए। वर्तमान में करीब 25 हजार करोड़ रुपये का कारोबार है। जिसमें 4 से 5 हजार करोड़ रुपये सालाना निर्यात होता है। यूरोप सहित दुनियाभर के देशों में आगरा के जूते की खास पहचान है। पांच लाख से अधिक लोग जूता निर्माण से जुड़े हुए हैं। जीआई टैग मिलने से अब आगरा के जूते को दुनियाभर में अलग स्थान मिलेगा।
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कहीं और नहीं बन सकेगा चमड़े का जूता

अब आगरा लेदर फुटवियर के नाम पर चमड़े के जूतों को जिले से बाहर कहीं और नहीं बनाया जा सकेगा। न जीआई टैग के साथ बेचा जा सकेगा। यह कानूनी अधिकार सिर्फ आगरा के जूता निर्माताओं और शिल्पियों को मिला है। बड़ी सफलता है। -डॉ. रजनीकांत, पद्यमश्री व जीआई विशेषज्ञ

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विश्वि की फुटविर कैपिटल बनेगा आगरा

चमड़े के जूते के लिए नई योजनाएं शुरू होंगी। आर्थिक सहयोग मिलेगा। देश ही नहीं विदेशों में विशेष प्रदर्शनियां लगेंगी। विकास के लिए नया कानूनी रास्ता खुल गया है। अब निश्चित रूप से आगरा विश्व की फुटवियर कैपिटल के रूप में उभरेगा। -पूरन डावर, अध्यक्ष, आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चर्स एंड एक्सपोटर्स चैंबर

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पीढ़ियां दर पीढि़यां सहेजा हुनर

चमड़े के जूते बनाने का आगरा में लंबा इतिहास है। पीढ़ियां दर पीढि़या इस हुनर को सहेजा गया है। आगरा में कई परिवार ऐसे हैं जिनमें चार-चार, पांच-पांच पीढ़ियों से जूता बनाने का काम हो रहा है। बहुत बड़ा वर्ग सीधे रूप से आगरा में जूता निर्माण से जुड़ा है। -अनिल सोनी, जूता कारोबारी
 

अकबर से मिला सबसे पहले प्रोत्साहन

आगरा के जूते को सबसे पहले प्रोत्साहन अकबर से मिला। किले से जब सेना निकलती थी तो काजीपाड़ा टीले पर जूते बिकते थे। जिनकी खासियत से अकबर प्रभावित हुए। उन्होंने देशभर में आगरा से अपने सैनिकों के लिए जूते भेजे। जीआई टैग दस्तकारों का सम्मान है। -देवकी नंदन सोन, अध्यक्ष, उ.प्र. चर्म विकास उत्पादन समिति
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