{"_id":"3acfb452ee612c3834acaa6e31625aa1","slug":"lawyers-couldnt-meet-pm-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजनीति के आगे फिर फेल हुई वकालत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजनीति के आगे फिर फेल हुई वकालत
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 22 Feb 2015 02:08 AM IST
विज्ञापन
शनिवार को खंडपीठ स्थापना की मांग कर रहे आंदोलनकारियों को मायूस होना पड़ा। संघर्ष समिति की ओर से एक प्रतिनिधि प्रधानमंत्री से मिलने गए थे। मुलाकात तो दूर वह पीएम को अपना ज्ञापन तक न थमा सके।
शुक्रवार को खंडपीठ की मांग कर रहे वकीलों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात न होने की स्थिति में विरोध का एलान तो कर दिया। लेकिन राजनीति ने ऐसा दांव चला कि न मिल पाए, न विरोध कर पाए। इस बात का उन्हें मलाल भी है। संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी मनीष सिंह के अनुसार मोदी का विरोध न होने पाए इस चक्कर में भाजपा से जुड़े कुछ वकीलों ने शनिवार को मुलाकात के लिए एक प्रतिनिधि को बुला लिया। इससे बाहर विरोध नहीं हो सका और अंदर मुलाकात भी नहीं कराई। यह सब रणनीति के तहत हुआ।
दरअसल, संघर्ष समिति राजनीति की चाल को समझ नहीं पाई। एक बार साफ मना कर दिया गया था कि खंडपीठ मुद्दे पर मुलाकात नहीं हो पाएगी। क्योंकि पीएम व्यक्तिगत कार्यक्रम में आ रहे हैं। फिर शनिवार को भाजपा से जुड़े एक अधिवक्ता ने फोन कर कहा कि एक प्रतिनिधि की मुलाकात हो सकती है। लेकिन एक खास अधिवक्ता को ही भेजने को कहा गया। सूत्रों के अनुसार जिसे बुलाया गया, वह वकील साहब पुराने संघी है। फिलहाल, इस पूरे मामले को समझने में खंडपीठ आंदोलन के अगुवा नाकाम रहे। इसी चक्कर में न मुलाकात हुई, न विरोध।
विज्ञापन
विज्ञापन
शुक्रवार को खंडपीठ की मांग कर रहे वकीलों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात न होने की स्थिति में विरोध का एलान तो कर दिया। लेकिन राजनीति ने ऐसा दांव चला कि न मिल पाए, न विरोध कर पाए। इस बात का उन्हें मलाल भी है। संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी मनीष सिंह के अनुसार मोदी का विरोध न होने पाए इस चक्कर में भाजपा से जुड़े कुछ वकीलों ने शनिवार को मुलाकात के लिए एक प्रतिनिधि को बुला लिया। इससे बाहर विरोध नहीं हो सका और अंदर मुलाकात भी नहीं कराई। यह सब रणनीति के तहत हुआ।
विज्ञापन
दरअसल, संघर्ष समिति राजनीति की चाल को समझ नहीं पाई। एक बार साफ मना कर दिया गया था कि खंडपीठ मुद्दे पर मुलाकात नहीं हो पाएगी। क्योंकि पीएम व्यक्तिगत कार्यक्रम में आ रहे हैं। फिर शनिवार को भाजपा से जुड़े एक अधिवक्ता ने फोन कर कहा कि एक प्रतिनिधि की मुलाकात हो सकती है। लेकिन एक खास अधिवक्ता को ही भेजने को कहा गया। सूत्रों के अनुसार जिसे बुलाया गया, वह वकील साहब पुराने संघी है। फिलहाल, इस पूरे मामले को समझने में खंडपीठ आंदोलन के अगुवा नाकाम रहे। इसी चक्कर में न मुलाकात हुई, न विरोध।
विज्ञापन