फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   lady doctors demand convicts of Nirbhaya case should be hanged soon

अमर उजाला संवाद: महिला चिकित्सक बोलीं- दरिंदों की फांसी में देरी 'निर्भया' के साथ नाइंसाफी

Sat, 08 Feb 2020 12:08 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 08 Feb 2020 12:08 AM IST
विज्ञापन
lady doctors demand convicts of Nirbhaya case should be hanged soon
अमर उजाला संवाद में महिला चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला
जिनका कृत्य जानवरों जैसा है, उनके मानवाधिकार कैसे हो सकते हैं? दरिंदों को फांसी देने में की जा रही देरी निर्भया के साथ नाइंसाफी है, क्योंकि देर से मिला न्याय, अन्याय के समान होता है...। यह कहना है ताजनगरी की महिला चिकित्सकों का। 
विज्ञापन


अपराजिता अभियान के तहत अमर उजाला कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिला चिकित्सकों ने मांग उठाई कि ऐसा कानून बने जिसमें दुष्कर्मियों को दया याचिका का अधिकार न हो। 
विज्ञापन


महिलाओँ ने कहा कि दुष्कर्म से संबंधित कानून में संशोधन किया जाए। सजा में देरी से अपराधियों में कानून का डर नहीं रहता। उनका दुस्साहस बढ़ता है। चिकित्सकों ने ‘बेटों को संस्कारवान बनाओ, बेटियों को बचाओ’ का नारा बुलंद किया और बच्चों को ‘बैड टच-गुड टच’ की शिक्षा देना जरूरी बताया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

'फांसी के लिए तय हो अवधि'

'फांसी के लिए तय हो अवधि'
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ राशि गुप्ता ने कहा कि कोर्ट से सजा तय होने के बाद भी दोषियों को फांसी पर नहीं लगी। कानून के लचीलेपन का अपराधी फायदा उठा रहे हैं। न्याय में देरी भी एक तरह से अन्याय है। सजा होने के बाद फांसी के लिए अवधि तय होनी चाहिए।

'कानून में लचीलापन खत्म हो'
केडी डेंटल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. नमिता राघव ने कहा कि जिस घटना से पूरा देश हिल गया और सभी दुष्कर्मियों के खिलाफ एकजुट हुए, उस मामले में भी आठ साल हो गए अपराधियों को अभी तक सजा नहीं मिली है। कानून का लचीलापन खत्म किया जाना चाहिए।

‘बैड टच-गुड टच’ के बारे में बताएं
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सीमा सिंह ने कहा कि आठ साल से निर्भया के दरिंदे फांसी से बचे हुए हैं। यह शर्मनाक है। बलात्कार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक दायित्व की भी जरूरत है। अब बच्चों को गुड टच-बैड टच के बारे में बताना बेहद जरूरी है। 

'तय समय में सजा ही न्याय'
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा प्रतिहार ने कहा कि पीड़िताओं को तय समय में न्याय मिलना ही सही मायने में इंसाफ है। निर्भया के दोषी अभी तक फांसी पर नहीं लटकाए गए। अगर निर्भया जीवित रहती तो यह देखकर मानसिक रूप से उसकी रोज मौत होती।

'अपील की अवधि कम हो'
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा शर्मा ने कहा कि बलात्कार जैसे मामलों में पुलिस की चार्जशीट समेत जांच संबंधी तमाम प्रक्रियाएं तेजी से निपटाई जाएं। सजा तय होने पर अपराधियों को अपील करने की समय सीमा तय हो, जिससे अनावश्यक देरी नहीं होगी। 

'बेटों को संस्कारवान बनाओ'
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरजा सचदेवा ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया बेहद लंबी है, इससे अपराधी को सजा मिलने में देरी होती है। यह न्यायिक प्रक्रिया में सुधार के साथ जरूरी है कि लोग सामाजिक दायित्व निभाएं। बेटी को पढ़ाने के साथ ही बेटों को संस्कारवान बनाने की जरूरत है।
 
'एक साल में मिलती दोषियों को फांसी'
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ सना खान ने कहा कि निर्भया कांड से जिस तरह से देश में न्यायिक क्रांति आई। कानून बने और फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक साल में सजा सुना दी, दोषी तभी फांसी पर लटका दिए जाते तो यह नजीर बनता, लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हुआ।

'पीड़िताओं को सुरक्षा मिले'
पैथोलोजिस्ट डॉ. नेहा शर्मा ने कहा कि दुष्कर्म के कई मामले तो पुलिस और कोर्ट तक नहीं पहुंच पाते। अपराधी पीड़िता को प्रताड़ित करते हैं और धमकाते हैं। ऐसे में पीड़िता की सुरक्षा की जानी चाहिए। सरकार ऐसी कोई व्यवस्था बनाए।

'एनकाउंटर से पैदा होगा भय'
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. हर्षा माहेश्वरी ने कहा कि निर्भया के बाद भी कई बेटियों के साथ दुष्कर्म हुआ। हैदराबाद में चिकित्सक के साथ पशुता की, वहां की पुलिस ने चारों अपराधियों को एनकाउंटर कर दिया। ऐसा यहां भी होता तो अपराधियों में इसका डर बैठता।

'दुष्कर्म पशुता, दया के पात्र नहीं'
डायटीशियन सोनल भार्गव ने कहा कि निर्भया हो या फिर हैदराबाद की डॉक्टर बिटिया, इनके साथ अमानवीयता बरती गई। अपराधियों का यह कृत्य पशु समान है। यह दया के पात्र नहीं हो सकते, इनको दया याचिका का भी अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। 

'पीड़िता को समाज से सहयोग मिले'
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ मेघना गुप्ता ने कहा कि कई मौकों पर पीड़िता को परिवार और समाज का सहयोग नहीं मिलता। उसे ही दोष दिया जाता है। परिवार वाले उसके भविष्य और शादी के लिए चिंतित होकर कदम पीछे खींच लेते हैं, इससे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं।

'सजा में देरी से अपराधी निर्भय'
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति भारद्वाज ने कहा कि निर्भया के दोषी कानूनी दांवपेंच का सहारा लेकर सजा से अभी तक बचे हुए हैं। इससे अन्य अपराधियों में भी डर खत्म हो रहा है। ऐसे और मामलों में लंबी कानूनी लड़ाई में पीड़िता का कई बार हौसला जवाब दे जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed