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लाभचंद मार्केट विवाद: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, जिलाधिकारी समेत 8 अधिकारियों को नोटिस
Sat, 11 Apr 2026 11:47 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 11 Apr 2026 11:47 AM IST
सार
लाभचंद मार्केट के नजूल भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका पर डीएम समेत आठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। प्रशासन और पट्टाधारकों के बीच स्वामित्व को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है।
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लाभचंद मार्केट विवाद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के राजा मंडी स्थित बहुचर्चित लाभचंद मार्केट मामले में जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अमरजोत सिंह सूरी की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी समेत आठ अधिकारियों के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है। इसके साथ ही चार मई तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।
लाभचंद मार्केट का यह विवाद करीब आठ दशक पुराना है, जो मुख्य रूप से नजूल भूमि के स्वामित्व और पट्टे की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ा है। यह भूमि मूल रूप से सरकारी (नजूल) थी, जिसे 1940 और 1947 के दौरान विशेष शर्तों के साथ धर्मचंद जैन को पट्टे पर दिया गया था। आरोप है कि पट्टे की शर्तों के विरुद्ध यहाँ अवैध व्यावसायिक निर्माण किया गया और दुकानों को किराए पर उठा दिया गया।
शर्तों के उल्लंघन पर अप्रैल 2025 में नगर निगम ने पट्टा निरस्त कर दिया था। प्रशासन इसे सरकारी भूमि बता रहा है, जबकि पट्टाधारक इसे निजी संपत्ति होने का दावा कर रहे हैं। दुकानदार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जिलाधिकारी को सड़क की पैमाइश करने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।
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लाभचंद मार्केट का यह विवाद करीब आठ दशक पुराना है, जो मुख्य रूप से नजूल भूमि के स्वामित्व और पट्टे की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ा है। यह भूमि मूल रूप से सरकारी (नजूल) थी, जिसे 1940 और 1947 के दौरान विशेष शर्तों के साथ धर्मचंद जैन को पट्टे पर दिया गया था। आरोप है कि पट्टे की शर्तों के विरुद्ध यहाँ अवैध व्यावसायिक निर्माण किया गया और दुकानों को किराए पर उठा दिया गया।
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शर्तों के उल्लंघन पर अप्रैल 2025 में नगर निगम ने पट्टा निरस्त कर दिया था। प्रशासन इसे सरकारी भूमि बता रहा है, जबकि पट्टाधारक इसे निजी संपत्ति होने का दावा कर रहे हैं। दुकानदार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जिलाधिकारी को सड़क की पैमाइश करने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।
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