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किराए पर उठा दिए कांशीराम आवास
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काशीराम कालोनी नगला कीरत में कटे हुए मकानों की लिस्ट को देखते लोग
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। बसपा सरकार में बनाई गई कांशीराम कॉलोनी में गरीब बनकर बड़ी संख्या में अपात्रों ने सरकारी आवास प्राप्त कर लिए। 237 लोगों ने सरकारी आवास किराए पर उठा दिए। दूसरी जगह रह रहे 290 लोग आवासों में ताला डाले हुए हैं। जांच के दौरान खुलासा होने पर 527 लोगों को नोटिस भेजने के साथ ही कॉलोनी में दो दिन पहले सूची चस्पा करा दी है।
बसपा सरकार में मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत कांशीराम कॉलोनी नगला कीरत और आजाद नगर में बनाई गई थीं। दोनों कॉलोनी में आवासहीन गरीब लोगों को 1234 आवास आवंटित किए गए थे। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को आवास आवंटित करने के बाद आवासों की चाबी सौंप दी गई थी। वर्ष 2018 में तत्कालीन डीएम से अपात्रों को योजना का लाभ दिए जाने की शिकायत की गई। इसके बाद जांच शुरू कराई गई।
जांच टीम की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि 1234 आवासों में से 527 आवास अपात्रों ने हासिल कर लिए। 237 लोगों ने तो अपने सरकारी आवास किराए पर उठा दिए हैं। इन आवासों में किराएदार ही रहते हैं। आवास मालिक अपने निजी मकानों में रहते हैं, जबकि 290 आवासों में ताले लटके हुए हैं। इन आवासों के मालिक कहां रहते हैं इसकी जानकारी पड़ोसियों तक को नहीं है। जांच रिपोर्ट के बाद 527 चिह्नित लोगों को नोटिस भेजे गए हैं।
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पांच सदस्यीय समिति ने की थी जांच
तत्कालीन डीएम के निर्देश पर बनाई गई समिति में सिविल लाइन चौकी प्रभारी, नगर पालिका कर्मी, डूडा कर्मी, लेखपाल सहित एक राजस्व कर्मी को शामिल किया गया था। उनकी जांच रिपोर्ट के बाद चिह्नित किए गए 527 लोगों की सूची कॉलोनी में चस्पा कराई गई है।
जवाब नहीं देने पर आवंटन होगा निरस्त
डूडा द्वारा भेजे गए नोटिस और चस्पा की गई सूची में चिह्नित किए गए आवासों के आवंटियों से जवाब मांगा गया है। आवंटियों को 10 अगस्त तक जवाब देने को कहा गया है। जवाब नहीं देने और जवाब संतोषजनक नहीं होने पर आवास का आवंटन किया जाएगा।
जांच में धांधली का आरोप
नगला कीरत के सभासद प्रतिनिधि रंजीत सिंह, गोला बाजार के सभासद प्रतिनिधि राकेश कुमार ने आरोप लगाया है कि आवासों की जांच में धांधली की गई है, जो लोग मकानों में रह रहे हैं, उनकेे मकानों में ताले बंद दिखाए गए हैं। जबकि जिन मकानों में लंबे समय से ताले बंद हैं उनको सही बताया गया है।
पांच सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट के बाद नोटिस चस्पा कराए गए हैं। संबंधित लोगों से 10 अगस्त तक जवाब मांगा गया है। संबंधित लोगों का जवाब मिलनें के बाद ही डीएम के आदेश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आरके सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा
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बसपा सरकार में मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत कांशीराम कॉलोनी नगला कीरत और आजाद नगर में बनाई गई थीं। दोनों कॉलोनी में आवासहीन गरीब लोगों को 1234 आवास आवंटित किए गए थे। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को आवास आवंटित करने के बाद आवासों की चाबी सौंप दी गई थी। वर्ष 2018 में तत्कालीन डीएम से अपात्रों को योजना का लाभ दिए जाने की शिकायत की गई। इसके बाद जांच शुरू कराई गई।
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जांच टीम की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि 1234 आवासों में से 527 आवास अपात्रों ने हासिल कर लिए। 237 लोगों ने तो अपने सरकारी आवास किराए पर उठा दिए हैं। इन आवासों में किराएदार ही रहते हैं। आवास मालिक अपने निजी मकानों में रहते हैं, जबकि 290 आवासों में ताले लटके हुए हैं। इन आवासों के मालिक कहां रहते हैं इसकी जानकारी पड़ोसियों तक को नहीं है। जांच रिपोर्ट के बाद 527 चिह्नित लोगों को नोटिस भेजे गए हैं।
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पांच सदस्यीय समिति ने की थी जांच
तत्कालीन डीएम के निर्देश पर बनाई गई समिति में सिविल लाइन चौकी प्रभारी, नगर पालिका कर्मी, डूडा कर्मी, लेखपाल सहित एक राजस्व कर्मी को शामिल किया गया था। उनकी जांच रिपोर्ट के बाद चिह्नित किए गए 527 लोगों की सूची कॉलोनी में चस्पा कराई गई है।
जवाब नहीं देने पर आवंटन होगा निरस्त
डूडा द्वारा भेजे गए नोटिस और चस्पा की गई सूची में चिह्नित किए गए आवासों के आवंटियों से जवाब मांगा गया है। आवंटियों को 10 अगस्त तक जवाब देने को कहा गया है। जवाब नहीं देने और जवाब संतोषजनक नहीं होने पर आवास का आवंटन किया जाएगा।
जांच में धांधली का आरोप
नगला कीरत के सभासद प्रतिनिधि रंजीत सिंह, गोला बाजार के सभासद प्रतिनिधि राकेश कुमार ने आरोप लगाया है कि आवासों की जांच में धांधली की गई है, जो लोग मकानों में रह रहे हैं, उनकेे मकानों में ताले बंद दिखाए गए हैं। जबकि जिन मकानों में लंबे समय से ताले बंद हैं उनको सही बताया गया है।
पांच सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट के बाद नोटिस चस्पा कराए गए हैं। संबंधित लोगों से 10 अगस्त तक जवाब मांगा गया है। संबंधित लोगों का जवाब मिलनें के बाद ही डीएम के आदेश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आरके सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा