घोड़ा बग्गी पर सवार होकर आया दलित दूल्हा, गांव में ऐसा था माहौल
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बाराती जमकर नाचे झूमे। करीब एक घंटे से अधिक बारात ने गांव के निर्धारित रूट की विभिन्न गलियों में भ्रमण किया। इसके बाद सायं सवा सात बजे बारात दुल्हन शीतल के घर पहुंची।
जहां परिवार की परंपराओं के अनुसार घोड़ाबग्घी पर सवार दूल्हा संजय की अगुवानी की गई। उसे टीका लगाया गया और मुंह मीठा कराकर पानी पिलाया। इस दौरान बाराती बैंड वालों को इनाम भी देते नजर आए।
हाथरस से बारात लेकर आए दूल्हा संजय के चेहरे पर विजयी मुस्कान के भाव नजर आ रहे थे। बिना किसी विघ्न बाधा के बारात गांव पहुंची। बारात चढऩे के बाद वैवाहिक रस्में शुरू हो गईं। दुल्हन की विदाई अगले दिन सोमवार सुबह को होगी।
गांव में प्रशासन और पुलिस अफसरों ने कड़े सुरक्षा के प्रबंध निर्धारित किए हैं। बारात चढ़ाई के दौरान एडीएम राकेश कुमार, एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी व एसडीएम, सीओ, पीएसी, पुलिस के अलावा महिला पुलिस भी मौजूद रहीं।
बारात का रूट चार्ट पहले ही प्रशासन ने निर्धारित कर रखा था। इस बारात के रूट पर वर-वधू के परिवारों एवं गांव के लोगों की पहले से सहमति है। बता दें कि संजय और शीतल की शादी कई दिनों से चर्चा में है।
दुल्हन ने जताई ये आशंका
उसका का कहना है कि बारात चढ़ जाएगी और शादी हो जाएगी। वो विदा होकर ससुराल चली जाएगी, लेकिन उसे आशंका है कि कहीं बाद में गांव के लोग उसके भाई, माता-पिता व अन्य परिवारीजनों को परेशान कर सकते हैं। प्रशासन इस बात पर भी ध्यान दे।
गौरतलब है कि गांव निजामपुर में सवर्णों ने दलित दूल्हे की बारात चढ़ने का विरोध किया था। इस पर संजय ने प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। इस चर्चित शादी में घराती और बाराती दोनों पक्षों से करीब एक हजार लोगों ने हिस्सा लिया।