{"_id":"67f6c628f4e06e956201516a","slug":"kasganj-news-tulsidass-kasganj-news-c-175-1-kas1001-130320-2025-04-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra News: प्रशासन पहले कमेटी बनाए, फिर संत तुलसीदास के जन्मस्थान का पक्ष करे तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: प्रशासन पहले कमेटी बनाए, फिर संत तुलसीदास के जन्मस्थान का पक्ष करे तैयार
विज्ञापन
सोरोंजी में तुलसी प्रतिमा के नीचे कलेक्टर जे एम लोबो प्रभु द्वारा तुलसीदास के सम्बंध में लिखा
- फोटो : संवाद
सोरोंजी। संत तुलसीदास के जन्मस्थान से जुड़ा मामला हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन है। गोंडा जनपद के राजापुर के भागवताचार्य ने यह रिट लखनऊ खंड पीठ में दायर की है। जिस पर सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट के मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कासगंज, गोंडा एवं चित्रकूट के जिलाधिकारियों को नोटिस जारी कर पक्ष मांगा है।
इस प्रकरण को लेकर तीर्थनगरी के विद्वानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वह संत तुलसीदास पर काम करने वाले साहित्यकारों की कमेटी बनाएं। प्रमाण व साक्ष्य संकलित कर हाईकोर्ट में मजबूती से पक्ष रखें। सोरोंजी तीर्थस्थल में संत तुलसीदास के गुरु नरहरि की पाठशाला आज भी मौजूद है। संत तुलसीदास के चचेरे भाई नंददास के वंशज भी यहां निवास करते हैं और ननिहाल ताली गांव में है। सोरोंजी पक्ष के लोगों का कहना है कि तमाम गजेटियर्स, पौराणिक ग्रंथों व रामचरित मानस से यह स्पष्ट हो चुका है कि संत तुलसीदास का जन्मस्थान सोरोंजी शूकरक्षेत्र ही है। 1943 में एटा के कलेक्टर मिस्टर जे एम लोवोप्रभु ने संत तुलसीदास का स्मारक व भव्य प्रतिमा यहां स्थापित कराई। गजेटियर्स में भी संत तुलसीदास के सोरोंजी के जन्म के प्रमाण मिलते हैं।
ये हैं गजेटियर्स के प्रमाण
- अकबर के शासनकाल में तुलसीदास नाम के एक महात्मा जो सोरों, परगना अलीगंज जिला एटा के निवासी थे, यमुना किनारे उस जंगल में आए जहां अब राजापुर स्थित है- बांदा का गजेटियर-स्टेटिस्टिकल डिस्क्रिप्शन एंड हिस्टोरिकल एकाउंट आव दी नार्थ वेस्टर्न प्रोविंस ऑफ इंडिया, जिल्द प्रथम
विज्ञापन
सम्पादक-एडविन टी, एटकिंस, सन 1874 ई. , पृष्ठ संख्या 572-573
- अकबर के शासनकाल में तुलसीदास नामक एक भक्त ने सोरों से आकर राजापुर को बसाया, उन्होंने एक मन्दिर का निर्माण कराया और बहुत से अनुयायियों को आकर्षित किया-इम्पीरियल गजेटियर, जिल्द 11, द्वितीय संस्करण, सम्पादक-डब्लू डब्लू हंटर, 1886 ई., पृष्ठ संख्या-386-87
- राजापुर कस्बे का नाम है, और मजगांव उस मौजे अथवा ग्राम मंडल का जिसके समीप यह स्थित है, जनश्रुति के अनुसार रामायण के प्रसिद्ध रचियता तुलसीदासजी के द्वारा बसाया गया था, जिनका निवास स्थान अभी तक सोरों दिखाया जाता है-इम्पीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया, सन 1908 कलकत्ता, यूपी सेकंड प्राविंशियल सीरीज, पृष्ठ संख्या-50
-अकबर काल में तुलसी नामक महात्मा जो सोरों तहसील कासगंज जिला एटा के थे, यमुना किनारे उस जंगल में आये जहां अब राजापुर स्थित है, वो ही रामायण के रचयिता हैं-डिस्ट्रिक्ट गजेटियर ऑफ दी यूनाइटेड प्राविंसेज, जिल्द 21, सन 1909, पृष्ठ संख्या 285-86
क्या बोले विद्वान
- जिला प्रशासन को इस संबंध में तुलसीदास पर जिन लोगों ने शोध कार्य किया है, उनकी कमेटी बनाकर राय लेनी चाहिए। तुलसीदास के जन्म पर सूकर क्षेत्र में ढेरों अकाट्य प्रमाण मौजूद है- डॉ. आर के दीक्षित, सदस्य शिक्षा सेवा चयन आयोग एवं साहित्यकार
- जिलाधिकारी को अपनी अध्यक्षता में कमेटी का गठन करना चाहिए। वहीं साक्ष्य संकलन का कार्य राजस्व कर्मी कर रहे हैं। जबकि यह संकलन साहित्यकारों से हो तो सही पक्ष मिल सकेगा- डॉ. सुरेंद्र अग्रवाल, प्राचार्य, डिग्री कॉलेज।
- साहित्य का मामला है, साहित्यकार ही सही राय दे पाएंगे। इसलिए जिलाप्रशासन को हाईकोर्ट के नोटिस की गंभीरता व शूकरक्षेत्र के तुलसी से जुड़े मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए साहित्यकारों की कमेटी गठित करनी चाहिए- डॉ. प्रभाकर पाराशरी, संपादक, तुलसी मानस पत्रिका
- विषय विशेषज्ञ ही तुलसी जन्मभूमि के पुख्ता प्रमाण उपलब्ध करा सकते हैं। तुलसी में अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में राम चरित मानस, कवितावली, दोहावली में काफी लिखा है। शिलालेख, गजेटियर्स, विभिन्न विद्वानों के शूकरक्षेत्र को तुलसी जन्मभूमि सिद्ध करने वाले शोध पत्र पुख्ता प्रमाण हैं- उमेश पाठक, विद्वान साहित्यकार
विज्ञापन
इस प्रकरण को लेकर तीर्थनगरी के विद्वानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वह संत तुलसीदास पर काम करने वाले साहित्यकारों की कमेटी बनाएं। प्रमाण व साक्ष्य संकलित कर हाईकोर्ट में मजबूती से पक्ष रखें। सोरोंजी तीर्थस्थल में संत तुलसीदास के गुरु नरहरि की पाठशाला आज भी मौजूद है। संत तुलसीदास के चचेरे भाई नंददास के वंशज भी यहां निवास करते हैं और ननिहाल ताली गांव में है। सोरोंजी पक्ष के लोगों का कहना है कि तमाम गजेटियर्स, पौराणिक ग्रंथों व रामचरित मानस से यह स्पष्ट हो चुका है कि संत तुलसीदास का जन्मस्थान सोरोंजी शूकरक्षेत्र ही है। 1943 में एटा के कलेक्टर मिस्टर जे एम लोवोप्रभु ने संत तुलसीदास का स्मारक व भव्य प्रतिमा यहां स्थापित कराई। गजेटियर्स में भी संत तुलसीदास के सोरोंजी के जन्म के प्रमाण मिलते हैं।
विज्ञापन
ये हैं गजेटियर्स के प्रमाण
- अकबर के शासनकाल में तुलसीदास नाम के एक महात्मा जो सोरों, परगना अलीगंज जिला एटा के निवासी थे, यमुना किनारे उस जंगल में आए जहां अब राजापुर स्थित है- बांदा का गजेटियर-स्टेटिस्टिकल डिस्क्रिप्शन एंड हिस्टोरिकल एकाउंट आव दी नार्थ वेस्टर्न प्रोविंस ऑफ इंडिया, जिल्द प्रथम
विज्ञापन
सम्पादक-एडविन टी, एटकिंस, सन 1874 ई. , पृष्ठ संख्या 572-573
- अकबर के शासनकाल में तुलसीदास नामक एक भक्त ने सोरों से आकर राजापुर को बसाया, उन्होंने एक मन्दिर का निर्माण कराया और बहुत से अनुयायियों को आकर्षित किया-इम्पीरियल गजेटियर, जिल्द 11, द्वितीय संस्करण, सम्पादक-डब्लू डब्लू हंटर, 1886 ई., पृष्ठ संख्या-386-87
- राजापुर कस्बे का नाम है, और मजगांव उस मौजे अथवा ग्राम मंडल का जिसके समीप यह स्थित है, जनश्रुति के अनुसार रामायण के प्रसिद्ध रचियता तुलसीदासजी के द्वारा बसाया गया था, जिनका निवास स्थान अभी तक सोरों दिखाया जाता है-इम्पीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया, सन 1908 कलकत्ता, यूपी सेकंड प्राविंशियल सीरीज, पृष्ठ संख्या-50
-अकबर काल में तुलसी नामक महात्मा जो सोरों तहसील कासगंज जिला एटा के थे, यमुना किनारे उस जंगल में आये जहां अब राजापुर स्थित है, वो ही रामायण के रचयिता हैं-डिस्ट्रिक्ट गजेटियर ऑफ दी यूनाइटेड प्राविंसेज, जिल्द 21, सन 1909, पृष्ठ संख्या 285-86
क्या बोले विद्वान
- जिला प्रशासन को इस संबंध में तुलसीदास पर जिन लोगों ने शोध कार्य किया है, उनकी कमेटी बनाकर राय लेनी चाहिए। तुलसीदास के जन्म पर सूकर क्षेत्र में ढेरों अकाट्य प्रमाण मौजूद है- डॉ. आर के दीक्षित, सदस्य शिक्षा सेवा चयन आयोग एवं साहित्यकार
- जिलाधिकारी को अपनी अध्यक्षता में कमेटी का गठन करना चाहिए। वहीं साक्ष्य संकलन का कार्य राजस्व कर्मी कर रहे हैं। जबकि यह संकलन साहित्यकारों से हो तो सही पक्ष मिल सकेगा- डॉ. सुरेंद्र अग्रवाल, प्राचार्य, डिग्री कॉलेज।
- साहित्य का मामला है, साहित्यकार ही सही राय दे पाएंगे। इसलिए जिलाप्रशासन को हाईकोर्ट के नोटिस की गंभीरता व शूकरक्षेत्र के तुलसी से जुड़े मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए साहित्यकारों की कमेटी गठित करनी चाहिए- डॉ. प्रभाकर पाराशरी, संपादक, तुलसी मानस पत्रिका
- विषय विशेषज्ञ ही तुलसी जन्मभूमि के पुख्ता प्रमाण उपलब्ध करा सकते हैं। तुलसी में अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में राम चरित मानस, कवितावली, दोहावली में काफी लिखा है। शिलालेख, गजेटियर्स, विभिन्न विद्वानों के शूकरक्षेत्र को तुलसी जन्मभूमि सिद्ध करने वाले शोध पत्र पुख्ता प्रमाण हैं- उमेश पाठक, विद्वान साहित्यकार