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विश्व ऑस्टियापोरोसिस दिवस पर विशेष: पौष्टिक भोजन लेने में रहते फिसड्डी, कमजोर कर रहे हड्डी
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कासगंज। बदलते खान-पान में कम उम्र में ही लोगों को ऑस्टियापोरोसिस हो रहा है। यानी भरपूर और पौष्टिक भोजन न लेने वालों की हड्डी कमजोर हो रही हैं। एक दिन में ऐसे 25 तक मरीज जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं। इस बीमारी के प्रति अनजान रहना खतरनाक हो सकता है।
शरीर में हड्डियों का महत्वपूर्ण स्थान है। शरीर की पूरी संरचना इन्हीं पर टिकी रहती है। हड्डियों की मजबूती के लिए उचित खानपान आवश्यक है। नई पीढ़ी का रुझान पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लेने के बजाय फास्ट फूड की ओर तेजी से बढ़ा है। इसका असर हड्डियों की मजबूती पर पड़ा है। पहले 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की हड्डियां कमजोर होती थीं। अब यह अनुपात घटकर 40 की उम्र तक पहुंच गया है। बच्चे भी हड्डियों में कमजोरी का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल पहुंचने वाले ऐसे मरीजों के आंकडे़ चौंकाने वाले हैं। अस्पताल में एक दिन में 25 तक मरीज ऐसे पहुंचते हैं। इनमें से तकरीबन 8 मरीज 14 साल से कम आयु के बच्चे रहते हैं। 15 से 40 साल तक की आयु के मरीजों की संख्या 11 के आसपास होती है। चिकित्सक इस स्थिति को काफी खतरनाक मान रहे हैं।
क्या होता है ऑस्टियापोरोसिस
हड्डी के द्रव्यमान (बोन मास) में आई कमी हड्डियों के सामान्य ढांचे से हस्तक्षेप करने लगती है तो इस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस के रूप में पहचानते हैं। ऐसे में हड्डियां नाजुक और कमजोर हो जाती हैं। थोड़े से भी खिंचाव या भार से फ्रैक्चर होने की आशंका बढ़ जाती है।
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ये हैं लक्षण
-पीठ में दर्द होना।
-शरीर का झुका हुआ लगना।
-कमजोरी महसूस होना।
-आसानी से थक जाना।
-लगातार फ्रैक्चर आना।
रोग के कारण
-शरीर में विटामिन डी-3 की कमी।
- कैल्शियम कम होना।
- आनुवंशिक प्रवृतियां।
-सूर्य के प्रकाश का शरीर पर ना पड़ना।
-पर्यावरण का प्रदूषित होना।
-मोनोपॉज में महिलाओं में एस्ट्रोजन का कम स्तर।
-कैंसर ट्रीटमेंट।
-बिना मूवमेंट की लाइफ स्टाइल।
-शराब, धूम्रपान और तंबाकू का सेवन।
कैल्शियम और विटामिन डी की कमी के कारण बोन मास (घनत्व) कम हो जाता है। इससे हड्डियां भुरभुरी हो जाती हैं। हड्डियों के जल्द टूटने का खतरा रहता है। यह स्थिति खानपान में बदलाव के कारण हो रही है।-डॉ. कृष्ण अवतार, हड्डी रोग विशेषज्ञ
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शरीर में हड्डियों का महत्वपूर्ण स्थान है। शरीर की पूरी संरचना इन्हीं पर टिकी रहती है। हड्डियों की मजबूती के लिए उचित खानपान आवश्यक है। नई पीढ़ी का रुझान पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लेने के बजाय फास्ट फूड की ओर तेजी से बढ़ा है। इसका असर हड्डियों की मजबूती पर पड़ा है। पहले 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की हड्डियां कमजोर होती थीं। अब यह अनुपात घटकर 40 की उम्र तक पहुंच गया है। बच्चे भी हड्डियों में कमजोरी का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल पहुंचने वाले ऐसे मरीजों के आंकडे़ चौंकाने वाले हैं। अस्पताल में एक दिन में 25 तक मरीज ऐसे पहुंचते हैं। इनमें से तकरीबन 8 मरीज 14 साल से कम आयु के बच्चे रहते हैं। 15 से 40 साल तक की आयु के मरीजों की संख्या 11 के आसपास होती है। चिकित्सक इस स्थिति को काफी खतरनाक मान रहे हैं।
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क्या होता है ऑस्टियापोरोसिस
हड्डी के द्रव्यमान (बोन मास) में आई कमी हड्डियों के सामान्य ढांचे से हस्तक्षेप करने लगती है तो इस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस के रूप में पहचानते हैं। ऐसे में हड्डियां नाजुक और कमजोर हो जाती हैं। थोड़े से भी खिंचाव या भार से फ्रैक्चर होने की आशंका बढ़ जाती है।
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ये हैं लक्षण
-पीठ में दर्द होना।
-शरीर का झुका हुआ लगना।
-कमजोरी महसूस होना।
-आसानी से थक जाना।
-लगातार फ्रैक्चर आना।
रोग के कारण
-शरीर में विटामिन डी-3 की कमी।
- कैल्शियम कम होना।
- आनुवंशिक प्रवृतियां।
-सूर्य के प्रकाश का शरीर पर ना पड़ना।
-पर्यावरण का प्रदूषित होना।
-मोनोपॉज में महिलाओं में एस्ट्रोजन का कम स्तर।
-कैंसर ट्रीटमेंट।
-बिना मूवमेंट की लाइफ स्टाइल।
-शराब, धूम्रपान और तंबाकू का सेवन।
कैल्शियम और विटामिन डी की कमी के कारण बोन मास (घनत्व) कम हो जाता है। इससे हड्डियां भुरभुरी हो जाती हैं। हड्डियों के जल्द टूटने का खतरा रहता है। यह स्थिति खानपान में बदलाव के कारण हो रही है।-डॉ. कृष्ण अवतार, हड्डी रोग विशेषज्ञ