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बच्चों में कोई भी नए लक्षण नजर आएं तो न करें नजरंदाज : डॉ. पियाली
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कासगंज। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कोरोना से उत्पन्न हालातों पर विचार-विमर्श किया। बच्चों में कोरोना के लक्षणों और बचाव के तरीकों पर विषय विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी।
एसजीपीजीआई, लखनऊ की वरिष्ठ कंसलटेंट डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने कहा कि बच्चों में डायरिया, उल्टी-दस्त, सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, आँखें लाल होना या सिर व शरीर में दर्द होना, साँसों का तेज चलना आदि कोरोना के लक्षण हो सकते हैं। लक्षण दिखने पर चिकित्सक के संपर्क में रहें। उन्होंने बाल गृह में रह रहे बच्चों के लिए हेल्थ चार्ट बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बाल गृहों में हेल्प डेस्क की स्थापना हो और वहां पर हेल्पलाइन नंबर -1075, 1800112545 और चाइल्ड लाइन का नंबर 1098 का डिस्प्ले जरूर हो । मनोज कुमार राय ने कहा कि कोविड-19 को देखते हुए बाल गृहों में रह रहे बच्चों को पहले से ही विभिन्न आयु वर्ग में विभाजित कर उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जा रही है ।
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एसजीपीजीआई, लखनऊ की वरिष्ठ कंसलटेंट डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने कहा कि बच्चों में डायरिया, उल्टी-दस्त, सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, आँखें लाल होना या सिर व शरीर में दर्द होना, साँसों का तेज चलना आदि कोरोना के लक्षण हो सकते हैं। लक्षण दिखने पर चिकित्सक के संपर्क में रहें। उन्होंने बाल गृह में रह रहे बच्चों के लिए हेल्थ चार्ट बनाने पर जोर दिया।
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उन्होंने कहा कि बाल गृहों में हेल्प डेस्क की स्थापना हो और वहां पर हेल्पलाइन नंबर -1075, 1800112545 और चाइल्ड लाइन का नंबर 1098 का डिस्प्ले जरूर हो । मनोज कुमार राय ने कहा कि कोविड-19 को देखते हुए बाल गृहों में रह रहे बच्चों को पहले से ही विभिन्न आयु वर्ग में विभाजित कर उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जा रही है ।
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