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निगरानी : डॉल्फिन के परिवार को झाल के गहरे पानी का भाया वातावरण
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कासगंज। हजारा गंग नहर में डॉल्फिन का परिवार देखे जाने के बाद वन विभाग विशेष निगरानी और सर्वेक्षण में जुटा हुआ है। विभाग ने अब तक निगरानी में पाया है कि डॉल्फिन के परिवार को ततारपुर के समीप झाल के पुल के पानी का वातावरण भाया है। कई प्वाइंटों पर अठखेलियां करने के बाद डॉल्फिन परिवार निर्धारित प्वाइंट पर लौट आता है।
डॉल्फिन हजारा गंग नहर में देखी गई हैं। वन विभाग की टीम ने पाया है कि नर और मादा मछली के साथ एक बच्चा भी है। विभाग ने डॉल्फिन परिवार को देखने के बाद संरक्षण की कवायद तेज कर दी है। डॉल्फिन की क्या गतिविधि है। किस तरह वह पानी में अठखेलियां कर रही है। इन सभी गतिविधियों पर वन विभाग नजर बनाए हुए है। वन विभाग की टीमें बेहतर संरक्षण में जुट गई हैं।
वन विभाग का मानना है कि यह मछली करीब 10 फीट गहरे स्वच्छ पानी में रहना पसंद करती है। इस डॉल्फिन परिवार ने झाल के पुल के इलाके को अपना बसेरा बनाया है। क्योंकि यहां 16 से 18 फीट गहरा स्वच्छ पानी है। निगरानी में पाया जा रहा है कि डॉल्फिन अपने निर्धारित प्वाइंट से दो किलोमीटर तक पूरब पश्चिम की ओर अठखेलियां कर रही है और लौटकर फिर अपने निर्धारित प्वाइंट पर आ जाती है। विभाग कड़ी निगरानी में जुटा हुआ है।
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आए दिन देखे जा रहे मगरमच्छ
हजारा गंग नहर में डॉल्फिन ही नहीं बल्कि मगरमच्छ भी हैं। आए दिन नहर की पटरी के किनारे मगरमच्छ देखे जा रहे हैं। वन विभाग जलीय जीव मगरमच्छ के संरक्षण की भी कवायद में जुटा हुआ है।
ग्रामीणों से भी मांगा गया सहयोग
जलीय जीव डॉल्फिन और मगरमच्छ को कोई क्षति न पहुंचे और उनका संरक्षण बेहतर हो इसके लिए वन विभाग ग्रामीणों से भी सहयोग मांग रहा है। आस पास के ग्रामीणों को संरक्षण के गुर भी वन विभाग द्वारा बताए गए हैं।
वर्जन-
- डॉल्फिन परिवार झाल के पुल पर गहरे पानी में अपना बसेरा बना चुका है। डॉल्फिन के संरक्षण के लिए वन विभाग की टीमें अलग-अलग लगी हुई हैं। मगरमच्छ भी हजारा नहर की पटरियों पर आए दिन देखे जा रहे हैं। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।
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डॉल्फिन हजारा गंग नहर में देखी गई हैं। वन विभाग की टीम ने पाया है कि नर और मादा मछली के साथ एक बच्चा भी है। विभाग ने डॉल्फिन परिवार को देखने के बाद संरक्षण की कवायद तेज कर दी है। डॉल्फिन की क्या गतिविधि है। किस तरह वह पानी में अठखेलियां कर रही है। इन सभी गतिविधियों पर वन विभाग नजर बनाए हुए है। वन विभाग की टीमें बेहतर संरक्षण में जुट गई हैं।
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वन विभाग का मानना है कि यह मछली करीब 10 फीट गहरे स्वच्छ पानी में रहना पसंद करती है। इस डॉल्फिन परिवार ने झाल के पुल के इलाके को अपना बसेरा बनाया है। क्योंकि यहां 16 से 18 फीट गहरा स्वच्छ पानी है। निगरानी में पाया जा रहा है कि डॉल्फिन अपने निर्धारित प्वाइंट से दो किलोमीटर तक पूरब पश्चिम की ओर अठखेलियां कर रही है और लौटकर फिर अपने निर्धारित प्वाइंट पर आ जाती है। विभाग कड़ी निगरानी में जुटा हुआ है।
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आए दिन देखे जा रहे मगरमच्छ
हजारा गंग नहर में डॉल्फिन ही नहीं बल्कि मगरमच्छ भी हैं। आए दिन नहर की पटरी के किनारे मगरमच्छ देखे जा रहे हैं। वन विभाग जलीय जीव मगरमच्छ के संरक्षण की भी कवायद में जुटा हुआ है।
ग्रामीणों से भी मांगा गया सहयोग
जलीय जीव डॉल्फिन और मगरमच्छ को कोई क्षति न पहुंचे और उनका संरक्षण बेहतर हो इसके लिए वन विभाग ग्रामीणों से भी सहयोग मांग रहा है। आस पास के ग्रामीणों को संरक्षण के गुर भी वन विभाग द्वारा बताए गए हैं।
वर्जन-
- डॉल्फिन परिवार झाल के पुल पर गहरे पानी में अपना बसेरा बना चुका है। डॉल्फिन के संरक्षण के लिए वन विभाग की टीमें अलग-अलग लगी हुई हैं। मगरमच्छ भी हजारा नहर की पटरियों पर आए दिन देखे जा रहे हैं। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।