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बंदी की मौत के बाद जेल में बढ़ाई गई सतर्कता, आत्महत्या की जांच तेज
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कासगंज। जिला जेल में विचाराधीन बंदी की आत्महत्या के बाद सतर्कता बढ़ा दी गई है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जेल प्रशासन ने पहरेदारों को सजग रहने की सख्त हिदायत दी गई है। वहीं जेल प्रशासन ने बंदी के आत्महत्या के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फैजाबाद के जिला आंबेडकरनगर के गांव हरवंशपुर का बंदी ज्ञान प्रताप जिला जेल में बंद था। शुक्रवार रात उसने आत्महत्या कर ली थी।
बंदी की आत्महत्या के बाद जिले में अलर्ट है। जेल प्रशासन ने पहरेदारों की जिम्मेदारियां और बढ़ा दी हैं। बंदियों की निगरानी करने वाले सभी बंदीरक्षकों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे दिन के साथ ही रात में भी बैरकों पर कड़ी नजर रखें। प्रभारी जेल अधीक्षक आरके सिंह और डिप्टी जेलर समय-समय पर
ड्यूटी पर तैनात रहने वाले बंदी रक्षकों का पर्यवेक्षण करते रहेंगे।
पहले भी कर चुका था आत्महत्या की कोशिश
जेल प्रशासन ने जांच में पाया कि बंदी ज्ञान प्रताप पूर्व में भी आत्महत्या की कोशिश कर चुका था। पूर्व में उसने आत्महत्या करने की कोशिश जेल में की अथवा जेल से बाहर, यह जांच का विषय है, लेकिन फैजाबाद जिले की नगर कोतवाली में उसके खिलाफ आत्महत्या की धारा 309 के तहत मुकदमा दर्ज है। इसकी पुष्टि जेल प्रशासन ने की है। अब प्रशासन जानकारी कर रहा है कि उसने आत्महत्या करने की कोशिश कब की।
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जेल में है पहरेदारों की कमी
जेल में पहरेदारों की कमी है। जिला जेल में मानक के अनुसार बंदीरक्षक तैनात नहीं हैं। जेल प्रशासन उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर समय-समय पर जेल में बंदी रक्षकों की कमी होने की जानकारी देता रहा है। हांलाकि जितने भी बंदी रक्षक हैं जेल प्रशासन व्यवस्था बनाकर उनसे ही काम ले रहा है।
आंकड़े की नजर से-
- 150 आरक्षी होने चाहिए जिला जेल में।
- 42 आरक्षी हैं जेल में तैनात।
- 1050 कैदियों की क्षमता की है जिला जेल।
- 750 कैदी जिला जेल में हैं निरुद्ध।
बंदी द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना के बाद जिला जेल में पूरी तरह अलर्ट है। सभी बंदी रक्षकों को कड़ी हिदायत दे दी गई है कि यदि उन्होंने निगरानी में कहीं लापरवाही की तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। बंदी के खिलाफ फैजाबादी में आत्महत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज है।
- आरके सिंह, प्रभारी जेली अधीक्षक।
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बंदी की आत्महत्या के बाद जिले में अलर्ट है। जेल प्रशासन ने पहरेदारों की जिम्मेदारियां और बढ़ा दी हैं। बंदियों की निगरानी करने वाले सभी बंदीरक्षकों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे दिन के साथ ही रात में भी बैरकों पर कड़ी नजर रखें। प्रभारी जेल अधीक्षक आरके सिंह और डिप्टी जेलर समय-समय पर
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ड्यूटी पर तैनात रहने वाले बंदी रक्षकों का पर्यवेक्षण करते रहेंगे।
पहले भी कर चुका था आत्महत्या की कोशिश
जेल प्रशासन ने जांच में पाया कि बंदी ज्ञान प्रताप पूर्व में भी आत्महत्या की कोशिश कर चुका था। पूर्व में उसने आत्महत्या करने की कोशिश जेल में की अथवा जेल से बाहर, यह जांच का विषय है, लेकिन फैजाबाद जिले की नगर कोतवाली में उसके खिलाफ आत्महत्या की धारा 309 के तहत मुकदमा दर्ज है। इसकी पुष्टि जेल प्रशासन ने की है। अब प्रशासन जानकारी कर रहा है कि उसने आत्महत्या करने की कोशिश कब की।
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जेल में है पहरेदारों की कमी
जेल में पहरेदारों की कमी है। जिला जेल में मानक के अनुसार बंदीरक्षक तैनात नहीं हैं। जेल प्रशासन उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर समय-समय पर जेल में बंदी रक्षकों की कमी होने की जानकारी देता रहा है। हांलाकि जितने भी बंदी रक्षक हैं जेल प्रशासन व्यवस्था बनाकर उनसे ही काम ले रहा है।
आंकड़े की नजर से-
- 150 आरक्षी होने चाहिए जिला जेल में।
- 42 आरक्षी हैं जेल में तैनात।
- 1050 कैदियों की क्षमता की है जिला जेल।
- 750 कैदी जिला जेल में हैं निरुद्ध।
बंदी द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना के बाद जिला जेल में पूरी तरह अलर्ट है। सभी बंदी रक्षकों को कड़ी हिदायत दे दी गई है कि यदि उन्होंने निगरानी में कहीं लापरवाही की तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। बंदी के खिलाफ फैजाबादी में आत्महत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज है।
- आरके सिंह, प्रभारी जेली अधीक्षक।