फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   kanawad mela

कांवड़ मेलाः ग्वालियर-रामघाट तक धूम मचाएगी सोरों की कांवड़, तैयारी में जुटे कारीगर

Fri, 07 Feb 2020 11:06 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2020 11:06 PM IST
विज्ञापन
kanawad mela
ासगंज सोरों के होडलपुर में कंडिया तैयार करते कारीगर - फोटो : KASGANJ
सोरों (कासगंज)। कारीगरों के हाथों की कला इन दिनों सोरों में आस्था महका रही है। कांवड़ मेले से पहले होडलपुर के कारीगर बांस के टुकड़ों को आकार देकर आकर्षक कांवड़ तैयार करने में जुटे हुए हैं। प्रदेश के रामघाट, राजघाट सहित सुदूर इलाकों के अलावा देश के मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित कई प्रदेशों से व्यापारी यहां से कांवड़ ले जाकर आस्था को महकाते हैं। दूर-दूर तक सोरों की कांवड़ मशहूर है।
विज्ञापन

तीर्थनगरी में कांवर मेले की तैयारियां जोर शोर से चल रहीं हैं। सोरों में तैयार की जाने वाली कांवड़ कई क्षेत्रों तक जाती है। व्यापारी अभी से कांवड़ का ऑर्डर देने के लिए सोरों पहुंच रहे हैं। यह कांवड़ सोरों के होडलपुर गांव में तैयार होती हैं। इन दिनों गांव में में कांवड़ बनाने का काम निरंतर चल रहा है। बांस की खपच्चों से कंडिया बुनने का काम कारीगर निरंतर कर रहे हैं। पहले कंडिया तैयार की जाती है और फिर कारीगर पूरी कांवड़ को आकार देते हैं। तरह-तरह के रंगों से बांस को रंगकर कारीगर कंडिया तैयार करने में जुटे हैं। ग्वालियर के कुछ व्यापारियों ने सोरों में पहुंचकर कांवड़ तैयार कर रहे कारीगरों को अभी से कांवड़ तैयार करने का ऑर्डर भी दे दिया है। यहां की कांवड़ सुदूर इलाकों तक जाती हैं।
विज्ञापन

काम में जुटे बहेलिया जाती के परिवार
मेले के समय कांवड़ बनाकर व अन्य समय में खेतों में मजदूरी करके परिवार को पालने वाले बहेलिया जाति के लोग गांव होडलपुर में सबसे अधिक हैं। इस जाति के यहां 80 परिवार हैं। ये सब कांवड़ें बनाकर 25-30 साल से अपना भरण पोषण कर रहे हैं। इनमें से किसी भी परिवार के पास कृषि योग्य जमीन नहीं है। जीविका के लिए कांवड़ मेलों पर ही निर्भर करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

आंकड़े की नजर से-
- 12 रुपये जोड़ी बिक रही कंडिया।
- 100 से 125 रुपये तक की तैयार हो रहीं कांवड़।
- 25-30 कांवड़ एक दिन में एक कारीगर कर लेता है तैयार।
कारीगरों की बात-
बांस को रंगकर बनाते हैं कंडिया
बांस के खपच्चें रंगकर कंडिया को आकार देते हैं। रंग बिरंगी कंडिया बनाकर पूरी कांवड़ तैयार करते हैं। कांवड़ दूर दराज तक जाती हैं।
सोहन सिंह
तैयारी में जुटे हैं
यह काम सीजनल है। बाकी के दिनों में पंजाब में मजदूरी करने के लिए चले जाते हैं। कंडिया बनाने के लिए बांस जरूरी है।
देवकरन
बांस खरीदकर बनाते कांवड़
- बांस कासगंज से खरीद कर लाते हैं। उससे कंडिया बनाते हैं। ग्वालियर के एक व्यापारी ने हमें कांवड़ बनाने का ऑर्डर दिया है।
मोतीराम।
सिर्फ कंडिया तैयार कर रहे हैं
- हम कांवड़ नहीं बनाते सिर्फ कंडिया तैयार कर रहे हैं। एक दिन में पचास कंडिया बनाकर बेच देते हैं। दो सौ रुपये का मुनाफा हो जाता है। नन्हेंराम।

कासगंज सोरों के होडलपुर में कांवड़ तैयार करते कारीगर

कासगंज सोरों के होडलपुर में कांवड़ तैयार करते कारीगर- फोटो : KASGANJ

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed