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#kabtaknirbhaya: शिक्षाविद् व छात्राएं बोलीं- दुष्कर्म के मामले में तीन माह के अंदर हो फैसला

Thu, 05 Dec 2019 12:07 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 05 Dec 2019 12:07 PM IST
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#kabtaknirbhaya Teacher and Student Said Decision should be made within three months
अपराजिता अभियान के तहत संवाद में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग - फोटो : अमर उजाला
हैदराबाद में डॉक्टर बिटिया की दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना से शहर में गुस्सा और गुबार है। ऐसी घटनाओं पर रोक लगे। समाज में लड़कियां और महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करें, इसके लिए विभिन्न स्तरों पर बदलाव की दरकार है।
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अमर उजाला कार्यालय में अपराजिता अभियान के तहत संवाद में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग प्रतिभाग कर रहे हैं और अपनी बेबाक राय रख रहे हैं। इसी कड़ी में बुधवार को शिक्षाविदों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने विचार रखे।
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दंड जल्द मिले तो डर बैठेगा
नैतिक मूल्यों में कमी भी ऐसी घटनाओं का कारण बन रही है। शिक्षण संस्थानों से लेकर घरों तक में बच्चों में नैतिक मूल्य बढ़ाने के प्रयास करने होंगे। न्याय में देरी से भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अपराधी को दंड जल्द मिले तो लोगों में डर बैठेगा।  -डॉ. रामवीर सिंह चौहान, विभागाध्यक्ष, भौतिक विज्ञान, आरबीएस
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बेटे-बेटी को समान रूप से देखना होगा
लड़के और लड़की में भेद नहीं करना चाहिए। इसकी शुरुआत घर से करनी होगी। शिक्षा के स्तर में भी सुधार करना होगा। मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर देना होगा। सह शिक्षा व्यवस्था सभी शिक्षण संस्थानों में लागू होनी चाहिए, इससे भी भेदभाव कम होता है। -प्रो. ब्रजेश रावत, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, विवि 

फास्ट ट्रैक कोर्ट को तेजी से काम करना होगा
दुष्कर्म के मामलों को रोकने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट को तेजी से काम करना होगा। दुष्कर्म के मामले में फैसला जितनी जल्दी होगा और दोषी दंडित होंगे तो उसका समाज पर असर पड़ेगा। बेटियों को भी खुद की सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। -प्रो. शरद चंद्र उपाध्याय, निदेशक, दाऊदयाल इंस्टीट्यूट, विवि

न्याय को समय में बांधना जरूरी
दुष्कर्म आदि मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए कानून पर्याप्त है। न्याय व्यवस्था को समय में बांधना जरूरी है। ऐसे मामलों में तीन माह के अंदर फैसला सुना देना चाहिए। निर्णय में देरी से लोगों का भरोसा टूटता है, इसे बनाए रखने की जरूरत है। -प्रो. मोहम्मद अरशद, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, विवि

किशोरावस्था में काउंसिलिंग की जरूरत
छात्र-छात्राओं की किशोरावस्था में काउंसिलिंग करना जरूरी होता है। इस अवस्था में उनमें कई बदलाव आते हैं। वह कई विकल्पों की तरह बढ़ते हैं। मार्गदर्शन न मिलने पर अपने आनंद की चीजें चुनते हैं। माता-पिता को बच्चों को पूरा समय देना चाहिए। -डॉ. पूनम तिवारी, मनोविज्ञान विभाग, आरबीएस कॉलेज

बच्चों को पर्याप्त समय दें माता-पिता
माता-पिता और बच्चों के बीच दूरी बढ़ रही है। माता-पिता को बच्चों के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। इससे बच्चे तमाम बुराइयों से बचे रहेंगे। बेसिक शिक्षा स्तर से बच्चों को नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा देनी चाहिए। -गौरव शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, विश्वविद्यालय छात्रसंघ

बच्चों को पैसा ही नहीं, संस्कार भी देने की जरूरत
संयुक्त परिवार की व्यवस्था खत्म हो रही है। एकल परिवारों में माता-पिता बच्चों को खर्च के लिए भरपूर पैसा तो देते हैं, पर समय और संस्कार नहीं दे रहे हैं। बच्चों को घर में संस्कार मिलें तो वह तमाम विकृतियों से बचे रहेंगे। -दीप कुमार गर्ग, पीएचडी छात्र, विवि 

लड़कों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी
घर से लेकर बाहर तक लड़कों को लड़कियों के प्रति अपनी मानसिकता बदलनी होगी, तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी। लड़के खुद कुछ भी पहनते हैं और कहीं भी घूमते हैं, लड़कियों के पहनावे पर टिप्पणी करते हैं। समान व्यवहार करना चाहिए। -कार्तिक गौतम, छात्र, दाऊदयाल इंस्टीट्यूट, विवि

घर की पाठशाला में दिया जाए संस्कार
बच्चों को घर में संस्कार देना होगा। अच्छे संस्कार मिलने पर व्यवहार भी अच्छा होगा। न्याय व्यवस्था में भी सुधार की जरूरत है। दुष्कर्म के मामले में 10-20 दिन के अंदर ही फैसला सुना देना चाहिए। जिससे दोषी जल्द दंडित किए जा सकें। -अनंत चौधरी, महानगर मंत्री, एबीवीपी 

विरोधियों को नकारें नहीं, मुंहतोड़ जवाब दें
लड़कियों को घरवाले हमेशा विरोधियों (टिप्पणी या छेड़छाड़ करने वालों) को नकारने के लिए प्रेरित करते हैं। जरूरत विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब देने की होती है। लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। -सोनिया कर्दम, महानगर सह मंत्री एबीवीपी 

प्रतिक्रिया न देने से विरोधी को बल मिलता है
लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण जरूरत प्राप्त करना चाहिए। कोई हरकत करने पर प्रतिक्रिया न देने से विरोधी को बल मिलता है। सामाजिक संस्थानों में अभियान चलाकर इस बात के लिए अभिभावकों को जागरूक करना चाहिए। -प्रियंका नेगी, एबीवीपी की कार्यकर्ता 
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