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जवाहर बागः न्यायिक आयोग ने शासन को सौंपी रिपोर्ट, किए बड़े खुलासे

Thu, 04 May 2017 09:47 PM IST
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला मथुरा
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 04 May 2017 09:47 PM IST
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judicial commission handed over the report of jawahar bagh mathura to up government
jawahar bagh - फोटो : amar ujala
जवाहरबाग हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। पूरी जांच रिपोर्ट में आयोग ने बड़े खुलासे किए हैं। कहा गया है कि जवाहरबाग में हालात अफसरों की लापरवाही से बिगड़े। खुफिया एजेंसियां भी रामवृक्ष और उसके इरादों को पहचान नहीं पाई थीं। कई दूसरे बिंदुओं पर भी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही उजागर हो रही है।
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मथुरा के जवाहरबाग में 2 जून, 2016 को हुई हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव मारे गए थे। रामवृक्ष यादव समेत 27 कब्जाधारियों की भी मौत हो गई थी। शासन ने 10 जून को जवाहरबाग हिंसा की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया था। न्यायिक आयोग में 500 से भी ज्यादा लोगों के बयान हो चुके थे। 
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पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की गवाही हुई। दो दफा आयोग का कार्यकाल सरकार ने बढ़ाया भी था। इसी बीच 2 मार्च को हाईकोर्ट ने जवाहरबाग हिंसा की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए थे। जब सीबीआई जांच शुरू हुई तो सरकार ने 12 अप्रैल को न्यायिक आयोग को भंग करते हुए जांच रिपोर्ट शासन को सौंपने के लिए कहा था। इस पर आयोग ने शासन को अपनी रिपोर्ट 20 अप्रैल को सौंप दी है। 
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हालांकि जांच पूरी नहीं हो सकी थी लेकिन जितनी भी थी उसमें कई बिंदुओं पर अफसरों की लापरवाही सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि आयोग ने माना है कि अधिकारी शुरुआत में रामवृक्ष के आंदोलन को हल्के में लेते रहे। अगर शुरुआत से ही गंभीरता दिखाई होती तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। एक आदमी सरकारी संपत्ति पर कब्जा जमाकर बैठ जाता है और प्रशासन खामोश रहता है। इतना ही नहीं खुफिया एजेंसियां यह भी अनुमान नहीं लगा सकीं कि जवाहरबाग में कितने लोग हैं। रामवृक्ष की मौत के वैज्ञानिक आधार को लेकर भी गंभीरता नहीं बरती गई। सैंपल के लिए रामवृक्ष के बेटे की तलाश भी बहुत बाद में शुरू की गई। 

इस तरह की गई थी जांच

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न्यायिक आयोग - फोटो : अमर उजाला
- न्यायिक आयोग ने जवाहरबाग का निरीक्षण किया था
- पहले लोगों के बयान हुए फिर शपथ पत्र। इसके बाद गवाही हुई
- 500 से ज्यादा लोगों की गवाही इस मामले में हो चुकी थी
- पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की थी उसका भी अध्ययन किया गया
- जवाहरबाग में जाने वाले पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के बयान हुए
- जो ट्रेनी और कांस्टेबल गए थे उनकी भी गवाही कराई गई थी।

रामवृक्ष यादव के मारे जाने का साक्ष्य मिल पाने की संभावना कम

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रामवृक्ष यादव
मथुरा की जवाहर हिंसा में मारे गए लोगों के शवों का डीएनए टेस्ट पूरा होते ही पुलिस के कई अफसरों की गर्दन फंसने जा रही है। ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि जिस शव को हिंसा के मुख्य सूत्रधार रामवृक्ष का बताया गया, उसके डीएनए से किसी भी शव के डीएनए का मिलान होने की संभावना बहुत कम है।

दरअसल, सीबीआई को सैंपल सौंपे जाने से पहले लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला में अनौपचारिक रूप से तमाम परीक्षण कर लिए गए थे। डीएनए मिलान न हो पाने के चलते वैज्ञानिक डर गए। इसी डर के चलते टेस्ट की रिपोर्ट न देकर तमाम सैंपल सीबीआई को सौैंपे जाने का निर्णय लिया गया।

केस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिस शव को रामवृक्ष यादव का बताया गया था, सबसे पहले उसी का डीएनए निकाला गया। इसे उसके दो बेटों के डीएनए से मिलान करके देखा गया। मिलान नहीं हो पाया। यह बात पुलिस के आला अफसरों को बताई गई तो उनके होश उड़ गए। इसका अर्थ यह भी था कि रामवृक्ष हिंसा में नहीं मारा जबकि उसकी मौत हो जाने का दावा तत्कालीन डीजीपी तक ने किया था।

पुलिस अफसरों ने सोचा कि हो सकता है रामवृक्ष के बजाय किसी और कब्जाधारी के शव को उसका मान लिया गया हो। इसके चलते सभी 22 शवों के डीएनए से रामवृक्ष के बेटों के डीएनए का अनौपचारिक रूप से मिलान कराकर देखा गया। एक से भी मिलान नहीं हुआ। उधर इतने परीक्षण किए जाने से केमिकल खत्म हो गए।

लैब अधिकारियों ने मिलान की रिपोर्ट नहीं बनाई बल्कि यह कह दिया कि अभी परीक्षण पूरा नहीं हुआ है। इसके बाद तमाम सैंपल सीबीआई को सौंप दिए गए। अब सीबीआई हैदराबाद लैब में परीक्षण कराएगी। माना जा रहा है कि इसकी रिपोर्ट आते ही पुलिस के वे सभी अफसर फंस जाएंगे जिन्होंने रामवृक्ष की मौत का दावा किया था। बता दें, रामवृक्ष के बेटे विवेक यादव समेत मौके से पकड़े गए लोग अब बयान दे रहे हैं कि रामवृक्ष को मौके से जीवित पकड़ा गया था।
 
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