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UP: 25 बार प्रसव और 5 बार महिला की नसबंदी, जननी सुरक्षा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा; जो फाइलों में दब गया
Mon, 06 Apr 2026 09:31 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 06 Apr 2026 09:31 AM IST
सार
आगरा के फतेहाबाद सीएचसी में फर्जी प्रसव और नसबंदी दिखाकर लाखों रुपये के घोटाले का मामला एक साल बाद भी अधूरा है। जांच लंबित है और दोषी कर्मचारियों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।
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जननी सुरक्षा योजना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) और नसबंदी घोटाले की जांच दबा दी गई है। साल भर हो जाने पर भी जांच पूरी नहीं हो सकी। दोषी आशा और स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ पर कार्रवाई नहीं की है।
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बीते साल ऑडिट सत्र में फतेहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 2021-2024 सत्र में फर्जी जेएसवाई-नसबंदी का मामला पकड़ा गया था। एक-एक महिला के 20-25 बार प्रसव और 3-5 बार नसबंदी करा दी। कृष्णा के 25 बार प्रसव व 5 बार नसबंदी, कस्तूरी देवी के 19 बार प्रसव व एक बार नसबंदी, सुनीता और मछला देवी के 18-18 बार प्रसव और तीन-तीन बार नसबंदी दिखाकर घोटाला किया।
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6 महिलाओं के दो साल में 116 बार प्रसव और 19 बार नसबंदी दर्शाते हुए 1.88 लाख रुपये अपने खाते में डलवा लिए गए। इस घोटाले में आशाओं और स्टाफ के बयान भी हुए। इसके बाद भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि घोटाले रुपयों की रिकवरी हो गई है। अभी जांच चल रही है।
शासन स्तर से होती जांच तो फंस जाते अधिकारी
जेएसवाई घोटाले की शासन स्तर से जांच नहीं की गई। शासन स्तर से घोटाले की जांच में स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी भी फंस सकते थे। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने ही मामले की जांच की, जिसके चलते सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
जेएसवाई घोटाले की शासन स्तर से जांच नहीं की गई। शासन स्तर से घोटाले की जांच में स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी भी फंस सकते थे। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने ही मामले की जांच की, जिसके चलते सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
चार के खिलाफ दर्ज हुआ था प्राथमिकी
घोटाले में स्वयं सहायता समूह का संचालक अशोक कुमार, ब्लॉक लेखा प्रबंधक नीरज अवस्थी-अजहर, ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी गौरव थापा, डाटा एंट्री ऑपरेटर गौतम सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
घोटाले में स्वयं सहायता समूह का संचालक अशोक कुमार, ब्लॉक लेखा प्रबंधक नीरज अवस्थी-अजहर, ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी गौरव थापा, डाटा एंट्री ऑपरेटर गौतम सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।